एक धोबी के पास एक गधा और एक कुत्ता था। प्रतिदिन वह नदी पर कपड़े धोने जाता था। आओ गधा कपड़ों का भार ढोता था। वह अपने मालिक के घर के बाहर छप्पर में रहता था और कुत्ता पूरे दिन घर के अंदर रहता था शाम के समय कुत्ता अपने मलिक को देख बहुत प्रसन्न होता था। वह मालिक को चाटता और उसके ऊपर कूदता था। मलिक कुत्ते को अपनी बाहों में बिठाने और घर के अंदर ले जाता। ऐसा देखकर गधा भी घर के अंदर रहना चाहता था। उसने सोचा, "यदि मैं भी कुत्ते की तरह मलिक पर कूद जाऊं, तब्बू वह भी मुझे बाहों में उठाएगा और घर के अंदर ले जाएगा।
अगली शाम गधा घर के अंदर गया। वह अपने मालिक पर खुदा और उसे चाटना शुरू कर दिया। मालिक मैं गधे को उठाया। वह उसे छप्पर में ले गया। गधे को थपथपाते हुए मालिक ने उसे कहा, "तुम कुत्ते की तरह नहीं हो। तुम बहुत बड़े हो इसलिए तुम घर में नहीं आ सकते।" मालिक ने फिर कहा, "तुम भारी भी हो इसलिए तुम्हें मुझ पर नहीं कूदना चाहिए। मैं कुत्ते को उठा सकता हूं लेकिन तुम्हें नहीं। परंतु मैं तुमसे भी उतना ही प्यार करता हूं जितना मैं कुत्ते से करता हूं। तुम्हें समझ जाना चाहिए कि अलग हो।"
FAQ
No FAQ Available.
pratiksha
Verified Brand
मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं।
Ask the author
Have a question about this post? Send it straight to the author — only they will see it.
pratiksha
Verified Author Expert@DigitalDiaryWefru