आज हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसकी उत्पत्ति लाखों साल पहले हुई थी पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई इस बारे में वैज्ञानिक के मध्य मतभेद है लेकिन इतना तो निश्चित है कि हमारी पृथ्वी सौरमंडल का एक ग्रह है और इसकी उत्पत्ति भी अन्य ग्रहों की भांति ही हुई होगी प्रमोशन कांत नमक जर्मन दार्शनिक ने बताया कि पृथ्वी की उत्पत्ति एक आज पदार्थ से मिलकर हुई जो कानों के रूप में बिखरा हुआ था गुरुत्वाकर्षण के कारण यह कारण आपस में टकराकर जिससे कुल नौ ग्रह बन गए हमारी पृथ्वी भी इन्हीं लोग है में से एक है
लेप्लेस नमक फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने बताया कि पृथ्वी की उत्पत्ति एक निहारिका से हुई है इस निहारिका से एक छल्ला अलग हुआ जो कालांतर में कई छल्लो में बट गया यह छाले ही ठंडा होकर गृह व उपग्रह बन गए इस निहारिका का शेष भाग हमारा वर्तमान सूर्य है
एक अन्य परिकल्पना के मोती बिग आरंभ में सूर्य गैस का एक पिंड था एक दूसरा बड़ा तारा सूर्य के नजदीक आया और अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण उसने सूर्य के कैसे भाग को अपनी ओर खींच लिया यह प्रक्रिया पृथ्वी पर चंद्रमा द्वारा उत्पन्न ज्वार भाटी के समान थी धीरे-धीरे गैस से पदार्थ छोटे-छोटे टुकड़ों में बट गया जिन्हें ग्रहण कहा गया परस्पर टक्कर और गुरुत्वाकर्षण के आकर्षण और ग्रहण के बड़े टुकड़ों में छोटे टुकड़ों को अपने में मिल लिया और पृथ्वी सहित अन्य ग्रहों की रचना हुई
पृथ्वी के नीचे क्या है
क्या आप जानते हैं कि हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं उसके नीचे क्या है दरअसल पृथ्वी एक गोल गेंद के समान है यदि हम एक स्थान पर लगातार हुआ खोदते जाए तो हम पृथ्वी के दूसरे सिरे तक पहुंच जाएंगे पृथ्वी की आंतरिक संरचना का ज्ञान हमें खानों से मिलता है विश्व की सबसे गहरी खान दक्षिण अफ्रीका में रवि नेशन गणित है इस खान से सोना निकाला जाता है इस खान की गहराई लगभग 4 किलोमीटर है तेल की खोज के लिए खोजे गए कण की गहराई भी लगभग 6 किलोमीटर तक ही होती है
पृथ्वी का व्यास लगभग 6370 किलोमीटर है इसका अर्थ हुआ है कि अगर हम 6370 किलोमीटर गहरी खान को दे तो हम गेंद रूपी पृथ्वी के केंद्र तक पहुंच जाएंगे यदि सुरंग को हम आगे 6370 किलोमीटर और कोड दे तो हम पृथ्वी के दूसरे सिरे तक पहुंच जाएंगे जैसे-जैसे हम पृथ्वी की गहराई में जाते हैं तापमान बढ़ता जाता है आमतौर पर 32 मीटर की गहराई पर एक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है
वैज्ञानिकों का विचार है कि पृथ्वी के आंतरिक भाग का तापमान 2000 से 6000 डिग्री सेल्सियस तक होना चाहिए इतने अधिक तापमान पर कोई भी वस्तु ठोस अवस्था में नहीं रह सकते इसलिए पृथ्वी के भीतर सभी कुछ सरल अवस्था में हैं इसी तरह को लव कहा जाता है जो कभी-कभी ज्वालामुखियों के रूप में फूट कर बाहर आ जाता है पृथ्वी के भीतर की चट्टानें प्लास्टिक अवस्था में होती है और में पर्याप्त लचीली होती है
धन्यवाद
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