मिर्च के चमत्कारी औषधीय गुण: विष उतारने खुजली और जोड़ों के दर्द का तीखा लेकिन रामबाण इलाज

꧁ Digital Diary ༒ Wefru – India's Largest Writing Community ༒ Read, Write & Grow ༒꧂



मिर्च: चटपटे स्वाद से परे, जलन मिटाने और विष उतारने वाली तीखी औषधि

कल्पना कीजिए, बारिश का मौसम है और गरमागरम पकौड़े सामने रखे हैं। लेकिन अगर उनके साथ हरी मिर्च न हो, तो मज़ा अधूरा सा लगता है। या फिर सर्दियों में काली मिर्च की चाय का ज़िक्र आते ही मुँह में गर्माहट घुल जाती है। मिर्च हमारी रसोई की वो शान है, जो बिना माँगे ही हर थाली में अपनी जगह बना लेती है। लेकिन क्या आप जानते हैं, जिस मिर्च को हम सिर्फ स्वाद का जादूगर समझते हैं, वो असल में एक तेज़ और प्रभावशाली औषधि भी है?

मिर्च मुख्यतः दो प्रकार की होती है - काली मिर्च (Black Pepper) और हरी मिर्च (Green Chilli)। हरी मिर्च जब पौधे पर ही पक जाती है, तो लाल हो जाती है और सुखाने पर इसका रंग पूरी तरह लाल हो जाता है। ये दोनों ही अपने-अपने स्थान पर बहुत उपयोगी हैं, लेकिन घरेलू औषधि के रूप में आमतौर पर मध्यम आकार की हरी मिर्च ही काम में लाई जाती है।

काली मिर्च - महँगी, पर गुणों की खान

काली मिर्च गरम मसालों की रानी है। इसे हर जगह उगाना संभव नहीं है क्योंकि इसके लिए विशेष मौसम और फसल की ज़रूरत होती है। इसलिए जिन्हें इसकी ज़रूरत होती है, वे इसे बाज़ार से खरीदते हैं। गरम मसाले में लौंग, काली मिर्च, पीपल, तेजपात, दालचीनी, हींग, धनिया और जीरा आदि का मिश्रण होता है, जिसे दाल-शाक में ऊपर से बुरकने का रिवाज़ है। हालाँकि इन्हें उगाना थोड़ा झंझट भरा है, इसलिए किसी प्रामाणिक (विश्वसनीय) दुकान से खरीदकर ही काम चलाना चाहिए।

हरी मिर्च - सुलभ, सस्ती और बहुउपयोगी

हरी मिर्च को उगाना बहुत आसान है। ये गमले, क्यारी, छत - कहीं भी लग सकती है। लेकिन ध्यान रखिए, हर हरी मिर्च एक जैसी नहीं होती। एक छोटे आकार की मिर्च अत्यंत कड़वी और तीखी होती है, और एक बैंगन या करेले के आकार की मोटी मिर्च को शाक (सब्ज़ी) की तरह प्रयोग किया जाता है। औषधि के लिए हमेशा मध्यम आकार वाली हरी मिर्च ही सर्वोत्तम मानी गई है।

मिर्च का स्वाद चटपटा (Pungent) और गुण दाहकारक (जलन उत्पन्न करने वाला) है। इसकी यही जलन कई बीमारियों में दवा का काम करती है।

जलन से ही मिटती है जलन - मिर्च के बाहरी प्रयोग

मिर्च का बाहरी उपयोग (External Application) उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना अंदरूनी। जहाँ भी शरीर पर जलन पैदा करने की ज़रूरत समझी जाए, वहाँ मिर्च का लेप बेझिझक किया जा सकता है।

  • फुन्सियाँ और दाने: छोटी-छोटी फुन्सियाँ (Pimples/Boils) उठने पर यदि उन पर मिर्च पीसकर लेप कर दिया जाए, तो वे जलकर सूख जाती हैं और जल्दी ठीक होती हैं।

  • खाज-खुजली: खाज-खुजली (Scabies/Itching) में मिर्च को तेल में जलाकर, उस तेल से मालिश की जाती है। यह खुजली के कीटाणुओं को जलाकर ख़त्म कर देता है।

  • जोड़ों का दर्द: जोड़ों के दर्द (Joint Pain) में भी मिर्च के तेल की मालिश से गर्मी पैदा करके दर्द और सूजन को कम किया जाता है।

  • कुत्ते का काटा और कीड़ों का डंक: यह मिर्च का एक आपातकालीन (Emergency) प्रयोग है। अगर कुत्ता काट ले या बर्र, ततैया (Wasp) जैसे कीड़े डंक मार दें, तो उस जगह पर मिर्च पीसकर लगा दें। इससे वह स्थान हल्का झुलस जाता है और विषैले असर (Toxic Effect) से छुटकारा मिल जाता है।

