सोहनलाल द्विवेदी

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सोहनलाल द्विवेदी

"मैं आज आपको सोहन लाल द्विवेदी जी के बारे में बताऊंगी "

राष्ट्रकवि की उपाधि से विभूषित सोहनलाल द्विवेदी का जन्म स्थान 1906 में फतेहपुर जिले के बंदगी नामक कस्बे में एक संपन्न ब्राह्मण परिवार में हुआ था उनके पिता का नाम वृंदावन प्रसाद द्विवेदी था उनकी हाई स्कूल तक की शिक्षा फतेहपुर में तथा उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी में संपन्न हुई इन्होंने यहां से एमए एलएलबी की उपाधियां प्राप्त की यही महान यह सभी महान मदन मोहन मालवीय के सत्संग में इनमें राष्ट्रीय भावना के अंकुर जागृत हुई और यह राष्ट्रीय भावना पर आधारित कविताएं लिखने लगे साहित्य प्रेम इन्हें जन्मजात प्राप्त हुआ था कानपुर विश्वविद्यालय में इन्होंने सन 1976 ईस्वी में डिलीट की उपाधि प्राप्त की माखनलाल चतुर्वेदी की प्रेरणा से इनमें राष्ट्र प्रेम और साहित्य सृजन की भावना बदलती बदलती हुई सन 1938 ईस्वी से 1942 ई तक यह दैनिक राष्ट्रीय पत्रकार अधिकार का लखनऊ से संपादन करते रहे कुछ वर्षों तक इन्होंने बाल सखा का वैधानिक संपादन भी किया 

 द्विवेदी जी में जन्म से ही कई प्रतिभा विद्यमान थी अपने विद्यार्थी जीवन से ही इन्होंने कविताएं लिखनी प्रारंभ कर दी अपनी कविताओं के माध्यम से इन्होंने देश के नवयुवकों में है भूतपूर्व उत्साह एवं देश प्रेम की भावना का संचार किया इन्होंने बाल सखा नामक मासिक बाल पत्रिका का संपादन भी किया गांधीजी से ही विशेष रूप से प्रभावित थे इसी कारण उनके काव्य में गांधीवादी विचारधारा के दर्शन होते हैं सन 1942 ईस्वी में इनका पहला काव्य संग्रह भैरवी प्रकाशित हुआ बालकों को संस्कारित करने एवं उसमें राष्ट्रीय तथा मानव प्रेम की भावना जगाने के उद्देश्य में इन्होंने श्रेष्ठ साहित्य का सृजन किया 

 द्विवेदी जी ने स्वाधीनता आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया अपनी पौराणिक एवं राष्ट्रीय प्रेम की रचनाओं के कारण यह जनता तथा कवि सम्मेलनों में सदैव सामान प्राप्त करते रहे इन्होंने कभी भी साहित्य सेवा को व्यवसाय के रूप में स्वीकार नहीं किया स्वतंत्रता के पश्चात भी गांधीवाद की मशाल को जलाए रखने वाले यह अनुपम कवि अयोध्या थे इनका निधन 19 फरवरी सन 1988 ई को हुआ 

 हिंदी साहित्य की उन्नति एवं समृद्धि हेतु इन्होंने अंत तक साहित्य साधना की उनकी प्रथम कृति भैरवी में सब देश प्रेम के भाव की प्रधानता है वासवादाता में भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव का भाव झलकता है इनके द्वारा रचित कुड़ाल प्रबंध काव्य ऐतिहासिक आधार लिए हुए हैं पूजा के स्वर के माध्यम से द्विवेदी जी ने जनता में नव जागृति उत्पन्न करते हुए एक युग पर दी निधि कवि के रूप में चतुर्थी कार्य किया पूजा गीत विश्व पान यशोधर व शांति तथा चित्र उनकी राष्ट्रीय चेतना से उत्प्रोत अन्य रचनाएं हैं बाल साहित्य के रूप में उनकी लोकप्रिय बाल रचना है बांसुरी और झरना बच्चों के बापू दूध बताशा बल भारती शिशु भारती हंसो हंसो तथा नेहरू चाचा

 धन्यवाद:-

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Vanshika

Vanshika

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Basic Information-:

My name is a Vanshika.I was born into a middle class Hindu family.I live in dugchari. I am a good girl.I am beautiful girl.I am very Intillgent.She is 14 year old. I study in class 9th.

My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and  my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful. 

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