चालाक गीदड़ सुंदरवन में एक शेर रहता था वह अब बहुत बूढ़ा हो गया था वह दौड़ नहीं पता था अब उसके लिए शिकार करना कठिन हो गया था भजन नायक मिलने से वह दुबला हो गया था वह अपनी गुफा के सामने ही बैठा रहता था। एक दिन एक गीदड़ वहां से गुजर गीदड़ उससे बोला अरे महाराज क्या बात है आप कुछ परेशान दिखाई दे रहे हैं गीदड़ तंदुरुस्त था उसे देखकर बूढ़े शेर के मुंह में पानी आ गया। भागीदार को खाना चाहता था गीदड़ बहुत चालाक था वह शेर से बहुत दूर खड़ा हो गया जिससे कि वह शेर की पकड़ में ना आ सके। गीदड़ की बात सुनकर शेर बोला , "गीदड़ भैया! "बूढ़ा होने के कारण में चल फिर नहीं सकता और ना ही ठीक से सुन पाता हूं जरा पास आकर कहे क्या कहना चाहते हो?" गीदड़ भी काम चालक ना था। वह शेर से और दूर है गया और धीरे से बोला, "चुप मूर्ख! क्या बकबक करता है!"यह सुनते ही शेयर क्रोध से भर गया और उससे कहा, "मुझे मूर्ख कहता है तेरी इतनी हिम्मत?" क्रोध से थर-थर कांप ता हुआ शेर उठकर जैसे ही उसकी और झपटने को तैयार हुआ। गीदड़ दूर था। वह पहुंच नहीं पाया। गीदड़ हंसता हुआ बोल,"महाराज! मैं यही देखना चाहता था कि क्या आप सचमुच सुन नहीं पाते? "यह कहकर गीदड़ वहां से भाग गया। शेर अपना सा मुंह लेकर रह गया।
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