  • मकड़ी का ज़हर: कई बार मकड़ी (Spider) कुचल जाने पर चमड़ी पर मवाद (Pus) वाले छोटे-छोटे दाने उभर आते हैं। इन पर भी मिर्च पीसकर लगाने से आराम मिलता है और संक्रमण नहीं फैलता।

अंदरूनी सेवन - अमृत भी, ज़हर भी

हरी मिर्च को हमेशा बहुत कम मात्रा में ही लेना चाहिए। थोड़ी मात्रा में यह अग्निदीपक (भूख बढ़ाने वाली) है, यही कारण है कि घरों में छौंक (Tadka) में इसका प्रयोग सदियों से होता आ रहा है। यह पाचन अग्नि को तेज़ करती है और खाने को स्वादिष्ट बनाती है।

लेकिन जैसे ही इसकी मात्रा ज़रा भी बढ़ी, यह अम्ल पित्त (Acidity/Hyperacidity) का कारण बन जाती है। पेट में जलन, सीने में तेज़ाब, मुँह में छाले - ये सब अधिक मिर्च खाने के परिणाम हैं। इसलिए हमेशा याद रखिए - "अति" से बचें।

आखिर में

अगली बार जब आप हरी मिर्च का तड़का लगाएँ या काली मिर्च की चाय पिएँ, तो इसे सिर्फ स्वाद का मसाला मत समझिए। ये एक ऐसी शक्तिशाली वनस्पति है, जो सही मात्रा में इस्तेमाल हो तो पाचन से लेकर विष उतारने तक, अनेक समस्याओं का समाधान करती है।

आपके घर में मिर्च का सबसे अनोखा या तीखा अनुभव क्या रहा है? क्या कोई ऐसा नुस्खा है जो दादी-नानी ने सिखाया हो? नीचे कमेंट करके हमारे साथ ज़रूर साझा करें। स्वाद भी, सेहत भी - लेकिन संतुलन के साथ!

FAQ

+ प्रश्न 1: हरी मिर्च और काली मिर्च में क्या अंतर है और दवा के रूप में कौन सी बेहतर है?

उत्तर: हरी मिर्च ताज़ी, सस्ती और सुलभ है। पकने पर यही लाल हो जाती है। काली मिर्च अपेक्षाकृत महँगी और विशेष जलवायु में उगने वाली है। दवा के रूप में दोनों का अपना-अपना स्थान है। बाहरी लेप और तत्कालिक घरेलू उपचार के लिए मध्यम आकार की हरी मिर्च बेहतर है, जबकि पाचन और गरम मसाले के रूप में काली मिर्च का विशेष महत्त्व है।

+ प्रश्न 2: खाज-खुजली में मिर्च का प्रयोग कैसे करें?

उत्तर: खाज-खुजली (Scabies/Itching) में हरी मिर्च को तेल में जलाकर उस तेल से प्रभावित स्थान पर मालिश करें। मिर्च का दाहकारक (जलन पैदा करने वाला) गुण खुजली के कीटाणुओं को जलाकर ख़त्म करता है और खुजली से तुरंत राहत मिलती है। ध्यान रहे, यह तेल आँखों या संवेदनशील अंगों पर न लगाएँ।

+ प्रश्न 3: कुत्ते के काटने या बर्र-ततैया के डंक पर मिर्च कैसे लगाएँ?

उत्तर: कुत्ते के काटने या बर्र-ततैया (Wasp) के डंक पर ताज़ी हरी मिर्च पीसकर तुरंत लगा दें। यह उस स्थान को हल्का झुलसा देता है और विषैले असर (Toxic Effect) को फैलने से रोकता है। नोट: यह केवल प्राथमिक उपचार (First Aid) है। कुत्ते के काटने पर रेबीज़ (Rabies) के इंजेक्शन के लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।

+ प्रश्न 4: क्या मिर्च जोड़ों के दर्द में फायदेमंद है?

उत्तर: जी हाँ, जोड़ों के दर्द (Joint Pain) और सूजन में मिर्च के तेल की मालिश बहुत कारगर होती है। इसके लिए हरी मिर्च को सरसों या नारियल के तेल में धीमी आँच पर तब तक पकाएँ जब तक मिर्च जल न जाए। इस तेल को छानकर दर्द वाले जोड़ों पर गुनगुनी मालिश करें। यह गर्मी पैदा कर दर्द और सूजन को कम करता है।

+ प्रश्न 5: छोटी-छोटी फुन्सियों पर मिर्च का लेप कैसे काम करता है?

