प्रथम विश्व युद्ध के दौरान क्रांतिकारी आंदोलनकारी को बुरी तरह कुचल दिया गया बहुत से नेता जेल भेज दिए गए और शेष इधर-उधर बिखर गए 1920 ई के प्रारंभ की क्रांतिकारी को जेल से रिहा कर दिया गया इसके कुछ समय बाद ही कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन छेड़ दिया क्रांतिकारी सशस्त्र क्रांति का रास्ता छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए किंतु असहयोग आंदोलन को एकाएक वापस ले लेने से क्रांतिकारी की उम्मीद पर पानी फिर गया इन क्रांतिकारियों ने पुणे अपना क्रांतिकारी संगठन बनाना प्रारंभ कर दिया इसके नेता पुराने क्रांतिकारी सचिंद्रनाथ सरियाला राम प्रसाद बिस्मिल तथा योगेश चंद्र चटर्जी थे
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