घर पर मसाले उगाएं और उनके औषधीय गुणों का लाभ उठाएं – सम्पूर्ण गाइड

꧁ Digital Diary ༒ Wefru – India's Largest Writing Community ༒ Read, Write & Grow ༒꧂



भोजन में प्रतिदिन उपयोग होने वाले अधिकांश मसाले केवल स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि उनमें अनेक रोगों को दूर करने की क्षमता भी छिपी होती है। हालाँकि जब कई मसालों को एक साथ मिला दिया जाता है तो भले ही खाने का ज़ायका बढ़ जाए, किन्तु औषधीय दृष्टि से उस मिश्रण का प्रभाव प्रायः समाप्त हो जाता है। ऐसे में वह मिश्रण दवा के रूप में प्रयोग के योग्य नहीं रहता।

मसालों का दोहरा लाभ – स्वाद भी, सेहत भी

आमतौर पर मसालों को स्वाद बढ़ाने वाला (स्वादवर्धक) और पाचन में सहायक (पाचक) माना जाता है। यही इनका सबसे प्रचलित उपयोग है। लेकिन इन्हें सुरक्षित घरेलू चिकित्सा के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है। यही कारण है कि अपने घर के आँगन, छत या किसी उपयुक्त स्थान पर एक-दो क्यारियाँ मसालों और औषधियों के लिए आरक्षित कर लेना अच्छा विचार है। मसाले के पौधे हर ऋतु में उगाए और बनाए रखे जा सकते हैं। बस खाद, पानी, धूप और हवा का ध्यान रखना ज़रूरी है। कुछ महीने सभी हरी वनस्पतियों के लिए अनुकूल होते हैं, कुछ सामान्य। यह स्थानीय मिट्टी और वातावरण पर भी निर्भर करता है। पड़ोसियों या सब्ज़ी उगाने वाले किसानों से जानकारी लेकर आप आसानी से शुरुआत कर सकते हैं। यदि मिट्टी की अच्छी देखभाल रखी जाए तो मसालों के पौधे हर महीने बोए और इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

रोज़मर्रा के मसाले और 'अति' का प्रभाव

हल्दी, सौंफ, धनिया, अजवाइन, राई, अदरक (सोंठ) जैसे मसाले भोजन में अतिरिक्त रूप से डाले जाते हैं। वहीं नमक और मिर्च का तो नित्य प्रयोग होता है, इसलिए हमें इनके विशेष गुणों का पता ही नहीं चलता। ठीक वैसे ही जैसे नशे की आदत वाला व्यक्ति प्रतिदिन तम्बाकू आदि का सेवन करता है और वह उसकी आदत बन जाती है। छोटे बच्चे को मिर्च खिलाने पर वह रोने लगेगा, और नमक की अधिक मात्रा भी असहनीय (असह्य) होती है, लेकिन एक बार आदत पड़ जाने पर तुरंत कोई प्रतिकूल (adverse) असर दिखाई नहीं देता। यहाँ "अति" यानी ज़रूरत से ज़्यादा सेवन पर चर्चा करना आवश्यक है। अति से उत्पन्न होने वाली बीमारियाँ जब परहेज़ (पथ्य) की माँग करती हैं, तब मसालों की असली अहमियत समझ आती है। हृदयाघात, अपच, पेप्टिक अल्सर, गुर्दे की बीमारियों में जब नमक या मिर्च का निषेध कर दिया जाता है, तब अनुभव होता है कि ये किस तरह हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गए थे। सच तो यह है कि अति हर दवा को ज़हर बना देती है और मसाले भी इसके अपवाद (exception) नहीं हैं।

क्यों ज़रूरी है घर पर मसाले उगाना?

