अदरक के चमत्कारी औषधीय गुण: पेट खाँसी दमा और जोड़ों के दर्द का रामबाण घरेलू इलाज
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अदरक: वो गीली गाँठ जो पेट की आग जलाए और सौ बीमारियाँ भगाए
क्या आपने कभी गौर किया है, जब भी बारिश के मौसम में चाय की चुस्की की बात होती है, तो अदरक वाली चाय का ज़िक्र ज़रूर आता है? या जब पेट भारी-भारी सा लग रहा हो और भूख न लग रही हो, तो माँ कहती है, "जरा सा अदरक नमक पर लगाकर खा ले।" ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। यह सदियों का अनुभव है, जो हमें बताता है कि अदरक सिर्फ चाय का स्वाद बढ़ाने वाली चीज़ नहीं, बल्कि एक संपूर्ण औषधि है।
अदरक असल में एक गीली गाँठ (Rhizome) है, जो ज़मीन के अंदर जमीकंद की तरह फैलती-बढ़ती रहती है। इसकी खास बात ये है कि इसमें कोई बीज नहीं होता। जितनी ज़रूरत हो, उतना टुकड़ा काटकर इस्तेमाल कर लीजिए और बाकी हिस्सा फिर से ज़मीन में गाड़ दीजिए। देखते-ही-देखते वो फिर बढ़ जाएगा। यही ताज़ी अदरक जब सूख जाती है, तब सोंठ (Dried Ginger) बन जाती है। दोनों के गुण लगभग एक जैसे ही हैं, बस चूर्ण बनाने के लिए सोंठ ज़्यादा उपयुक्त है क्योंकि उसे बार-बार पीसने की झंझट नहीं रहती।
अदरक का सबसे बड़ा गुण है इसका पाचक (Digestive) होना। अगर आपको कब्ज़ (Constipation) रहती है, बार-बार गैस बनती है, मतली या उल्टी (Vomiting) जैसा लगता है, तो अदरक आपका सबसे करीबी दोस्त है।
इसका सबसे सरल उपाय है - अदरक को बारीक काटकर या कूटकर उसमें थोड़ा सा नमक मिलाइए और चटनी की तरह भोजन से पहले चाट लीजिए। अगर इतना भी न हो सके तो एक छोटा टुकड़ा मुँह में डालकर धीरे-धीरे चूसते रहिए। भूख खुलकर लगेगी और खाना हज़म भी अच्छे से होगा।
बच्चों को अगर खाँसी या जुकाम है, तो अदरक का ताज़ा रस निकालकर शहद में मिलाकर चटाना बहुत लाभकारी होता है।
अदरक केवल पेट तक ही सीमित नहीं है, इसकी ताकत कहीं ज़्यादा गहरी है। अगर आपको दमा (Asthma), श्वाँस (साँस फूलना) या पुरानी खाँसी की शिकायत है, तो अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटने से अद्भुत सुधार होता है। यहाँ तक कि आयुर्वेद में इसे क्षय रोग (Tuberculosis) जैसी गंभीर बीमारियों में भी सहायक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
हिचकी (Hiccups) बार-बार आ रही हो या जम्हाई (Yawning) का अनुपात बढ़ गया हो, ये संकेत हैं कि शरीर का वात बिगड़ा हुआ है। ऐसे में अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुँह में रख लेना तुरंत आराम पहुँचाता है। दाढ़ के दर्द (Molar Pain) में भी अदरक का रस लगाने और इसे चूसने से दर्द कम होता है।
यह अदरक का एक अनोखा गुण है, जो बहुत कम चीज़ों में देखने को मिलता है। यह एक साथ दो विपरीत काम करता है -
ग्राही (Absorbent): अगर आपकी आँतों की स्थिति ढीली है, बार-बार दस्त जैसा लगता है, तो अदरक आँतों को सँभालता है और स्थिति को सामान्य करता है।
भेदक (Laxative): वहीं अगर आपको पुरानी कब्ज़ है, तो यह मल को मुलायम करके पेट साफ करने में मदद करता है। यही कारण है कि अदरक को आयुर्वेद में संग्रहणी (Dysentery) जैसी बीमारियों में भी प्रयोग किया जाता है।
आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध योग "त्रिकुटा" - जो सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली से बनता है - उसका एक प्रधान अंग सोंठ (अदरक) ही है। यह तीनों मिलकर शरीर में जमे कफ को पिघलाकर बाहर निकालते हैं। इसके अलावा, अदरक का ताज़ा रस मूत्र निस्तारक (Diuretic) माना गया है, यानी यह पेशाब की मात्रा बढ़ाकर शरीर से विषैले तत्त्वों को बाहर निकालता है।
आइए कुछ विशेष रोगों में अदरक के पारंपरिक प्रयोगों पर एक नज़र डालते हैं:
