Company Logo

Nikita Babre

WEFRU8550291115202
Scan to visit website

Scan QR code to visit our website

Blog by Nikita Babre | Digital Diary

" To Present local Business identity in front of global market"

Meri Kalam Se
Digital Diary Submit Post Nikita Babre

चालाक गीदड़

         चालाक गीदड़  सुंदरवन में एक शेर रहता था वह अब बहुत बूढ़ा हो गया था वह दौड़ नहीं पता था अब उसके लिए शिकार करना कठिन हो गया था भजन नायक मिलने से वह दुबला हो गया था वह अपनी गुफा के सामने ही बैठा रहता था। एक दिन एक गीदड़ वहां से गुजर गीदड़ उससे बोला अरे महाराज क्या बात है आप कुछ परेशान दिखाई दे रहे हैं गीदड़ तंदुरुस्त था उसे देखकर बूढ़े शेर के मुंह में पानी आ गया। भागीदार को खाना चाहता था गीद... Read More
         चालाक गीदड़  सुंदरवन में एक शेर रहता था वह अब बहुत बूढ़ा हो गया था वह दौड़ नहीं पता था अब उसके लिए शिकार करना कठिन हो गया था भजन नायक मिलने से वह दुबला हो गया था वह अपनी गुफा के सामने ही बैठा रहता था। एक दिन एक गीदड़ वहां से गुजर गीदड़ उससे बोला अरे महाराज क्या बात है आप कुछ परेशान दिखाई दे रहे हैं गीदड़ तंदुरुस्त था उसे देखकर बूढ़े शेर के मुंह में पानी आ गया। भागीदार को खाना चाहता था गीदड़ बहुत चालाक था वह शेर से बहुत दूर खड़ा हो गया जिससे कि वह शेर की पकड़ में ना आ सके। गीदड़ की बात सुनकर शेर बोला , "गीदड़ भैया! "बूढ़ा होने के कारण में चल फिर नहीं सकता और ना ही ठीक से सुन पाता हूं जरा पास आकर कहे क्या कहना चाहते हो?" गीदड़ भी काम चालक ना था। वह शेर से और दूर है गया और धीरे से बोला, "चुप मूर्ख! क्या बकबक करता है!"यह सुनते ही शेयर क्रोध से भर गया और उससे कहा, "मुझे मूर्ख कहता है तेरी इतनी हिम्मत?" क्रोध से थर-थर कांप ता हुआ शेर उठकर जैसे ही उसकी और झपटने को तैयार हुआ। गीदड़ दूर था। वह पहुंच नहीं पाया। गीदड़ हंसता हुआ बोल,"महाराज! मैं यही देखना चाहता था कि क्या आप सचमुच सुन नहीं पाते? "यह कहकर गीदड़ वहां से भाग गया। शेर अपना सा मुंह लेकर रह गया।
Read Full Blog
[email protected] 18 Sep 2026 6 Views

बोलने वाला पेड़

           बोलने वाला पेड़ मैं एक पेड़ था मुझे वृक्ष करो और पादप भी कहते थे धरती की गोद में मेरा जन्म हुआ। मुझे आज भी याद है जब किसी सज्जन ने अपने बगीचे में मेरे बीज को धरती के अंदर गाड़ दिया था। मैं तो बिल्कुल घबरा उठा था लेकिन प्रकृति की मानता है कि उसने मुझे प्रकाश और हवा प्रदान की। वह व्यक्ति भी मुझे रोज देखने आता था और पानी देता था हवा पानी और प्रकाश प्रकार मेरे अंदर अंकुर फूट गए मेरा अंकुर द... Read More
           बोलने वाला पेड़ मैं एक पेड़ था मुझे वृक्ष करो और पादप भी कहते थे धरती की गोद में मेरा जन्म हुआ। मुझे आज भी याद है जब किसी सज्जन ने अपने बगीचे में मेरे बीज को धरती के अंदर गाड़ दिया था। मैं तो बिल्कुल घबरा उठा था लेकिन प्रकृति की मानता है कि उसने मुझे प्रकाश और हवा प्रदान की। वह व्यक्ति भी मुझे रोज देखने आता था और पानी देता था हवा पानी और प्रकाश प्रकार मेरे अंदर अंकुर फूट गए मेरा अंकुर देखकर उसे व्यक्ति के मुख पर प्रसन्नता की लहर दौड़ पड़ी।  मैं धीरे-धीरे बड़ा होने लगा मुझ में पत्ते निकलने लगे। यह सब देखकर वह व्यक्ति बड़ा खुश होता था। उसे व्यक्ति के बच्चे बड़े ही नटखट वह शरारती थे। उनकी बोली और चंचलता मुझे अच्छी लगती थी लेकिन कभी-कभी वह मेरे पत्ते तोड़ लेते थे तो मुझे बड़ा दर्द होता था लेकिन मैं कुछ कह नहीं पता था। जब मुझ में फूल और फल निकलने लगे। मेरे फल को सब बड़े ही चाव से खाते थे। फल और हवा के अतिरिक्त मैं उन्हें एक ऐसी चीज भी प्रदान करता था जो वे देख नहीं पाते थे। वह चीज थी ------ ऑक्सीजन। ऑक्सीजन के बिना मनुष्य पल भर भी जीवित नहीं रह सकता। मनुष्य सांस द्वारा ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड एक विषैली गैस है जो वातावरण को अशुद्ध बना देती है। मैं उसे कार्बन डाइऑक्साइड को अपने अंदर ग्रहण कर लेता था। और वातावरण को शुद्ध बनाए रखने में मदद करता था। एक दिन की बात है एक आदमी कुल्हाड़ी लेकर आया और मेरे ऊपर परिहार करने लगा। मैं जोर-जोर से चिल्लाने लगा, "मुझे मत काटो! मुझे मत काटो!" लेकिन उसने एक न सुनी। मैं सिसकता रहा लेकिन उसने मुझे काट कर गिरा दिया। इस प्रकार मेरा अंत हो गया। मैं इस जीव जगत को यही संदेश दे रहा हूं---    वृक्ष धरा के है परिधान।   इन्हें लगाना कार्य महान।।
Read Full Blog
[email protected] 18 Sep 2026 16 Views

Blog Catgories