आचार्य रामचंद्र शुक्ल
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जीवन परिचय
आचार्य रामचंद्र शुक्ल
पुरानाम - आचार्य रामचंद्र शुक्ल जन्म स्थान - 4अक्टूबर 1884 ई० में अगौना , जिला उ०। मृत्यु - 2 फरवरी 1984 ई० में वाराणसी में
पिता - चंद्रावली शुक्ल
माता-विभाषी
भाषा ज्ञान-हिंदी उर्दू संस्कृत और अग्रेजी
जीवन परिचय-आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जन्म 1884 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के जनपद ब बस्ती के ग्राम अगोना मैं हुआ था । इनकेपता का नाम पंडित चंद्रबली शुक्ल था । उनकी प्रारंभिक शिक्षा हमीरपुर जिले के राठ तहसील में हुई सन 1898 में उन्होंने मिर्जापुर के जुबली स्कूल मिडिल परीक्षा उतरन करने के पश्चात मिर्जापुर में ही लंदन मिशन स्कूल से 1901 ईस्वी में स्कूल फाइनल की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात इंटर की पढ़ाई के लिए कायस्थ पाठशाला प्रयागराज में प्रवेश लेने लिए किंतुकछ कुछ करनवास पढ़ाई अधूरी रह गई स्वाध्याय द्वारा उन्हें साहित्य के क्षेत्र में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ तथा 1904 ईस्वी में लंदन मिशन स्कूल में कलाध्यापक नियुक्त हुए उन्होंने 1908 ईस्वी में हिंदी शब्द सागर के सहायक संपादन के रूप में काशी नगरी प्रचारिणी सभा में, कार्य प्रारंभ किया 1919ई ये काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक नियुक्त हुए तथा श्याम सुंदर दास के अवकाश ग्रहण करने के पश्चात सन 1937 ई मैं अध्यक्ष पद क को सुशोभित किया । तथा इस पद पर कार्यरत रहते हुए 1941 ईस्वी में उनका निधन हो गया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल हिंदी साहित्य के शीर्षक आलोचक इतिहासकार और श्रेष्ठ आलोचक इतिहासकार और श्रेष्ठ निबंधकार रहे हैं।
प्रमुख रचनाएं- गोस्वामी तलसीदास , सूरदास जायसी ग्रंथावली , हिंदी साहित्य का इतिहास चिंतामणि , बुद्धि चरित्र उनेक ग्रंथ है।
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