मेथी के चमत्कारी औषधीय गुण: गठिया शुगर और प्रसव के बाद की कमज़ोरी का आयुर्वेदिक रामबाण इलाज

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मेथी: वो कड़वी औषधि जो गठिया, शुगर और प्रसव के बाद कमज़ोरी में है रामबाण

अक्सर हमारी रसोई में एक छोटा सा डिब्बा होता है, जिसमें पीले-पीले छोटे दाने भरे होते हैं। सब्ज़ी में तड़का लगाने से लेकर सर्दियों में लड्डू बनाने तक, इसका उपयोग तो हम करते हैं, लेकिन अक्सर ये भूल जाते हैं कि ये छोटे से दाने हमारी सेहत के लिए कितने बड़े काम के हैं। जी हाँ, बात हो रही है मेथी की।

मेथी की खास बात ये है कि ये पूरे पौधे के रूप में काम आती है। इसकी ताज़ी हरी पत्तियों का शाक (साग) और सूखी भुजिया बनती है, वहीं इसके बीज मसाले के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सर्दी के मौसम में मेथी के लड्डू खाने के लिए दादी-नानी क्यों ज़िद करती हैं? सिर्फ इसलिए नहीं कि वो स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वो शरीर को अंदर से गर्मी और ताकत देते हैं।

कड़वाहट में छिपा है इसका असली गुण

बहुत से लोग मेथी के बीजों को पानी में भिगोकर, उनका छिलका उतारकर इस्तेमाल करते हैं, ताकि कड़वाहट कम हो जाए। हाँ, ऐसा करने से कड़वाहट ज़रूर कम हो जाती है, लेकिन साथ ही साथ उसके औषधीय गुणों में भी थोड़ी कमी आ जाती है। फिर भी, मेथी का गर्म प्रधान गुण (Warming Potency) छिलके सहित या बिना छिलके, दोनों ही स्थितियों में अपना ज़बरदस्त असर दिखाता है।

मेथी के बीजों से आप कई व्यंजन बना सकते हैं। इसकी पतली दाल, तली हुई भुजिया और घी-शक्कर के साथ पौष्टिक लड्डू तो मशहूर हैं ही। लेकिन अगर बात दवा के रूप में उपयोग की हो, तो इसके बीजों का चूर्ण सबसे प्रभावी रहता है। अगर चूर्ण नहीं लेना चाहते, तो पानी में उबालकर छान लें और उस गुनगुने पानी को धीरे-धीरे पिएँ।

गठिया और जोड़ों की जकड़न का काल है मेथी

अगर आपको या आपके घर के किसी बुज़ुर्ग को गठिया (Arthritis) की वजह से जोड़ों में जकड़न, दर्द और सूजन (Inflammation) रहती है, तो मेथी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं। आयुर्वेद में मेथी को मूलतः वात नाशक माना गया है, यानी ये शरीर के वात दोष को संतुलित कर जोड़ों के दर्द और नसों की कमज़ोरी को दूर करती है। सिर्फ इतना ही नहीं, ये सर्दी-जुकाम जैसे सामान्य संक्रमणों से लेकर बहुमूत्र (Diabetes) जैसे गंभीर चयापचय (Metabolic) रोगों पर भी अंकुश लगाती है। ये भूख खोलती है और अपच (Indigestion) को जड़ से मिटाती है।

प्रसव के बाद की परम्परागत ताकत

भारतीय परिवारों में तो मेथी का महत्त्व कुछ और भी ज़्यादा है। प्रसव (Delivery) के बाद जब महिला का शरीर अत्यंत दुर्बल हो जाता है, हार्मोन्स (Hormones) का संतुलन बिगड़ जाता है और स्तनों में दूध की कमी हो जाती है, तब सबसे पहले जिस चीज़ की सलाह दी जाती है, वो है मेथी। मेथी के मोदक (Laddoos) खिलाने का प्रावधान सदियों पुराना है। ये न केवल स्तनों में दूध (Lactation) बढ़ाने का काम करती है, बल्कि हार्मोन्स की नियमितता बनाए रखने और शरीर की पीड़ा व थकान को दूर कर टॉनिक (Natural Tonic) की तरह काम करती है।

मेथी उगाना और उपयोग करना बेहद आसान

मेथी का पौधा उगाना बहुत सरल है। जनवरी से मार्च के बीच इसमें पुष्प और फल (बीज) लगते हैं। छोटी मेथी का उपयोग ही आमतौर पर शाक-सब्जी में किया जाता है। अगर आपके पास थोड़ी सी भी ज़मीन या गमला है, तो मेथी के बीज छिड़क दीजिए। कुछ ही दिनों में हरी-भरी मेथी आपकी रसोई की शान बढ़ाएगी और सेहत को संवारेगी।

सही मात्रा का ध्यान ज़रूरी

मेथी बहुत गुणकारी है, लेकिन इसका प्रयोग संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। आमतौर पर 1 से 3 ग्राम की मात्रा बीजों की सब्जियों में छौंक लगाने या चूर्ण के रूप में सेवन के लिए पर्याप्त है। मेथी दाने की सब्ज़ी को लोग बड़े चाव से खाते हैं और ये सेहत के लिए बहुत हितकारी भी है।

आखिर में

तो अगली बार जब आप मेथी के लड्डू खाएँ या मेथी के पानी का सेवन करें, तो याद रखिएगा कि ये छोटे से कड़वे दाने आपके शरीर को अंदर से मज़बूत बनाने का काम कर रहे हैं। कमज़ोरी, दर्द और थकान को दूर भगाने की ताकत इस प्राकृतिक औषधि में भरी पड़ी है।

आपके घर में मेथी का सबसे अनोखा उपयोग क्या है? क्या दादी-नानी का कोई खास नुस्खा है जो आप आज भी अपनाते हैं? हमें कमेंट करके ज़रूर बताइए। स्वस्थ रहिए, प्राकृतिक जीवन अपनाइए!