बाज़ार में मिलने वाले पुराने, घुन लगे या अशुद्ध सूखे मसालों से बेहतर है कि इन्हें ताज़ा रूप में घर पर ही उगा लिया जाए। केवल कुछ अपवाद हैं जो ताज़े नहीं मिल सकते और खनिजों अथवा अन्य स्रोतों से प्राप्त होते हैं। जिस तरह घरेलू सब्ज़ी की बगिया आँगन, छत, गमलों, पेटियों, टूटी टोकरियों या कनस्तरों में लगाई जाती है, ठीक वैसे ही मसालों के लिए भी घर में या आस-पास जगह खोजी जा सकती है। यदि ज़मीन का बड़ा हिस्सा उपलब्ध हो तो मसालों को अलग-अलग छोटे-छोटे टुकड़ों में बोया जा सकता है।

मसालों में छिपे पोषक तत्त्व और चिकित्सकीय उपयोग

हर मसाले में अनेक विटामिन, खनिज और उपयोगी रासायनिक तत्त्व (chemical compounds) होते हैं। इनमें से जो स्वाद में रुचिकर लगें, उन्हें चुनकर चटनी बनाई जा सकती है और भोजन के साथ खाया जा सकता है। यह तो रसोई को स्वादिष्ट और गुणकारी बनाने की विधि हुई। लेकिन यदि कभी असमय कोई रोग या विकार उत्पन्न हो जाए, तो प्राथमिक उपचार के लिए इन मसालों में से उपयुक्त वनस्पति का चयन कर उपयोग में लाया जा सकता है। इस तरह एक कार्य से कई प्रयोजन सिद्ध होते हैं – भोजन स्वादिष्ट बनता है, कुपोषण निवारक तत्त्वों का समावेश होता है, घर में सुगंधित वातावरण से मन प्रसन्न रहता है तथा कीड़े-मकोड़ों का भी नियंत्रण होता है। इन लाभों को देखते हुए सहज निष्कर्ष यह है कि घरेलू सब्ज़ी वाटिका की तरह ही छोटी मसाला वाटिकाएँ भी हर घर में लगाई जानी चाहिए। साथ ही यह जानना भी ज़रूरी है कि कौन-सा मसाला किस रोग में लाभदायक है और उसकी सही मात्रा क्या होनी चाहिए। भारतीय परिवारों में ये घरेलू नुस्खों के रूप में प्राचीन समय से चली आ रही औषधियाँ हैं, फिर भी मात्रा और प्रयोग की शास्त्रोक्त एवं वैज्ञानिक जानकारी हर दृष्टि से उपयोगी है।

मसाले मिलाने से बचें जब करें चिकित्सकीय प्रयोग

स्वाद के लिए मसालों का मिश्रण अलग बात है, पर जब बात चिकित्सा की आती है तो कई मसालों को एक साथ न मिलाना अधिक अच्छा रहता है। किसी एक ही वनस्पति का प्रयोग करने पर वह अपना पूरा गुण दिखा पाती है। मिश्रण करने से अनेक गुण एक साथ मिलकर उलझन (confusion) पैदा कर सकते हैं। एक पदार्थ दूसरे के गुणों को बढ़ा सकता है, या ऐसा तीसरा प्रभाव उत्पन्न कर सकता है जो अपेक्षित न हो। जैसे लाल, पीला, नीला रंग अलग-अलग मात्रा में मिलाने पर नए रंग बनते हैं, ठीक वैसे ही वनस्पतियाँ भी मिलाने पर अपने मूल गुण खो सकती हैं और कोई अनचाहा प्रभाव दे सकती हैं। इसलिए चिकित्सा में ध्यान रखें कि एक समय में एक ही मसाला/वनस्पति का उपयोग करें। चटनी का उद्देश्य स्वादों की विविधता से एक नया ज़ायका बनाना है, परन्तु दवा के रूप में ऐसा करना उचित नहीं।

मसालों में मिलावट – एक गंभीर समस्या

आमतौर पर मसाले बाज़ार से खरीदे जाते हैं, और पीसने की मेहनत से बचने के लिए पिसे हुए रूप में खरीदना पसंद किया जाता है। साबुत या पिसे दोनों ही रूपों में मिलावट (adulteration) की संभावना बनी रहती है। चालाक दुकानदार इस धंधे में मोटा मुनाफ़ा कमाते हैं और हानिकारक चीज़ें मिला देते हैं। इन मिलावटों की पहचान बिना उच्च तकनीक वाली मशीनों और विशेषज्ञों के संभव नहीं होती। जिस तरह हर खाद्य पदार्थ की शुद्धता ज़रूरी है, उसी तरह मसाले तो और भी अधिक प्रभावी और संवेदनशील (sensitive) होते हैं, इसी कारण इन पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए। बाज़ार में राई के साथ कटेरी के बीज, जीरे के साथ बुहारी का कचरा, धनिया के साथ चावल के छिलके जैसी मिलावट का जोखिम रहता है। इसलिए, केवल पीसने तक सीमित न रहते हुए, मसालों को अपनी देखरेख में उगाना ही शुद्धता और प्रामाणिकता (authenticity) की गारंटी है, खासकर जब इन्हें चिकित्सा में प्रयोग करना हो।

