रवींद्रनाथ टैगोर

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          रवींद्रनाथ टैगोर

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् १८६१ को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम देवेंद्र नाथ टैगोर तथा माता का नाम शारदा देवी था। तू इनके पिता तथा दादा अत्यंत संपन्न व्यक्ति होने के कारण के साथजीवन व्यतीत करते थे। उनके परिवार का समाज में अत्यधिक सम्मान था, इसी सम्मान के कारण लोग इनके दादा और पिता को ठाकुर कहकर बुलाते थे। यही ठाकुर शब्द अंग्रेजी के प्रभाव से टैगोर बन गया। घर में नौकरों की अधिकता और विलासिता के अत्यधिक साधनों के कारण इनको स्वतन्त्रता पूर्वक घूमने तथा खेलने के अवसर प्राप्त न हो सके। यह स्वयं को बंदी जैसे अनुभव करते हुए अत्यधिक खिन्न रहते थे। 

टैगोर जी की प्रारंभिक शिक्षा बांग्ला भाषा में घर पर ही आरंभ हुई। प्रारंभिक शिक्षा समाप्त होने के पश्चात इनका प्रवेश पहले कलकात्ता के ओरिएंटल सेमिनार विद्यालय नार्मल विद्यालय में कराया गया। रवींद्रनाथ टैगोर साहित्यकार, विचारक देशभक्त और उच्च कोटि के दार्शनि थे। सरस्वती के इस महान आराधक का ७ अगस्त १९४१ ई० को निधनह गया।

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pratiksha

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मेरा नाम प्रतीक्षा प्रजापति है। मैं दसवीं क्लास में पढ़ती हूं। मेरे पिताजी का नाम श्रीमान सोनू कुमार है। मेरी माता जी का नाम श्रीमती रेखा देवी है। मेरे दो बहन भाई और है। मेरी बहन का नाम प्रिया है, और मेरे भाई का नाम आर्यन प्रजापति है। मेरे गांव का नाम असदपुर करांजलि देवबंद सहारनपुर हैं। मेरे जीवन का सबसे बड़ा सपना मेरी कामयाबी है। मैं अपने जीवन में कामयाब होना चाहती हूं। 




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