इंनिश फ्री का झील द्वीप

꧁ Digital Diary ༒Largest Writing Community༒꧂

Content loading...

इंनिश फ्री का झील द्वीप

मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा और इनिश फ्री को चला जाऊंगा और वहां में मिट्टी और टहनियां ट्रैक्टरों की एक छोटी झोपड़ी बनाऊंगा मैं वहां जो से की पंक्तियां लगाऊंगा और शहद के लिए एक छत्ता होगा और मधुमक्खियां की गुर्जर से युक्त खुले स्थान में अकेला रहूंगा

 वहां में शांति का अनुभव करूंगा क्योंकि वहां सुबह के कारण से धीरे-धीरे कीर्ति शांति आती है जहां चीकू कहते हैं वहां आधी रात को मंत्र प्रकाश होता है और दोपहर को गुलाबी दीप्ति होती है और शामली नेट पक्षी के पंखों से भरी होती है अर्थात संध्या के आकाश में वाहन लेने पक्षी उड़ते हैं

 मैं उठूंगा और अब चला जाऊंगा क्योंकि हमेशा रात दिन मुझे झील के किनारे धीमी आवाज में पानी की जब जब आहट सुनाई देती है जबकि मैं सड़क के मार्ग पर यह सड़क की पूरी पटरी पर खड़ा होता हूं मैं इस ध्वनि को मिलती है की गहराई से सुनता हूं 

धन्यवाद-

FAQ

No FAQ Available.




Leave a comment

We are accepting Guest Posting on our website for all categories.


Comments