झांसी की रानी

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झांसी की रानी

 (प्रस्तुत पाठ वृंदावन के प्रसिद्ध उपन्यास झांसी की रानी से लिया गया है इसमें अंग्रेजों के साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंतिम युद्ध का वर्णन है)

'मंदिर बाई' रघुनाथ सिंह ने कहा रानी साहब का साथ एक शरण के लिए भी ना छुटने भाभी आज अंतिम युद्ध लड़ने जा रही है

 मंदिर– 'आप कहां रहेंगे?'

 रघुनाथ सिंह- 'जहां उनकी आज्ञा होगी वैसे आप लोगों के समीप ही रहने का प्रयत्न करूंगा'

 मंदिर -में जाती हूं आप बिल्कुल निकट ही रहे मुझे लगता है, मैं आज मारी जाऊंगी आपके निकट होने से शांति मिलेगी'

 रघुनाथ सिंह-' मैं भी नहीं बेचूंगा रानी साहब को किसी प्रकार सुरक्षित रहना है मैं तुम्हें तुरंत ही स्वर्ग में मिलेगा केवल आगे पीछे की बात है वह सुखी हंसी हसा '

 सुंदर ने रघुनाथ सिंह की ओर आंसू भरी आंखों से देखा कुछ खाने के लिए हॉट हिले रघुनाथ की आंखें भी दूध ली हुई 

 दूर से दुश्मन के बिल्कुल के शब्द की चाई कान में पड़ी मुंडन ने रघुनाथ सिंह को मस्तक नया कर प्रणाम किया और उसके वोट में जल्दी-जल्दी आंसू पहुंच डाले रघुनाथ ने मूंदड़ा को नमस्कार किया और दोनों सरपट लिए हुए पानी के पास पहुंचे

 मुंडन ने जूही को पिलाया रघुनाथ ने रानी को अंग्रेजों के भूल का साफ शब्द सुनाई दिया तो का धड़का हुआ गोला सन्नाकर ऊपर से निकल गया रानी दूसरा कटोरा नहीं पी सकी

 रानी ने रामचंद्र देशमुख को आदेश दिया दामोदर को आज तुम पीठ पर बंद हो यदि मैं मरी जाऊं तो इसको किसी तरह दक्षिण सुरक्षित पहुंच देना तुमको आज मेरे प्राणों से बढ़कर अपनी रक्षा की चिंता करनी होगी दूसरी बात यह है कि मेरी जाने पर यह विधर्मी मेरी तरह को छोड़ ना पाए बस घोड़ा लाओ 

 मंदिर घोड़े ले आई उसकी आंखें चल चल रही थी पूर्व दिशा में अरुणिमा फैल गई अब की बार कई तोपों का धड़का हुआ

 रानी मुस्कुराई बोली है तात्या की तोपों का जवाब है 

 मंदिर की चाल चलती हुई आंखों को देखकर कहा यह समय आंसू का नहीं है मूंदड़ा जा तुरंत अपने घोड़े पर सवार हो अपने लिए आए हुए घोड़े को देखकर बोली यह अस्तबल को प्यार करने वाला जानवर है परंतु अब दूसरे को चुनने का समय ही नहीं है इसी से काम निकलूंगी

 जूही के सिर पर हाथ फेर कर कहीं जा जूही अपने तो खाने पर छक्का तो दे इन वैल्यू को आज 

 जूही ने प्रणाम किया जाते हुए कहा गई इस जीवन का यथोचित अभिन्न आपको ना दिखला पाई खेल

 इतने में सूर्य का उदय हुआ

 सूर्य की किरणों ने रानी के सुंदर मुख को प्रदीप किया उनके नेत्रों की ज्योति दोहरे चमत्कार से भस्म हुई लाल वर्दी के ऊपर मोती हीरो का कांटा धमक उठा और धमक पड़ी बयान से निकली हुई तलवार

 रानी ने घोड़े को ऐड लगे पहले जरा इसका फिर तेज हो गया 

 उत्तर और पश्चिम की दिशा में तात्या और राव साहब के मोर्चे थे दक्षिण में बांध के नवाब का रानी ने पूर्व की और झापड़ लगे 

 गति दिवस की हार के कारण अंग्रेज जनरल संविधान और चिंतत हो गए थे इन लोगों ने अपनी पैदल पलटन पूर्व और दक्षिण की बिहार में छुपा ली और हजूर स्वरों को कहीं दिशाओं में आक्रमण की योजना की टॉप स्पीड पर रक्षा के लिए थी हजूर स्वरों ने पहला हमला कड़ाबीन बंदूकन से किया बंदूकन का जवाब बंदूकन से दिया गया रानी ने आक्रमण पर आक्रमण करके असुर स्वरों को पीछे हटाया दोनों और के सवालों की पहचान दौड़ से धूल के बादल छा गए रानी के रण कौशल के मारे अंग्रेज जनरल धारा गए काफी समय हो गया तुरंत अंग्रेजों को पेशवाई मोर्चा से निकल जाने की गुंजाइश न मिली 

 

 

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Vanshika

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My name is a Vanshika.I was born into a middle class Hindu family.I live in dugchari. I am a good girl.I am beautiful girl.I am very Intillgent.She is 14 year old. I study in class 9th.

My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and  my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful. 

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Comments

fintechbase [jefferyeastwood@gmail com] Date:- 2026-01-26 07:53:05
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