उत्तर: शरीर पर उठने वाली छोटी-छोटी फुन्सियों (Pimples/Boils) पर हरी मिर्च को पीसकर लेप करने से वे जलकर सूख जाती हैं और जल्दी ठीक होती हैं। मिर्च का दाहकारक गुण संक्रमण (Infection) को फैलने से रोकता है और फुन्सी को पकने नहीं देता।

+ प्रश्न 6: मकड़ी कुचल जाने पर त्वचा पर होने वाले दानों का इलाज क्या है?

उत्तर: कई बार मकड़ी (Spider) कुचल जाने पर चमड़ी पर मवाद (Pus) वाले छोटे दाने उभर आते हैं। इन पर तुरंत हरी मिर्च पीसकर लगाने से ज़हर का असर ख़त्म होता है, दाने सूख जाते हैं और संक्रमण नहीं फैलता।

+ प्रश्न 7: मिर्च का अधिक सेवन करने से क्या नुकसान हो सकता है?

उत्तर: मिर्च का स्वाद चटपटा और गुण दाहकारक है। कम मात्रा में यह अग्निदीपक (भूख बढ़ाने वाली) है, लेकिन ज़रा सी मात्रा बढ़ने पर यह अम्ल पित्त (Acidity), पेट में जलन, सीने में तेज़ाब और मुँह में छाले पैदा कर सकती है। पित्त प्रकृति वालों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसका सेवन बहुत सावधानी से करना चाहिए।

+ प्रश्न 8: क्या मिर्च को घर पर उगाया जा सकता है?

उत्तर: बिल्कुल। हरी मिर्च उगाना बहुत आसान है। गमले या क्यारी में बीज डालें, नियमित पानी दें और धूप में रखें। कुछ ही हफ़्तों में पौधा तैयार हो जाता है और लगातार मिर्च देता रहता है। औषधीय उपयोग के लिए मध्यम आकार वाली हरी मिर्च का पौधा लगाएँ। अत्यंत छोटी और तीखी मिर्च या बहुत बड़ी शिमला मिर्च दवा के लिए उपयुक्त नहीं।
Omtva

Omtva

Verified Brand

जुड़ कर औरों को जोड़ कर चले, आओ अपनी संस्कृति को सहज कर चले।

सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। हमारा मंतव्य उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है,

भारत में निवास करने वाले कई ऋषि-मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवात्मा-जगत को बनाए रखने के लिए अनिवार्य तत्व हैं । भारतीय संस्कृति में अध्यात्म का एक प्रतीक ओम या ओम् को माना जाता है। यह परम चेतना या आत्मान के सार को दर्शाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी किसी हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में आध्यात्मिक पाठ किया जाता है तब उससे पहले ओम का जाप अवश्य किया जाता है। ॐ का जाप अगर निरंतर किया जाए तो इससे व्यक्ति का दिमांग शांत रहता है। इससे व्यक्ति के आंतरिक और बाह्य विकारों का भी निदान होता है। यह हमारी विडम्बना ही रही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान, जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होते जा रहे है आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास अधिक सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी जोर से हमारी पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः हमारा ये प्रयत्न है कि विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके और श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके, जिससे चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। इसी कारण से हमने आध्यात्म के प्रत्येक पहलु को किसी न किसी माध्यम से इस मंच के द्वारा छूने का प्रयत्न किया है। हमारा यह प्रयत्न " गागर में सागर" भरने के समतुल्य प्रतीत होता है किन्तु इसकी विवेचना हम अपने विद्वान पाठको पर छोड़ते है।

