"मैं आज आपको एक महान कवयित्री के बारे में बताना चाहती हूं जिनका नाम महादेवी वर्मा है "
पैदा की गाय का और आधुनिक युग की मीरा का कहीं जाने वाली छायावादी कवियों की व्रत चतुर्थी प्रसाद पंत निराला और महादेवी वर्मा में सम्मिलित महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद के एक शिक्षित और संभ्रांत परिवार में सन 1960 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में हुआ था उनके पिता गोविंद प्रसाद वर्मा भागलपुर में एक विद्यालय में प्रधानाचार्य और नाना ब्रजभाषा के एक अच्छे कवि थे माता हम रानी वर्मा परम विदुषी महिला थी इन सभी के प्रभाव के कारण महादेवी वर्मा एक सफल प्रधानाचार्य और भाव कवियत्री बन गई उनकी माता मीरा और कबीर के पद बड़े भाव और ले के साथ गया करती थी वह स्वयं भी कविता किया करती थी माता के आचार्य विचार का महादेवी पर बड़ा प्रभाव पड़ा काव्य निपुणता इन्हें अपने नाना से ईश्वर के प्रति अनुराग अपनी मां से तथा सफल आचार्य के गुण पिता से प्राप्त हुए इस प्रकार यह श्रेष्ठ कवियत्री निर्गुण और अव्यक्त की परम शादी का विदुषी प्रधानाचार्य बन सकी
महादेवी वर्मा ने इंदौर में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करके क्राफ्ट वेट गर्ल्स कॉलेज इलाहाबाद में शिक्षा प्राप्त की इनका विभाग 11 वर्ष की अल्पायु में ही डॉक्टर स्वरूप नारायण वर्मा से हो गया सब सूर्य के विरोध के कारण उनकी शिक्षा में व्यवधान आ गया उनके देहब आसन के बाद इन्होंने पुनर शिक्षा प्रारंभ की ओर प्रयाग विश्वविद्यालय में मा संस्कृत की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तरण की इसके पश्चात प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्रधानाचार्य नियुक्त हुई जहां सेशन 1965 ईस्वी में अवकाश ग्रहण किया इनकी साहित्य साधना अनवरत चलती रही है उत्तर प्रदेश विधान परिषद की मनोनीत सदस्य भी रही इनको नीरज पर शेख सरिया तथा यामाहा पर मंगला प्रसाद पुरस्कार भी प्राप्त हुई भारत के राष्ट्रपति ने इन्हें पद्मश्री की उपाधि से अलकरत किया सन 1983 ईस्वी में श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत भारतीय पुरस्कार प्रदान कर इन्हें हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ कवियत्री घोषित किया उनकी कीर्ति या मां पर इंग्लैंड की तत्कालीन प्रधान मंत्री श्रीमती थिएटर ने इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया कुमायूं विश्वविद्यालय ने इन्हें सन 1975 ईस्वी में डिलीट की मानक उपाधि से सम्मानित किया हिंदी साहित्य की इस परम साधिका का 11 सितंबर 1987 को आक्षिमक निधन हो गया महादेवी वर्मा की पारिवारिक पृष्ठभूमि काव्य में होने से इन्हें भी बचपन से ही काव्य अनुराग था उसे समय की प्रसिद्ध नई पत्रिका चांद में उनकी रचनाएं छपती थी बाद में इन्होंने चांद का संपादन भी किया इन्होंने सदियों से अपेक्षा नारी के कल्याणिकारी रूप को अपने काव्य में उतरकर पहचान दी उन्होंने देहरादून में उत्तरायण नमक साहित्य के आश्रम की स्थापना की उन्होंने प्रयाग में साहित्यकार संसद नामक संस्था की स्थापना करके हिंदी साहित्य के प्रसार प्रचार में महीने योगदान दिया
महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं- निहार, रस्म,मिर्जा, संध्या,गीत, दीपशिखा, यामा
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Vanshika
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My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful.
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