सौंफ के चमत्कारी फायदे: गर्मी पित्त और पेट की हर शिकायत का शीतल आयुर्वेदिक इलाज
꧁ Digital Diary ༒ Wefru – India's Largest Writing Community ༒ Read, Write & Grow ༒꧂
꧁ Digital Diary ༒ Wefru – India's Largest Writing Community ༒ Read, Write & Grow ༒꧂
सौंफ: गर्मी को हरा देने वाली मीठी-सुगंधित औषधि, जो पेट और पित्त की हर शिकायत दूर करे
गर्मी का मौसम हो और ठंडी-ठंडी सौंफ की शिकंजी या ठंडाई का गिलास हाथ में आ जाए, तो पूरा शरीर अंदर से शीतल (Cooling) महसूस करने लगता है। है ना? लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सौंफ को हम महज़ माउथ फ्रेशनर समझकर चबाते हैं या सिर्फ पान-सुपारी की जगह इस्तेमाल करते हैं, वो असल में एक बहुत बड़ी औषधि भी है?
जी हाँ, सौंफ सिर्फ मीठी और सुगंधित (Aromatic) नहीं है, बल्कि इसकी प्रकृति अत्यंत शीतल है। इसके बीज देखने में जीरे जैसे ज़रूर लगते हैं, लेकिन इनका प्रभाव बिल्कुल विपरीत है। जहाँ जीरा गर्म होता है, वहीं सौंफ ठंडक पहुँचाने वाली है। और सबसे अच्छी बात - यह बहुत सस्ती भी है और सर्वप्रिय भी।
पुराने ज़माने में मेहमानों को पान-सुपारी-इलायची दी जाती थी, लेकिन आयुर्वेद कहता है कि इसकी जगह अगर सौंफ दी जाए तो ज़्यादा लाभकारी है। यह न केवल मुँह की दुर्गंध दूर करती है बल्कि पाचन को भी दुरुस्त करती है।
गर्मी के दिनों में ठंडाई पीने का जो प्रचलन है, उसकी आत्मा ही सौंफ है। ठंडाई में सौंफ की मात्रा सबसे अधिक रखी जाती है। लेकिन इसे सिर्फ ठंडाई तक सीमित मत रखिए। जिन भी रोगों में शरीर में गर्मी की अधिकता (पित्त प्रकोप) दिखाई देती है, उन सबमें सौंफ का प्रयोग बिना किसी झिझक के किया जा सकता है।
अक्सर देखा जाता है कि सौंफ के बीजों के साथ डंठलों के पतले-पतले तिनके जुड़े रहते हैं। परेशान होने की ज़रूरत नहीं है, इसे साफ करने के कई आसान तरीके हैं:
हथेलियों से अच्छी तरह रगड़कर इन तिनकों को अलग किया जा सकता है।
तवे पर हल्की आँच पर भून लेने से भी तिनके स्वतः अलग हो जाते हैं।
अच्छी तरह धुलाई-मजाई (सफाई) करके भी इसे साफ किया जा सकता है।
साफ करने के बाद इसे ऐसे ही मुँह में डालकर पान की तरह चबाया जा सकता है, या सिल पर बारीक पीसकर चटनी की तरह शहद या चीनी के साथ चाटा जा सकता है। एक और विशेष विधि है सौंफ का सत (Saat/Essence) बनाने की - सौंफ को बारीक कूटकर पानी में भिगोएँ, ऊपर का पानी निथारते रहें, अंत में जो गाढ़ी सी तलछट (Sediment) बचे उसे सुखा लें। यही सत है। यह अत्यंत सांद्र (Concentrated) रूप है, इसलिए हमेशा बहुत कम मात्रा में लिया जाता है। ठीक ऐसे ही गिलोय (Giloy) का भी सत निकाला जाता है।
आयुर्वेद कहता है कि सौंफ चरपरी (Slightly pungent) और अग्निप्रदीपक (भूख बढ़ाने वाली) है, साथ ही यह वात, ज्वर और शूल (Colic Pain) को नाश करने वाली है। अत्यधिक प्यास (तृष्णा) और उल्टी (वमन) को शांत करने के लिए यह एक अचूक दवा है। यह पेशाब की जलन (Burning Micturition) को भी बहुत अच्छे से कम करती है और सबसे बड़ी बात - यह श्रेष्ठ अम्ल और पित्त नाशक (Best Antacid) है।
आइए इसके कुछ विशेष आयुर्वेदिक प्रयोग देखें:
अतिसार (Diarrhea) में: सौंफ को घी में हल्का भून लें और फिर इसे मिश्री के साथ पीसकर खाएँ। बार-बार होने वाले पतले दस्त पर यह बहुत असरदार है।
अजीर्ण (Indigestion) में: बेल के गूदे के साथ सौंफ का चूर्ण मिलाकर खाने से पुराना से पुराना अजीर्ण ठीक हो जाता है। पेट फूलना और भारीपन दूर होता है।
ठंडाई का नाम सुनते ही मुँह में ठंडक घुल जाती है, लेकिन यह केवल स्वाद का मामला नहीं है। पारंपरिक ठंडाई एक संपूर्ण मेधावर्धक (Brain Tonic) है। सौंफ के बीज, गुलाब के फूल, कमल गट्टे की मगज, चंदन चूर्ण, खस, काली मिर्च, छोटी इलायची, खरबूजे के बीज और बादाम - इनमें से जो भी उपलब्ध हों, उन्हें मिलाकर पीसा जाए। यह पेय सिर्फ शरीर को ठंडा नहीं रखता, बल्कि लू, पित्त, ज्वर, हैज़ा और दस्त जैसी गर्मी की भयंकर बीमारियों को दमन करने की श्रेष्ठ औषधि भी है।
