चेहरे की चमक और पेट की चर्बी के लिए योग: आसान सूक्ष्म व्यायाम विधि

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चेहरे, गर्दन और पेट के लिए सहज योग व्यायाम: ज्ञानेंद्रियों और पाचन को स्वस्थ रखने की सरल विधि

शरीर के बड़े जोड़ों के साथ-साथ हमारी ज्ञानेंद्रियों (आँख, कान, जीभ आदि), चेहरे की मांसपेशियों और पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद और योग के अनुसार, ये सूक्ष्म क्रियाएं आपके चेहरे का ग्लो बढ़ाती हैं, तनाव दूर करती हैं और पाचन तंत्र को मजबूत करती हैं। आइए जानते हैं इनकी सही विधि।

1. छाती और गर्दन का व्यायाम

छाती का व्यायाम:- सीधे बैठें या खड़े हों। गहरी लंबी सांस अंदर भरें और फिर पूरी तरह बाहर छोड़ें। इस क्रिया को 3 से 4 बार दोहराएं। यह फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।

गर्दन का व्यायाम :-  पूर्व स्थिति में बैठे हुए सिर को नीचे झुकाएं ताकि आपकी ठुड्डी (Chin) कंठ कूप (गर्दन के गड्ढे) से लग जाए। फिर सिर को जितना पीछे ले जा सकते हैं, ले जाएं (4-5 बार)। इसके बाद गर्दन को एक बार दाईं ओर कंधे से और फिर बाईं ओर कंधे से मिलाने का प्रयास करें। अंत में, गर्दन को क्लॉकवाइज़ और एंटी-क्लॉकवाइज़ गोल घुमाएं।विशेष नोट: गर्दन घुमाते समय आंखें बंद रखें। क्रिया पूरी होने पर दोनों हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और बंद पलकों को सेंक दें।

विशेष नोट: गर्दन घुमाते समय आंखें बंद रखें। क्रिया पूरी होने पर दोनों हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और बंद पलकों को सेंक दें।

मुख, जबड़े और दांतों की क्रियाएं

जबड़े का व्यायाम :- मुंह को जितना अधिक फैला सकते हैं, पूरा खोलें। कुछ क्षण रुकें, फिर बंद कर लें। इसके बाद जबड़े को दाएं से बाएं और बाएं से दाएं गोल घुमाएं। यह चेहरे के तनाव को दूर करता है।दांतों का

व्यायाम:-  मुंह बंद करें और दांतों की बनावट को ऊपर-नीचे एक समान मिलाएं। पहले आगे के दांतों को और फिर पीछे की दाढ़ों को आपस में हल्के दबाव के साथ दबाएं और ढीला छोड़ें (4-6 बार)।

चेतावनी: जिन लोगों के नकली दांत लगे हों, वे दांतों को दबाने वाली यह क्रिया न करें।

आँख, जीभ, गाल और कान का योग (फेस योगा)

नेत्रों का व्यायाम: इसे तीन प्रकार से करें:सामने किसी बिंदु पर बिना पलक झपकाए लगातार एकटक देखें, फिर आंखें बंद कर लें (2-4 बार)।गर्दन सीधी रखकर पुतलियों को जितना दाईं और बाईं ओर ले जा सकते हैं, ले जाकर देखें।पुतलियों को दाएं से बाएं और बाएं से दाएं गोल-गोल चक्राकार घुमाएं। अंत में हथेलियां रगड़कर आंखों को सेंक दें। (नकली आंख वाले लोग इसे न करें)

जीभ का व्यायाम वज्रासन या सुखासन में बैठें। जीभ को जितना हो सके बाहर निकालें, कुछ क्षण रुकें और फिर अंदर लें।गालों का व्यायाम (क्रमांक 17): मुंह के अंदर हवा भरकर गालों को जितना फुला सकते हैं फुलाएं, फिर ढीला छोड़ें। यह चेहरे की झुर्रियों को रोकता है।

कानों का व्यायाम : कानों के चारों हिस्सों (नीचे, ऊपर, आगे और पीछे) को उंगलियों से पकड़कर क्रमशः नीचे, ऊपर, पीछे और आगे की तरफ हल्का सा खींचें। ताकत सामान्य लगाएं ताकि भीतर तक हल्का खिंचाव महसूस हो। बाद में हथेलियों से पूरे कानों की मालिश करें।

 

FAQ

+ उपनौली (पेट का व्यायाम) करने के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

उपनौली क्रिया (जिसे अग्निसार जैसी क्रिया भी कहा जाता है) से पेट के आंतरिक अंगों जैसे लिवर, आंतों और आमाशय की अच्छी मालिश हो जाती है। यह कब्ज, गैस, अपच (Indigestion) को दूर करती है और पेट की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में बहुत मददगार है।
Khushi prerna

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