भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India): इतिहास, आंदोलन और बोर्ड परीक्षा के लिए
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भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल एक राजनीतिक लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के दिलों में जागी 'राष्ट्रवाद' (Nationalism) की वह भावना थी जिसने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
कक्षा 10 इतिहास का यह अध्याय परीक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आइए, इस अध्याय को आसान भाषा में और क्रमबद्ध (Chronological) तरीके से समझते हैं1. राष्ट्रवाद का अर्थ क्या है?
राष्ट्रवाद का सरल अर्थ है-अपने देश के प्रति प्रेम, निष्ठा, एकता और संप्रभुता की भावना।
भारत में आधुनिक राष्ट्रवाद का उदय ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन (British Colonial Rule) के विरोध से जुड़ा हुआ है। जब लोगों ने यह महसूस किया कि अंग्रेजों का शासन उन सभी का समान रूप से शोषण कर रहा है, तब अलग-अलग वर्गों और समूहों में एकता की भावना पनपी।
प्रथम विश्व युद्ध ने भारत में एक नई राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पैदा कर दी:
कर (Taxes) में वृद्धि: युद्ध के खर्चे को पूरा करने के लिए सीमा शुल्क बढ़ाया गया और आयकर (Income Tax) शुरू किया गया।
कीमतों में बढ़ोतरी: 1913 से 1918 के बीच चीजों की कीमतें दोगुनी हो गईं, जिससे आम जनता की परेशानियां बढ़ गईं।
जबरन भर्ती: गांवों से जबरन लोगों को सेना में भर्ती किया गया।
महामारी और भुखमरी: 1918-21 में फसलें खराब हुईं और फ्लू की महामारी फैली, जिसमें लाखों लोग मारे गए
1915 में दक्षिण अफ्रीका से लौटने के बाद, महात्मा गांधी ने भारत में सत्याग्रह (Satyagraha) का विचार प्रस्तुत किया। सत्याग्रह का मूल मंत्र था-सत्य की शक्ति पर आग्रह और अहिंसा के मार्ग पर चलना।
गांधी जी के शुरुआती तीन सफल सत्याग्रह आंदोलन:
चंपारण सत्याग्रह (1917, बिहार): नील की खेती करने वाले किसानों के हक के लिए।
खेड़ा सत्याग्रह (1917, गुजरात): फसल खराब होने पर लगान माफी के लिए।
अहमदाबाद सत्याग्रह (1918, गुजरात): सूती कपड़ा मिल मजदूरों की मजदूरी बढ़वाने के लिए।
रौलट एक्ट (Rowlatt Act 1919): इसे 'काला कानून' भी कहा गया। इसके तहत सरकार को किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए 2 साल तक जेल में बंद रखने का अधिकार मिल गया।
जलियांवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919): अमृतसर में रौलट एक्ट का विरोध करने और बैसाखी का मेला देखने एकत्र हुए शांतिपूर्ण जनसमूह पर जनरल डायर ने अंधाधुंध गोलियां चलवाईं। इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया और राष्ट्रवाद की लहर को और तेज कर दिया।
आंदोलनसमयमुख्य कारण / उद्देश्यपरिणाम / समाप्ति
असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement)1920-1922अंग्रेजों के साथ सहयोग न करना, स्वदेशी अपनाना और खिलाफत मुद्दे का समर्थन।चौरी-चौरा कांड (1922) में हिंसा होने के कारण गांधी जी ने इसे वापस ले लिया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement)1930-1934औपनिवेशिक कानूनों (विशेषकर नमक कानून) को तोड़ना। इसकी शुरुआत दांडी यात्रा (12 मार्च - 6 अप्रैल 1930) से हुई।गांधी-इरविन समझौते के बाद कुछ समय के लिए स्थगित, फिर पुनः शुरू होकर 1934 में समाप्त हुआ।
भारत माता की छवि: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने भारत माता का पहला चित्र बनाया और 'वंदे मातरम' गीत लिखा। बाद में अबनिंद्रनाथ टैगोर ने भी भारत माता की शांत और शांतचित्त छवि चित्रित की।
लोककथाएं और गीत: रवींद्रनाथ टैगोर और नटेसा शास्त्री जैसे विद्वानों ने लोकगीतों और कथाओं को एकत्र किया ताकि सांस्कृतिक स्वाभिमान जागे।
झंडा: महात्मा गांधी ने 1921 में स्वराज का तिरंगा झंडा तैयार किया (लाल, हरा और सफेद रंग, जिसके बीच में चरखा था)।
तारीखों की टाइमलाइन बनाएं: 1915 (गांधी जी की वापसी) से लेकर 1930 (दांडी यात्रा) तक के मुख्य कार्यक्रमों की एक सूची बनाएं।
मानचित्र (Map Work): चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद, चौरी-चौरा, अमृतसर और दांडी को भारत के मानचित्र पर अंकित करने का अभ्यास जरूर करें।
सत्याग्रह और नमक कानून: इन दोनों विषयों पर 5-5 नंबर के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं, इन्हें अच्छे से तैयार करें।
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Mahi Korav
Verified Author Expert@DigitalDiaryWefru