सौंफ शीतल प्रकृति की है, इसलिए जिन लोगों को बहुत अधिक ठंड लगती है, सर्दी-ज़ुकाम की शिकायत रहती है या श्वाँस (Asthma) के रोगी हैं, उन्हें इसका सेवन बहुत अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। लेकिन गर्मी के मौसम और पित्त प्रकृति वालों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं।
अगली बार जब आप गर्मी से बेहाल हों या पेट में जलन महसूस कर रहे हों, तो तुरंत केमिस्ट की दुकान की ओर भागने के बजाय, अपनी रसोई के मसालेदान से एक चम्मच सौंफ निकालिए। या तो इसे यूँ ही चबा जाइए, या इसकी शरबत बना लीजिए। यकीन मानिए, अंदर से जो ठंडक और राहत मिलेगी, वो किसी एंटासिड (Antacid) सिरप से कहीं ज़्यादा असरदार और सुरक्षित होगी।
आपके घर में सौंफ का उपयोग किस तरह किया जाता है? क्या कोई खास पारिवारिक नुस्खा है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइएगा और दूसरों को भी ये अनमोल जानकारी दीजिए। ठंडक से रहिए, स्वस्थ रहिए!
Verified Brand
सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। हमारा मंतव्य उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है,
भारत में निवास करने वाले कई ऋषि-मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवात्मा-जगत को बनाए रखने के लिए अनिवार्य तत्व हैं । भारतीय संस्कृति में अध्यात्म का एक प्रतीक ओम या ओम् को माना जाता है। यह परम चेतना या आत्मान के सार को दर्शाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी किसी हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में आध्यात्मिक पाठ किया जाता है तब उससे पहले ओम का जाप अवश्य किया जाता है। ॐ का जाप अगर निरंतर किया जाए तो इससे व्यक्ति का दिमांग शांत रहता है। इससे व्यक्ति के आंतरिक और बाह्य विकारों का भी निदान होता है। यह हमारी विडम्बना ही रही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान, जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होते जा रहे है आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास अधिक सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी जोर से हमारी पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः हमारा ये प्रयत्न है कि विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके और श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके, जिससे चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। इसी कारण से हमने आध्यात्म के प्रत्येक पहलु को किसी न किसी माध्यम से इस मंच के द्वारा छूने का प्रयत्न किया है। हमारा यह प्रयत्न " गागर में सागर" भरने के समतुल्य प्रतीत होता है किन्तु इसकी विवेचना हम अपने विद्वान पाठको पर छोड़ते है।
ॐत्व उद्देश्य व मंतव्य खंड में आपका स्वागत है। सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। यहाँ स्पष्ट करना आवश्यक है कि, यहाँ धर्म शब्द का प्रयोग वर्तमान के धर्म शब्द से भिन्न अर्थों में किया जा रहा है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। अतः यह इसका तात्पर्य इसी दृष्टि से ग्रहणीय है और इन्हीं अर्थों मे सनातन धर्म और संस्कृति पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्म संस्कृतियों में से एक है। हालांकि इसके इतिहास के बारे में विद्वानों में अनेक मत हैं। इसकी शुरुआत को सिंधु घाटी की सभ्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह ऐतिहासिक तथ्य हैं और इनके विवाद में जाना अभी हमारा मंतव्य नहीं है। हमारा मंतव्य तो उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है, जो जंबूद्वीप और भारत क्षेत्र में निवास करने वाले तमाम ऋषियों, मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं, जिन्हें हम अपनी सो काॅल्ड विकास-यात्रा में कहीं छोड़ते-भूलते आए हैं। यह प्रकृति के निकट, प्रकृति से जुड़ाव की कहानियाँ हैं, जो प्राकृतिक मानव के लिए पृथ्वी पर जीने का संबंल