साइकिल भारत में बहुत लोकप्रिय हैं। बड़े और जवान, दूधवाला, अखबार वाला लड़का डाकिया और फेरीवाला सभी इसका प्रयोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए करते हैं। बहुत से शिक्षित नौजवान पर्यावरण की चिंता करके साइकिल का प्रयोग करते हैं। पहली साइकिल 1816 मैं एक जर्मन नेबनाई थी। वह लकड़ी से बनी थी। साइकिल सवार सीट पर बैठता और अपने पैरों से जमीन को धक्का मार कर उसे चलता।
इंग्लैंड मैं इस मशीन को "होगी हॉर्स" कहते थे। एक एस्कॉटिश आदमी मेकमिलन ने हॉबी हॉर्स में सुधार किया। उसने इसमें पैडल लगाए जो पिछले पहिए से लंबे छड़ियों से जुड़े हुए थे। एक फ्रैंच आदमी ने 1861 में एक बेहतर मशीन बनाई। उसका नाम था "बोनशेकर" क्योंकि उसके लकड़ी के पहिए उबड-खुद सवारी देते थे। जल्द ही रबड़ के पहिए लगाए गए और तब से इस मशीन का नाम साइकिल पड़ा।
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