आयुर्वेद के अनुसार मसालों का औषधीय महत्त्व

आयुर्वेद के ग्रंथों पर नज़र डालें तो पाते हैं कि मसाले के रूप में प्रयुक्त होने वाली औषधियाँ बहुगुणकारी, भूख बढ़ाने वाली और अनेक रोगों का नाश करने वाली हैं। दैनिक जीवन में निरंतर इस्तेमाल के कारण हम प्रायः इनके महत्त्व को नहीं पहचान पाते, लेकिन गहराई से विश्लेषण (analysis) करने पर ज्ञात होता है कि भारतीय भोजन पद्धति ऋषि-मुनियों द्वारा दूरगामी (far-reaching) नीतियों के आधार पर बनाई गई थी।

मसाला-औषधि वाटिका में उगाई जा सकने वाली प्रमुख वनस्पतियाँ

नीचे वे मसाले दिए गए हैं जिन्हें आप आसानी से अपने घर पर उगा सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर औषधि के रूप में प्रयोग कर सकते हैं:

  • राई

  • हल्दी

  • अदरक

  • सौंफ

  • मेथी

  • जीरा

  • मिर्च

  • पुदीना

  • पिप्पली

  • गिलोय

  • तुलसी

  • अजवाइन

  • धनिया

  • लहसुन

  • ग्वारपाठा (एलोवेरा)

  • प्याज

  • आँवला

अन्य उपयोगी मसाले जो घर पर नहीं उगाए जा सकते

कुछ मसाले खनिजों या विशेष वृक्षों से प्राप्त होते हैं, जिन्हें सामान्य घरेलू वाटिका में उगाना संभव नहीं है। ये हैं:

  • सुहागा

  • हींग

  • काला नमक

  • लौंग

  • तेजपत्र

  • दालचीनी

इनमें काला नमक और सुहागा खनिज (minerals) से मिलते हैं, जबकि शेष वृक्षों की छाल, फूल या गोंद से प्राप्त होते हैं। लेकिन भारतीय रसोई के मसालेदान में इनका प्रचलन खूब होता है, अतः इनकी उपयोगिता को देखते हुए शुद्ध रूप में औषधि प्रयोजन हेतु इन्हें घर में ज़रूर रखना चाहिए।

निष्कर्ष

अपने भोजन को सुरक्षित, पौष्टिक और चिकित्सकीय बनाने का सबसे सरल उपाय है – मसालों को स्वयं उगाएँ और शुद्धता सुनिश्चित करें। यह न केवल आपको मिलावट से बचाएगा, बल्कि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं में प्राथमिक उपचार का भी काम करेगा। एक छोटी-सी मसाला वाटिका आपके घर को सुगंधित, वातावरण को स्वच्छ और परिवार को स्वस्थ रखने का अचूक नुस्खा है।

FAQ

+ प्रश्न 1: क्या घर पर उगाए गए मसाले वास्तव में बीमारियों में दवा की तरह काम कर सकते हैं?

उत्तर: जी हाँ। आयुर्वेद के अनुसार हल्दी, अदरक, तुलसी, मेथी, लहसुन, अजवाइन आदि अनेक मसालों में रोगनिवारक (therapeutic) गुण होते हैं। लेकिन ध्यान रहे, चिकित्सा प्रयोजन के लिए एक समय में एक ही मसाले का प्रयोग करें। कई मसालों को एक साथ मिलाने पर उनका औषधीय प्रभाव नष्ट हो सकता है या अनचाहा प्रभाव (side effect) उत्पन्न हो सकता है।

+ प्रश्न 2: अगर मैं मसालों का मिश्रण (मसाला मिक्स) बना लूँ और उसे पेट की समस्या में लूँ तो क्या लाभ होगा?