बनती रही हैं। आज विकास के इस पड़ाव पर हम, इसे सहजता से कैसे अपने जीवन में शामिल कर प्रकृति और पृथ्वी को, संस्कृति और समाज को बनाए रख सकते हैं, इसके बारे में बात करना, कहना, बताना और सुनना ही हमारा मंतव्य है। भारत में सनातन संस्कृति स्थायी रूप से विकसित हुई। भारत आज भी सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि है, मानव-विज्ञान और वैज्ञानिक खोजों की भूमि, जिसका उल्लेख वेदों, उपनिषदों तथा अनेक सांस्कृतिक ग्रंथों में समृद्ध विरासत के रूप में किया गया है। आज यह एक स्वीकृत और सिद्ध तथ्य है कि हमारे ऋषियों-मुनियों तथा बुद्धिजीवियों द्वारा स्थापित दर्शन व ज्ञान समयातीत है तथा जीवन के सभी आयामों में महत्वपूर्ण है। इसी भूमि पर ज्ञान के वे प्रयोग हुए, जो समस्त संसार को भौतिकता तथा आध्यात्मिकता में संतुलन बनाकर विश्व बंधुत्व की स्थापना के लिए प्रेरित करते हैं। ज्ञान के ये तमाम आयाम, जो सनातन ऋषि संसार की आध्यात्मिक, भौतिक तकनीकों की प्रयोगशालाओं में विकसित हुए, आज अनेक वैश्विक शोधपरक संस्थाएं, जैसे- नासा, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एमआईटी)) इत्यादि में इस विषय में न सिर्फ अध्ययन किए जा रहे हैं, बल्कि इन प्रयोगों के प्रभावों पर भी काम भी किए जा रहे हैं। यह विडंबना ही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान और समझ से लबरेज देश की तमाम जनता और नौनिहाल पीढ़ी उपभोक्तावाद में रम चुकी है और जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होती जा रही । आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास कोई सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी शिद्दत से हमारी नवागत पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः कुछ करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। ॐत्व इस दिशा में एक पहल है। पंडितजी एक संगठन है, जो अब संस्थागत मंच से पोर्टल और ब्लाॅग के माध्यम से सक्रिय हो रहा है। यह दोनों वास्तविक मंच इस दिशा में कार्यरत हैं कि किस तरह विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके। प्रयास यह है कि श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके। जिससे हमारा चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से यह ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप और वर्तमान में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि बाज़ार की चकाचौंध में डूबी हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। दूसरे शब्दों मेें, यह मंच प्रकृति, प्रेम, चेतना की आशा तथा विश्वास से संसार को सराबोर करने हेतु कार्यरत रहेगा।
धन्यवाद
"इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. विभिन्स माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं. हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी. "
ॐत्व की युवा टीम अपनी ख़ुशी से भारतीय संस्कृति को फ़ैलाने के लिए बिना किसी भुगतान के काम करती है। हमारी टीम पूरी कोशिश कर रही है हम सभी काम कर रहे है क्यूंकि हम सभी चाहते है आने वाली भविष्य के पीढ़ियों के लिए एक सुनहरा धरोहर हम छोड़ कर जाये| लेकिन अगर आज हमारी नज़रो में ही हमारे देश की विरासतों की कोई कीमत नहीं उसका उपयोग नहीं तो हम सभी को त्यार हो जाना चाहिए की आने वाली भविष्य की पीढ़ियों हमारे देश की अनमोल विरासतों को अनउपयोगी और व्यर्थ किसी काम की नहीं है यही समझेगी और कहेगी| हम कोसिस कर रहे है ज्यादा से ज्यादा अपनी सस्कृति को दुसरो तक पहुंचा सके आप भी हमारा सहोग कर सकते है पोस्ट लिख करअपनी सस्कृति के बारे में, सहोग केवल पेसो से नहीं करते, बल्कि अपनी सस्कृति से जुडी चीजों को शेयर करके भी कर सकते है अपने जीवन को उसकी अच्छाइयों से जोड़ सके।
We are accepting Guest Posting on our website for all categories.
I want to Hire a Professional..
Omtva
Verified Author Expert@DigitalDiaryWefru