विषम ज्वर (Malaria/Typhoid जैसा तेज़ बुखार): डेढ़ माशे (लगभग 1.5 ग्राम) सोंठ का चूर्ण गाय के दूध के साथ लेने से लाभ होता है।
हृदय रोग: हृदय की दुर्बलता में सोंठ का कुनकुना क्वाथ (Decoction) पीना हितकारी है।
हिचकी: आँवला और पीपल के चूर्ण के साथ सोंठ को शहद में मिलाकर चाटने से बार-बार आने वाली हिचकी बंद होती है।
पक्षाघात (Paralysis/Leg Pain): सोंठ को सेंधा नमक के साथ महीन पीसकर सूँघने (नस्य लेने) से लाभ बताया गया है।
अजीर्ण (Indigestion): धनिए के साथ अदरक का क्वाथ बनाकर पीने से पाचन ठीक होता है।
संग्रहणी (Dysentery): कच्चे बेल का गूदा, अदरक और गुड़ मिलाकर मट्ठे के साथ पीने से आँतों की जलन और बार-बार मल प्रवृत्ति में राहत मिलती है।
पीठ और कमर दर्द: सोंठ और गोखरू (Tribulus Terrestris) का क्वाथ प्रातः पीने से पुराना कमर दर्द दूर होता है।
अदरक की तासीर गर्म (उष्ण) होती है और यह बहुत प्रभावशाली औषधि है। इसका सेवन हमेशा ज़रूरत के अनुसार और सीमित मात्रा में ही करें। गर्मी के दिनों में या जिनकी प्रकृति पित्त प्रधान है, उन्हें बहुत अधिक अदरक खाने से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इसका सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
अदरक हमारी रसोई का वो रत्न है जो न केवल हर सब्ज़ी और चाय का ज़ायका बढ़ाता है, बल्कि पेट से लेकर फेफड़ों तक, हर अंग की देखभाल करता है। अगर आपने अभी तक इसे सिर्फ मसाला समझा था, तो अब से इसे अपना घरेलू डॉक्टर मान लीजिए। और हाँ, अगर ज़रा सी जगह मिले तो इसे अपने गमले या क्यारी में ज़रूर लगाइए। ताज़ी, रसीली और बिना केमिकल वाली अदरक का अपना ही मज़ा है।
आपके घर में अदरक का सबसे अनोखा नुस्खा कौन सा है? क्या कभी दादी-नानी ने इसे किसी अलग तरीके से इस्तेमाल करना सिखाया है? नीचे कमेंट करके हमें ज़रूर बताइए और दूसरों को भी जानकारी दीजिए। सेहतमंद रहिए, प्राकृतिक जीवन अपनाइए!
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सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। हमारा मंतव्य उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है,
भारत में निवास करने वाले कई ऋषि-मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवात्मा-जगत को बनाए रखने के लिए अनिवार्य तत्व हैं । भारतीय संस्कृति में अध्यात्म का एक प्रतीक ओम या ओम् को माना जाता है। यह परम चेतना या आत्मान के सार को दर्शाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी किसी हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में आध्यात्मिक पाठ किया जाता है तब उससे पहले ओम का जाप अवश्य किया जाता है। ॐ का जाप अगर निरंतर किया जाए तो इससे व्यक्ति का दिमांग शांत रहता है। इससे व्यक्ति के आंतरिक और बाह्य विकारों का भी निदान होता है। यह हमारी विडम्बना ही रही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान, जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होते जा रहे है आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास अधिक सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी जोर से हमारी पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः हमारा ये प्रयत्न है कि विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके और श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके, जिससे चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। इसी कारण से हमने आध्यात्म के प्रत्येक पहलु को किसी न किसी माध्यम से इस मंच के द्वारा छूने का प्रयत्न किया है। हमारा यह प्रयत्न " गागर में सागर" भरने के समतुल्य प्रतीत होता है किन्तु इसकी विवेचना हम अपने विद्वान पाठको पर छोड़ते है।
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