मैं आज आपको संत रविदास के बारे में बताना चाहती हूं
भक्त कवि नाभादास ने अपनी रचना भक्तमाल में कबीर और रविदास को रामानंद का शिष्य बताया है स्वयं रैदास ने भी रामानंद मोहित गुरु मिलो कहकर इसकी पुष्टि की है पर यह सभी विद्वान इस धारणा पर भी सहमत है कि कबीर जन्म संत 1455 सन 1627 ई और रविदास समकालीन तेरे पास में उनसे कुछ छोटे थे इस आधार पर रविदास का जन्म सावंत 1456 सन 16 99 के आसपास मां लेने पर उनके रामानंद का शिष्य और कबीर का समकालीन होने की पुष्टि हो जाती है रामानंद के शिष्य चेतन दास द्वारा सावंत 1505 में रचित प्रसंग पारिजात में उनका जन्म काल नहीं स्वीकार किया गया देवदास संप्रदाय में यह व्यापक विश्वास है कि उनका जन्म माघ पूर्णिमा के दिन रविवार को हुआ था इसलिए में उनका नाम रविदास भी स्वीकार करते हैं रविदास के जन्म स्थान के विषय में भी अनेक मत प्रचलित है जिनके सर यही निकलता है कि इनका जन्म काशी मैया काशी के आसपास किसी स्थान पर हुआ था
रविदास के माता-पिता के नाम के विषय में भी विद्वानों में मेट के नहीं है रविदास की गददी के उत्तराधिकारियों तथा अखिल भारतीय रविदास जी महासभा के सदस्यों एवं रविदास वाणी के संपादक के अनुसार इनके पिता का नाम रघु और माता का नाम दुरउपनिया या कर्म था लोगों में यह भी विश्वास प्रचलित है कि उनकी पत्नी का नाम लूना या लेना था कहते हैं कि चित्तौड़ की नई झाली इन्हें अपना गुरु मानती थी रानी के उनके सम्मान में एक बड़ा लोग भोज दिया इस फौज में ब्राह्मणों ने यह कहकर भजन करने से इनकार कर दिया कि हम बिना जाने उधारी रविदास के साथ भोजन नहीं कर सकते इस पर रैदास ने अपनी त्वचा क्या कर उसमें से सीने का जनेऊ निकालकर सबको विषय मत कर दिया कहते हैं कि जनेऊ की चमक से सभी की आंखें बंद हो गई और रविदास केवल अपने पद चिन्ह छोड़कर विलीन हो गए चित्तौड़ की रानी ने उनकी स्मृति में वहां एक स्मारक भी बनवाया है यह स्मारक आज रविदास की छतरी के नाम से प्रसिद्ध है रविदास संप्रदाय के पक्षधरों का मानना है कि उनका निर्माण क्षेत्र मास की चतुर्दशी को हुआ था वक्त कभी अनंत दास ने उनके देहांतया का समय सावंत 1584 सन 1529 ई और स्थान चित्तौड़ बताते हुए लिखा है
संत रविदास ने स्वयं किसी काव्य की रचना अपने हाथों से नहीं की है उनके भक्त शिष्यों ने उनकी वाणी को लिपि बंद करके प्रकाशित कराया उनके फुटकर पद वाणी नाम से संकलित है अधिक गुरु ग्रंथ साहिब में इनके 40 पद और एक दोहा संकट है जिनकी प्रमाणित पर किसी को संध्या नहीं है वेल वीडियो प्रेस इलाहाबाद से प्रकाशित रविदास जी की वाणी में 84 पद और साथ साथिया है आचार्य आजादी जी ने विभिन्न शीर्षकों से 198 संख्या रविदास दर्शन नाम बेनी प्रसाद शर्मा ने 177 पद और 49 संख्या प्रामाणिक रूप से संपादित करने का प्रयास किया
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Vanshika
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