उत्तर: बिल्कुल नहीं। चटनी या खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए मसालों का मिश्रण (blend) उपयुक्त है, लेकिन जब बात विशेष रोग के निवारण (treatment) की हो तो किसी एक ही वनस्पति का सेवन करना चाहिए। मिलाने पर गुणों का घपला हो जाता है और अपेक्षित लाभ नहीं मिलता। यह सिद्धांत (principle) एलोपैथी और आयुर्वेद दोनों दवाओं पर लागू होता है।

+ प्रश्न 3: मुझे बाज़ार से पिसे हुए मसाले लेने में क्या समस्या हो सकती है?

उत्तर: पिसे हुए या साबूत दोनों ही रूपों में बाज़ार में मिलावट (adulteration) का बड़ा जोखिम रहता है। धनिया में चावल के छिलके, जीरे में बुहारी कचरा, और रंग-रोगन तक मिलाए जा सकते हैं। ऐसे मसाले न केवल गुणहीन होते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक (harmful) भी सिद्ध हो सकते हैं। शुद्धता (purity) सुनिश्चित करने का एकमात्र उपाय घर पर उगाकर स्वयं पीसना है।

+ प्रश्न 4: क्या हर मौसम में मसालों के पौधे उगाए जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि उचित देखभाल की जाए तो मसाले के अधिकांश पौधे साल भर उगाए जा सकते हैं। इसके लिए खाद-पानी, धूप-हवा का ध्यान रखना आवश्यक है। कुछ महीने हरी वनस्पतियों के लिए अत्यधिक अनुकूल (favourable) होते हैं, कुछ सामान्य। स्थानीय मिट्टी और वातावरण (local climate) के अनुसार पड़ोसियों या किसानों से सलाह लेकर योजना बनाई जा सकती है।

+ प्रश्न 5: मेरे पास ज़मीन नहीं है, केवल बालकनी (Balcony) है। क्या मैं गमलों में मसाले उगा सकता हूँ?

उत्तर: अवश्य। धनिया, पुदीना, मिर्च, हल्दी, अदरक, मेथी, तुलसी, लहसुन आदि गमलों, पुरानी बाल्टियों, टोकरियों या कनस्तरों (containers) में बड़ी आसानी से लगाए जा सकते हैं। बस पानी की निकासी (drainage) का उचित इंतज़ाम होना चाहिए और उन्हें पर्याप्त धूप मिलनी चाहिए।

+ प्रश्न 6: "अति" से क्या अभिप्राय है और यह मसालों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?

उत्तर: "अति" का अर्थ है किसी भी वस्तु का आवश्यकता से अधिक सेवन। नमक, मिर्च जैसे नित्य उपयोग होने वाले मसालों का यदि अति सेवन किया जाए तो वे उच्च रक्तचाप, हृदयाघात, अपच, पेप्टिक अल्सर और गुर्दे की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। हर औषधि (medicine) अति होने पर विष (poison) बन जाती है और मसाले इस नियम के अपवाद (exception) नहीं हैं।

+ प्रश्न 7: किन मसालों को घर पर नहीं उगाया जा सकता, परन्तु फिर भी रसोई में औषधि की तरह रखना चाहिए?

उत्तर: कुछ वस्तुएँ ऐसी हैं जो खनिज (minerals) अथवा विशेष वृक्षों से प्राप्त होती हैं और सामान्य घरेलू बगिया में नहीं उगाई जा सकतीं। इनमें सुहागा, हींग, काला नमक, लौंग, तेजपत्र और दालचीनी प्रमुख हैं। इन्हें शुद्धतम रूप में खरीदकर घर में रखें ताकि चिकित्सकीय आवश्यकता पड़ने पर काम आ सकें।

+ प्रश्न 8: अगर छोटे बच्चों को खाँसी या पेट दर्द हो तो कौन-सा घरेलू मसाला सबसे पहले आज़माना चाहिए?