ॐत्व उद्देश्य

ॐत्व उद्देश्य व मंतव्य खंड में आपका स्वागत है। सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। यहाँ स्पष्ट करना आवश्यक है कि, यहाँ धर्म शब्द का प्रयोग वर्तमान के धर्म शब्द से भिन्न अर्थों में किया जा रहा है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। अतः यह इसका तात्पर्य इसी दृष्टि से ग्रहणीय है और इन्हीं अर्थों मे सनातन धर्म और संस्कृति पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्म संस्कृतियों में से एक है। हालांकि इसके इतिहास के बारे में विद्वानों में अनेक मत हैं। इसकी शुरुआत को सिंधु घाटी की सभ्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह ऐतिहासिक तथ्य हैं और इनके विवाद में जाना अभी हमारा मंतव्य नहीं है। हमारा मंतव्य तो उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है, जो जंबूद्वीप और भारत क्षेत्र में निवास करने वाले तमाम ऋषियों, मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं, जिन्हें हम अपनी सो काॅल्ड विकास-यात्रा में कहीं छोड़ते-भूलते आए हैं। यह प्रकृति के निकट, प्रकृति से जुड़ाव की कहानियाँ हैं, जो प्राकृतिक मानव के लिए पृथ्वी पर जीने का संबंल बनती रही हैं। आज विकास के इस पड़ाव पर हम, इसे सहजता से कैसे अपने जीवन में शामिल कर प्रकृति और पृथ्वी को, संस्कृति और समाज को बनाए रख सकते हैं, इसके बारे में बात करना, कहना, बताना और सुनना ही हमारा मंतव्य है। भारत में सनातन संस्कृति स्थायी रूप से विकसित हुई। भारत आज भी सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि है, मानव-विज्ञान और वैज्ञानिक खोजों की भूमि, जिसका उल्लेख वेदों, उपनिषदों तथा अनेक सांस्कृतिक ग्रंथों में समृद्ध विरासत के रूप में किया गया है। आज यह एक स्वीकृत और सिद्ध तथ्य है कि हमारे ऋषियों-मुनियों तथा बुद्धिजीवियों द्वारा स्थापित दर्शन व ज्ञान समयातीत है तथा जीवन के सभी आयामों में महत्वपूर्ण है। इसी भूमि पर ज्ञान के वे प्रयोग हुए, जो समस्त संसार को भौतिकता तथा आध्यात्मिकता में संतुलन बनाकर विश्व बंधुत्व की स्थापना के लिए प्रेरित करते हैं। ज्ञान के ये तमाम आयाम, जो सनातन ऋषि संसार की आध्यात्मिक, भौतिक तकनीकों की प्रयोगशालाओं में विकसित हुए, आज अनेक वैश्विक शोधपरक संस्थाएं, जैसे- नासा, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एमआईटी)) इत्यादि में इस विषय में न सिर्फ अध्ययन किए जा रहे हैं, बल्कि इन प्रयोगों के प्रभावों पर भी काम भी किए जा रहे हैं। यह विडंबना ही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान और समझ से लबरेज देश की तमाम जनता और नौनिहाल पीढ़ी उपभोक्तावाद में रम चुकी है और जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होती जा रही । आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास कोई सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी शिद्दत से हमारी नवागत पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः कुछ करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। ॐत्व इस दिशा में एक पहल है। पंडितजी एक संगठन है, जो अब संस्थागत मंच से पोर्टल और ब्लाॅग के माध्यम से सक्रिय हो रहा है। यह दोनों वास्तविक मंच इस दिशा में कार्यरत हैं कि किस तरह विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके। प्रयास यह है कि श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके। जिससे हमारा चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से यह ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप और वर्तमान में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि बाज़ार की चकाचौंध में डूबी हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। दूसरे शब्दों मेें, यह मंच प्रकृति, प्रेम, चेतना की आशा तथा विश्वास से संसार को सराबोर करने हेतु कार्यरत रहेगा।

धन्यवाद

 

 

डिस्क्लेमर-

"इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. विभिन्स माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं. हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी. "

अपनी पोस्ट सबमिट करें

ॐत्व की युवा टीम अपनी ख़ुशी से भारतीय संस्कृति को फ़ैलाने के लिए बिना किसी भुगतान के काम करती है। हमारी टीम पूरी कोशिश कर रही है हम सभी काम कर रहे है क्यूंकि हम सभी चाहते है आने वाली भविष्य के पीढ़ियों के लिए एक सुनहरा धरोहर हम छोड़ कर जाये| लेकिन अगर आज हमारी नज़रो में ही हमारे देश की विरासतों की कोई कीमत नहीं उसका उपयोग नहीं तो हम सभी को त्यार हो जाना चाहिए की आने वाली भविष्य की पीढ़ियों हमारे देश की अनमोल विरासतों को अनउपयोगी और व्यर्थ किसी काम की नहीं है यही समझेगी और कहेगी| हम कोसिस कर रहे है ज्यादा से ज्यादा अपनी सस्कृति को दुसरो तक पहुंचा सके आप भी हमारा सहोग कर सकते है पोस्ट लिख करअपनी सस्कृति के बारे में, सहोग केवल पेसो से नहीं करते, बल्कि अपनी सस्कृति से जुडी चीजों को शेयर करके भी कर सकते है अपने जीवन को उसकी अच्छाइयों से जोड़ सके।

 




Leave a comment

We are accepting Guest Posting on our website for all categories.

Comment karne ke liye .
Abhi koi comment nahi. Pehla comment aap karo.




Wefru Services

I want to Hire a Professional..

<