मैं और मेरा देश

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मैं और मेरा देश

महान संत स्वामी रामतीर्थ एक बार जापान गए में रेल में यात्रा कर रहे थे एक दिन ऐसा हुआ कि उन्हें खाने को फल ना मिले उन दिनों फल ही उनका भोजन था गाड़ी एक स्टेशन पर तेरी उन्होंने स्टेशन पर फलों की खोज की किंतु का ना सके उनके मुंह से अचानक निकल जापान में शायद फल नहीं मिलते

 एक जापानी युक्त प्लेटफार्म पर खड़ा था उसने यह शब्द सुन लिया सुनते ही वह भाग और कहीं से एक फल की टोकरी उन्हें लाकर दी उसने में फल स्वामी रामदेव को भेंट किया और कहा लीजिए आपको फलों की जरूरत थी

 स्वामी जी ने समझाया है कोई फल बेचने वाला है उन्होंने उसे फूलों के दाम पूछे पर उसने दम लेने से इनकार कर दिया बहुत एग्री करने पर उसने कहा आप इनका मूल्य देने ही चाहते हैं तो अपने देश में जाकर किसी से यह ना रहेगा कि जापान में फल नहीं मिलते स्वामी जी युवक का यह उत्तर सुनकर  मुकंद हो गई उसे युवक ने अपने इस कार्य से अपने देश का गौरव ना जाने कितना बढ़ा दिया 

 इस गौरव की ऊंचाई का अनुमान दूसरी घटना सुनकर ही पूरी तरह लगाया जा सकता है किसी देश का एक युवक जापान में शिक्षा लेने आया एक दिन वह सरकारी पुस्तकालय से कोई पुस्तक पढ़ने के लिए लाया इस पुस्तक में कुछ दुर्बल चित्र थे इन चित्रों को अन युवक ने पुस्तक में से निकाल लिया और पुस्तक का वापस कर दी किसी जापानी विद्यार्थी ने उसे देख लिया और पुस्तकालय परपरी को इसकी सूचना दे दी पुलिस ने तलासिक लेकर चित्र उसे विद्यार्थी के कमरे से बरामद किए और उसे विद्यार्थी को जापान से निकाल दिया अपराधी को दंड मिलना ही चाहिए पर मामला यहीं नहीं रुका और उसे पुस्तकालय के बाहर बोर्ड पर लिख दिया गया की पुस्तकालय में इस विद्यार्थी का प्रवेश तो वर्जित है ही उसके देश के निवासियों का भी प्रवेश वर्जित है

 जहां एक युवक ने अपने काम से अपने देश का सिर ऊंचा किया था वही दूसरे युवक ने अपने काम से अपने देश के मस्तक पर कलंक का ऐसा टीका लगाया जो न जाने कितने वर्षों तक संसार की आंखों में उसे लांछित करता है

 जब हम कोई हैं या बुरा काम करते हैं तो हमारे माथे पर ही कलाम का टीका नहीं लगता बल्कि देश काफी सिग्नेचर होता है और उनकी प्रतिष्ठा गिरती है जब हम कोई श्रेष्ठ कार्य करते हैं तो उसे हमारा ही सर नहीं ऊंचा होता बल्कि देश का भी सिर ऊंचा होता है और उसका गौरव बढ़ता है इसलिए हमें कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे देश की प्रतिष्ठा पर आच आए 

 क्या आप जल्दी रेलवे में मुसाफिरखाना में कल वह में चप्पलों पर और मोटर वर्षों में कभी ऐसी चर्चा करते हैं कि हमारे देश में यह नहीं हो रहा है वह नहीं हो रहा है और यह गड़बड़ है यह परेशानी है साथ ही क्या आप अपने देश की तुलना किसी अन्य देश के साथ करते हैं कि कौन सा देश श्रेष्ठ है और कौन सा देश ही है यदि हां तब आपको चिंता होगी कि देश की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए

 क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं?अपने घर का कूड़ा बाहर फेंकते हैं?अब शब्दों का प्रयोग करते हैं? इधर की उधर उधर की इधर लगते हैं? अपने घर दफ्तर गली को गंदा रखते हैं?होटल धर्मशाला में या दूसरे ऐसे ही स्थान में जिलों में कानून में पिक होते हैं? उत्सव मेला रेलवे और खेलों में फिल्म खेल करते हैं? नियंत्रित होने पर विलंब से पूछते हैं? या वचन देकर भी घर आने वाले को समय पर नहीं मिलते और इसी तरह सिस्ट व्यवहार के विपरीत आचरण करते हैं?

 यदि आपका उत्तर हां है तो आपके द्वारा देश के सम्मान को भयंकर आघात लगा रहा है और राष्ट्रीय संस्कृत को गहरी चोट पहुंच रही है यदि आपका उत्तर नहीं है तो आपके द्वारा देश का सम्मान बढ़ेगा और संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी 

 

 

 

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Vanshika

Vanshika

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My name is a Vanshika.I was born into a middle class Hindu family.I live in dugchari. I am a good girl.I am beautiful girl.I am very Intillgent.She is 14 year old. I study in class 9th.

My father name is MR.Sonu and My mother name is MS. Rajo. My father is a carpenter and My mother is a Housewife. My father is a Honest. and My father is a good man .My father is a very Intelligent.I like my father .and  my mother is a good lady. My mother is a very Intillgent .and my mother is a very beautiful. 

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