काका कालेकर

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काका कालेकर

राष्ट्रीय भाषा के आधार पर चालक उच्च कोटि के विद्वान और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनानी अनेक भाषाओं के ज्ञाता काका का कार्यकाल का जन्म एक संपन्न और प्रतिष्ठ परिवार में सन 1885 सभी को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था उनकी मातृभाषा मराठी थी किंतु स्वाध्याय में रुचि होने के कारण इन्होंने हिंदी संस्कृत गुजराती बांग्ला अंग्रेजी आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया

 गांधी जी के सानिया थीम में आकर काका का लेकर राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ गए उनके जीवन पर गांधी जी के अतिरिक्त रविंद्र नाथ टैगोर तथा राजश्री पुरुष स्तोत्र दास ढक्कन के संपर्क का भी गंभीर प्रभाव पड़ा आता है इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रीय सेवा और जनकल्याण के कार्यों को समर्पित कर दिया दक्षिण भारत विशेष कर गुजरात में इन्होंने हिंदी का प्रचार पुरातन मन लगाकर किया यह हिंदी के प्रचार को राष्ट्रीय सेवा का एक अलग मानते थे इसके साथ ही उन्होंने प्राचीन भारतीय संस्कृति इतिहास भूगोल नीति एवं तत्कालीन समस्या के समाधान हेतु भी कार्य किया

 काका कालेकर जी ने शांतिनिकेतन में अध्यापक साबरमती आश्रम में प्रधानाध्यापक और बड़ौदा में राष्ट्रीय शाला के आचार्य पद पर भी कार्य किया सन 1934 में गुजरात विद्यापीठ में अध्यापन कार्य भी किया बाद में दिल्ली जाकर हिंदुस्तानी प्रचार सभा के कार्य में संकलन हो गए गांधीवाद के इस प्रचारक का 21 अगस्त सन 1981 ई को निधन हो गया

 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के कारण इन्होंने अनेक बार जेल यात्रा किए संविधान सभा के सदस्य भी रहे गांधीजी की मृत्यु के के प्रथम शचालक होने का गौरव भी इन्हें प्राप्त हुआ यह सन 1952 इस विशेषण 1997 ई तक राज्यसभा के सदस्य तथा विभिन्न आयोग के अध्यक्ष भी रहे राष्ट्रीय भाषा प्रचार समिति ने इनको गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि से इन्हें सम्मानित किया 

 काका साहब ने हिंदी और गुजराती दोनों ही भाषाओं में अपनी लेखनी चलाई इन्होंने अनेक गुजराती रचनाओं का हिंदी में अनुवाद किया साथ ही अनेक मौलिक रचनाओं भी हिंदी को प्रदान की इनका साहित्यकार रूप हिंदी में मुख्य निबंधकार संरक्षण लेखन जीवनी और यात्रा व्रत लेखक के रूप में उभरा हिंदी साहित्य को इन्होंने अनेक उत्कृष्ट यात्रा वृतांत भी प्रदान करें इनकी भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति में अटूट आस्था थी जिनका प्रभाव उनकी रचनाओं पर स्पष्ट दिखाई देता है गुजरात में हिंदी प्रसार का से काका साहब को ही दिया जाता है इन्होंने अनेक उच्च कोटि के निबंध लिखें 

 काका कालेकर की प्रमुख रचनाएं-

 "जीवन काव्य", "जीवन साहित्य"

 कार्य क्षेत्र- अध्यापक लेखक

 सम्मान-  गांधी पुरस्कार, पद्म भूषण 

 धन्यवाद-

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Vanshika

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My name is a Vanshika.I was born into a middle class Hindu family.I live in dugchari. I am a good girl.I am beautiful girl.I am very Intillgent.She is 14 year old. I study in class 9th.

My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and  my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful. 

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