"मैं आज आपको सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के बारे में बताऊंगी"
प्रकृति से पकड़ और व्यवहार से अकड़ मुक्त छंद के प्रवर्तक महाकवि निराला का जन्म सन 1897 ईस्वी में बंगाल के मेदिनीपुर जिले की महिषा डाल रियासत में पंडित राम सहाय त्रिपाठी के यहां हुआ था वास्तव में उनके पिता उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गढ़कोला नामक ग्राम के निवासी थे किंतु जीविका के लिए बंगाल आ गए थे इनका प्रारंभिक शिक्षा महिषा दल के ही विद्यालय में हुआ इन्होंने स्वाध्याय से हिंदी अंग्रेजी संस्कृत तथा बंगाल का ज्ञान प्राप्त कर लिया बचपन से ही इनकी कुश्ती घोड़ सवारी और खेलों में अत्यधिक रुचि थी बालक सूर्यकांत के सर से माता-पिता का साया अल्पायु में ही उठ गया था
निराला जी को बांग्ला और हिंदी साहित्य का अच्छा ज्ञान था इन्होंने संस्कृति और अंग्रेजी का भी पर्याप्त अध्ययन किया भारतीय दर्शन में इनकी विशेष रूचि थी
निराला जी का पारिवारिक जीवन अत्यंत असफल और कष्ट में रहा एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म देकर उनकी पत्नी मनोहर स्वर्ग सिधार गई मनोहर संगीत है हिंदी प्रेमी महिला थी इनका निराला पर अत्यधिक प्रभाव पड़ा किंतु दुर्भाग्य स्टेशन 1919 ईस्वी में मनोहर की जाकर मृत्यु हो गई पत्नी की विधायक के समय में ही इनका परिचय पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी से हुआ पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी के सहयोग से इन्होंने मतवाला का संपादन किया उनकी कविता जूही की कली ने तत्कालीन काव्य क्षेत्र में क्रांति उत्पन्न कर दी
निराला जी को अपने अकड़ व्यवहार के कारण जीवन में अत्यधिक आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था आर्थिक दूषित बताओ के बीच ही इनकी युवा पुत्री सरोज का निधन हो गया जिससे व्यवस्थित होकर इन्होंने सरोज स्मृति नामक कविता लिखें इसमें इन्होंने अपने दुख पूर्ण जीवन के अभिव्यक्ति करते हुए लिखा
दुख और कासन के मारे निराला अत्यधिक स्वभावमणि व्यक्ति थे यह बहुत स्पष्ट वादी पीते इसी कारण यह सदैव साहित्यिक विवाद का केंद्र रहे जूही की काली की प्रतिष्ठा को लेकर इनका विवाद और संघर्ष जय जाहिर है निराला जी स्वामी रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद से बहुत प्रभावित थे उनकी कविताएं छायावादी राष्ट्रवादी और प्रतिवादी विचारधाराओं पर आधारित 15 अगस्त सन 1961 में इनका निधन हो गया
महाप्राण निराला का उदय छायावादी कवि के रूप में हुआ छायावाद के चार स्तंभों में इनका महत्वपूर्ण स्थान है इन्होंने कोमल है मधुर भाव पर आधारित छायावादी काव्य के सजन से अपना कार्य जीवन प्रारंभ किया परंतु कल की कुर्ता ने इन्हें विरोधी कई के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया निराला जी ने सरस्वती और मर्यादा पत्रिकाओं के निरंतर अध्ययन से हिंदी का ज्ञान प्राप्त किया इसके साहित्य जीवन का प्रभाव जन्मभूमि की वंदना नामक कविता की रचना से हुआ सन 1919 ईस्वी में इनका सरस्वती पत्रिका में प्रथम लेख प्रकाशित हुआ जूही की काली कविता की रचना करके उन्होंने हिंदी जगत में अपनी पहचान बना ली यह अपने समय की सर्वाधिक चित्र कविता रही क्योंकि इनके द्वारा निराला ने हिंदी साहित्य में मुक्त छंद की स्थापना की छायावादी लेखक के रूप में प्रसाद पंत और महादेवी वर्मा के समक्ष ही इनकी भी गणना की जाने लगी है छायावाद के चार स्तंभों में से एक है प्रतिवादी विचारधारा की ओर उन्मुख होने पर इन्होंने शोषण एवं पंडित वर्ग की व्यथा को अपनी कविता का विषय बनाया
निराला बहुमुखी प्रतिभा संपन्न साहित्यकार थे कविता के अतिरिक्त इन्होंने उपन्यास कहानी निबंध आलोचना और संस्मरण की रचना की थी परिमल में सदी गली मान्यताओं के प्रति डर विरोध तथा निम्न वर्ग के प्रति उनकी गहरी स्वानुभूति स्पष्ट दिखाई देती है गीतिका की मूल भावना श्रणकारिक है इसमें प्रकृति वर्णन तथा देश प्रेम की भावना का चित्रण भी मिलता है अनामिका में संगति रचनाएं निराला के कलात्मक स्वभाव की घोतक है राम की शक्ति पूजा में कवि का आज तथा पुरुष प्रकट हुआ है
धन्यवाद-
Vanshika
@DigitalDiaryWefru