FAQ

+ प्रश्न 1: मेथी के बीजों की कड़वाहट कम करने के लिए क्या करें और क्या इससे गुण कम हो जाते हैं?

उत्तर: मेथी के बीजों को पानी में भिगोकर छिलका उतारने से कड़वाहट ज़रूर कम हो जाती है, लेकिन इसके साथ ही इसके कुछ औषधीय गुणों में भी कमी आ जाती है। फिर भी मेथी का गर्म प्रधान गुण (Warming Potency) छिलके सहित या बिना छिलके, दोनों स्थितियों में अपना असर दिखाता है। यदि आप पूरा लाभ चाहते हैं तो छिलके सहित ही सेवन करें।

+ प्रश्न 2: गठिया और जोड़ों की सूजन में मेथी का उपयोग कैसे करें?

उत्तर: गठिया (Arthritis) और जोड़ों की जकड़न व सूजन में मेथी बहुत लाभकारी है। आयुर्वेद में मेथी को मूलतः वात नाशक माना गया है। इसके लिए मेथी के बीजों का चूर्ण (1-3 ग्राम) गुनगुने पानी के साथ लें, या मेथी को पानी में उबालकर (क्वाथ बनाकर) गुनगुनी स्थिति में पिएँ। नियमित सेवन से जोड़ों का दर्द और सूजन (Inflammation) कम होती है।

+ प्रश्न 3: क्या मेथी बहुमूत्र (डायबिटीज़) में फायदेमंद है?

उत्तर: जी हाँ, बहुमूत्र (Diabetes) जैसे चयापचय (Metabolic) रोगों पर मेथी अंकुश लगाने में सहायक है। रात भर पानी में भिगोए हुए मेथी दाने को सुबह खाली पेट चबाना या मेथी का गुनगुना पानी पीना शुगर नियंत्रण में बहुत प्रभावी माना जाता है। यह भूख भी नियंत्रित करती है और अपच को दूर करती है।

+ प्रश्न 4: प्रसव के बाद महिलाओं को मेथी क्यों खिलाई जाती है?

उत्तर: प्रसव (Delivery) के बाद महिला का शरीर अत्यंत दुर्बल हो जाता है और स्तनों में दूध (Lactation) की कमी हो सकती है। मेथी के मोदक (लड्डू) खिलाने का प्रावधान सदियों पुराना है। यह न केवल स्तनों में दूध बढ़ाने का काम करती है, बल्कि हार्मोन्स (Hormones) की नियमितता बनाए रखने और शरीर की पीड़ा व थकान को दूर कर प्राकृतिक टॉनिक (Natural Tonic) की तरह काम करती है।

+ प्रश्न 5: मेथी के मोदक (लड्डू) कैसे बनाए जाते हैं?

उत्तर: मेथी के बीजों को हल्का भूनकर दरदरा पीस लें। घी में इसे धीमी आँच पर भूनें और फिर इसमें गुड़ या शक्कर मिलाकर लड्डू बाँध लें। सर्दियों में इनका सेवन विशेष लाभकारी है। ये शरीर को अंदर से गर्मी और ताकत देते हैं, जोड़ों की जकड़न दूर करते हैं और प्रसव के बाद की कमज़ोरी में बहुत फ़ायदेमंद हैं।

+ प्रश्न 6: क्या मेथी की पत्तियाँ भी उतनी ही फायदेमंद हैं जितने बीज?

उत्तर: बिल्कुल। मेथी की ताज़ी हरी पत्तियाँ सर्दियों में शाक (साग) और सूखी भुजिया के रूप में खाई जाती हैं। इनमें भी वही गुण होते हैं, हालाँकि औषधीय प्रभाव के लिए बीज अधिक सांद्र (Concentrated) और प्रभावी माने जाते हैं। छोटी मेथी का उपयोग ही आमतौर पर शाक-सब्जी के लिए किया जाता है।

+ प्रश्न 7: मेथी का सेवन करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर: मेथी की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करें (1-3 ग्राम प्रतिदिन)। जिन लोगों को पित्त की अधिकता, एसिडिटी या पेट में जलन रहती है, वे बहुत अधिक मेथी का सेवन न करें। गर्भवती महिलाओं को भी बिना वैद्य की सलाह के अधिक मात्रा में मेथी नहीं लेनी चाहिए।

+ प्रश्न 8: मेथी को घर पर कैसे उगाया जा सकता है?

उत्तर: मेथी उगाना बहुत आसान है। किसी गमले या क्यारी में मिट्टी तैयार करें और मेथी के बीज छिड़क दें। हल्की सिंचाई करें। जनवरी से मार्च के बीच इसमें पुष्प और फल (बीज) लगते हैं। कुछ ही दिनों में हरी-भरी मेथी तैयार हो जाती है। आप चाहें तो पत्तियाँ तोड़कर साग बनाएँ या बीज पकने दें और मसाले के रूप में इस्तेमाल करें।
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सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। हमारा मंतव्य उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है,

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ॐत्व उद्देश्य

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