प्रत्येक व्यक्ति को जीवित रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है जिस प्रकार इंजन को चलाने के लिए तेल कोयला तथा ईंधन की जरूरत होती है उसी प्रकार मानव शरीर को सक्रिय रखने के लिए भोजन की अति आवश्यकता होती है प्रत्येक व्यक्ति को ऐसा भोजन ग्रहण करना चाहिए जिससे सभी आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित हो भोजन में आवश्यक तत्वों की मात्रा इतनी होनी चाहिए कि शरीर पूर्ण रूप से स्वस्थ रह सके अर्थात ऐसा भोजन जिसमें सभी तत्व उपस्थित हो उसे संतुलित भोजन आहार कहते हैं
संतुलित आहार का अर्थ एवं परिभाषा
संतुलित आहार की अर्थ क्रिया को नीचे दी गई परिभाषाओं द्वारा स्पष्ट रूप से संबंध जा सकता है विभिन्न पदार्थों के बना वह भोजन जो हमारे शरीर को सभी पौष्टिक तत्व हमारे आवश्यकताओं के अनुसार उचित मात्रा में प्रदान करता है संतुलित आहार कहलाता है
C. Gopalan के अनुसार संतुलित आहार वह ऊर्जा है जो विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ को ऐसी मात्रा एवं अनुपात में लेने से आती है जिसमें क्लोरीन खनिज विटामिन आवश्यक पोषक तत्वों की तथा शरीर की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और पोषण की कुछ अतिरिक्त मात्रा भी बच जाए
आहार और स्वास्थ्य का संबंध -
आहार द्वारा संपन्न होने वाले कार्यों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कहा जा सकता है की आहार और स्वास्थ्य में पारस्परिक घनिष्ठ संबंध है व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक आवश्यक कारक है समुचित एवं संतुलित आहार ग्रहण करना स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को ऊर्जावान एवं रोग मुक्त होना अनिवार्य है ऊर्जा की प्राप्ति संतुलित आहार से होती है नियमित रूप से संतुलित आहार ग्रहण करने से व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती रहती है आहार में विद्वान कार्बोहाइड्रेट वसा तथा प्रोटीन व्यक्ति को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं स्वास्थ्य में संबंधित दूसरा महत्वपूर्ण कारक है व्यक्ति का रोग मुक्त रहना इस कारक के संबंध में दो बातें महत्वपूर्ण है प्रथम यह है कि रोगों से बचाव के लिए व्यक्ति के शरीर में एक विशिष्ट क्षमता होती है जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कहते हैं इस क्षमता के बल पर ही व्यक्ति का शरीर विभिन्न रोगों को उत्पन्न करने वाले कारकों का मुकाबला करता है तथा उन कारकों को परसत करके निरंतर स्वस्थ बना रहता है यहां यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि व्यक्ति के शरीर में रोग रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सर्वाधिक योगदान संतुलित अप पोस्टिक आहार का ही होता है आहार में विद्वान प्रोटीन विटामिन तथा खनिज लवण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने तथा विकसित करने में भरपूर योगदान प्रदान करते हैं आहार द्वारा रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास के तथ्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि आईएस स्वास्थ्य में घनिष्ठ संबंध है
स्वास्थ्य एवं आहार के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करने वाला दूसरा तृतीय है अभाव जनित रोगों का नियंत्रण स्वस्थ रहने के लिए रोग मुक्त रहना अति आवश्यक है रोगों की उत्पत्ति संबंधी कारकों का विश्लेषण करने से स्पष्ट होता है कि कुछ रोग सकारात्मक तथा रोगाणुओं द्वारा उत्पन्न होने वाले हैं परंतु अनेक रोग ऐसे भी है जो शरीर के पोषक तत्वों की कमी या अभाव के कारण होते हैं इन रोगों को अभाव जनित रोग कहते हैं जैसे कि विटामिन सी की कमी से डिस्कवरी तथा आयोडीन की कमी से घेंघा नामक रोग हो जाता है तथा तथ्य को ध्यान में रखते हुए कहा गया है कि संतुलित आहार ग्रहण करते रहने से व्यक्ति को अभाव जनित रोग नहीं होते इसके साथ-साथ यह भी सत्य है कि यदि किसी व्यक्ति को कोई अभाव जनित रोग हो जाता है तो उसे स्थिति में व्यक्ति के उपचार के लिए उसके आहार में संबंधित पोषक तत्व की मात्रा बढ़ा दी जाती है इससे व्यक्ति अभाव जनित रोग से मुक्त हो जाता है इस स्थिति में व्यक्ति को किसी औषधि की आवश्यकता कार्य नहीं होती इस तथ्य के आधार पर ही कहा जाता है की आहार तथा स्वास्थ्य का घनिष्ठ संबंध है
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Vanshika
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