उत्तर: इसके लिए एकल प्रयोग (single herb use) का सिद्धांत याद रखें। खाँसी में तुलसी का रस या अदरक का शहद के साथ सेवन लाभदायक है। पेट दर्द में अजवाइन या सौंफ का अर्क देना चुरनों के मिश्रण से कहीं अधिक सुरक्षित और प्रभावी (effective) होता है। हालाँकि गंभीर स्थिति में चिकित्सक से परामर्श ज़रूर लें।
Omtva

Omtva

Verified Brand

जुड़ कर औरों को जोड़ कर चले, आओ अपनी संस्कृति को सहज कर चले।

सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन धर्म पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। हमारा मंतव्य उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है,

भारत में निवास करने वाले कई ऋषि-मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवात्मा-जगत को बनाए रखने के लिए अनिवार्य तत्व हैं । भारतीय संस्कृति में अध्यात्म का एक प्रतीक ओम या ओम् को माना जाता है। यह परम चेतना या आत्मान के सार को दर्शाता है। ऐसा कहा जाता है कि जब भी किसी हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म में आध्यात्मिक पाठ किया जाता है तब उससे पहले ओम का जाप अवश्य किया जाता है। ॐ का जाप अगर निरंतर किया जाए तो इससे व्यक्ति का दिमांग शांत रहता है। इससे व्यक्ति के आंतरिक और बाह्य विकारों का भी निदान होता है। यह हमारी विडम्बना ही रही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान, जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होते जा रहे है आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास अधिक सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी जोर से हमारी पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः हमारा ये प्रयत्न है कि विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके और श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके, जिससे चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। इसी कारण से हमने आध्यात्म के प्रत्येक पहलु को किसी न किसी माध्यम से इस मंच के द्वारा छूने का प्रयत्न किया है। हमारा यह प्रयत्न " गागर में सागर" भरने के समतुल्य प्रतीत होता है किन्तु इसकी विवेचना हम अपने विद्वान पाठको पर छोड़ते है।

ॐत्व उद्देश्य

ॐत्व उद्देश्य व मंतव्य खंड में आपका स्वागत है। सनातन संस्कृति सभी सभ्यताओं की जननी है और सनातन पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। यहाँ स्पष्ट करना आवश्यक है कि, यहाँ धर्म शब्द का प्रयोग वर्तमान के धर्म शब्द से भिन्न अर्थों में किया जा रहा है। वास्तव मे धर्म वह है, जो धारण किया जाए- धर्मः इति धार्यते। अतः यह इसका तात्पर्य इसी दृष्टि से ग्रहणीय है और इन्हीं अर्थों मे सनातन धर्म और संस्कृति पृथ्वी के सबसे प्राचीन धर्म संस्कृतियों में से एक है। हालांकि इसके इतिहास के बारे में विद्वानों में अनेक मत हैं। इसकी शुरुआत को सिंधु घाटी की सभ्यता से जोड़कर देखा जाता है। यह ऐतिहासिक तथ्य हैं और इनके विवाद में जाना अभी हमारा मंतव्य नहीं है। हमारा मंतव्य तो उन परंपराओं और अभ्यासों को प्रकाश में लाना और उन्हें सहज रूप से वर्तमान भारतीय समाज के बीच रखना है, जो जंबूद्वीप और भारत क्षेत्र में निवास करने वाले तमाम ऋषियों, मुनियों, विद्वानों तथा प्रकृतिपूजक समाजों के अनुभवों और शोधों से शताब्दियों में विकसित हुए और जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं, जिन्हें हम अपनी सो काॅल्ड विकास-यात्रा में कहीं छोड़ते-भूलते आए हैं। यह प्रकृति के निकट, प्रकृति से जुड़ाव की कहानियाँ हैं, जो प्राकृतिक मानव के लिए पृथ्वी पर जीने का संबंल बनती रही हैं। आज विकास के इस पड़ाव पर हम, इसे सहजता से कैसे अपने जीवन में शामिल कर प्रकृति और पृथ्वी को, संस्कृति और समाज को बनाए रख सकते हैं, इसके बारे में बात करना, कहना, बताना और सुनना ही हमारा मंतव्य है। भारत में सनातन संस्कृति स्थायी रूप से विकसित हुई। भारत आज भी सांस्कृतिक विविधताओं की भूमि है, मानव-विज्ञान और वैज्ञानिक खोजों की भूमि, जिसका उल्लेख वेदों, उपनिषदों तथा अनेक सांस्कृतिक ग्रंथों में समृद्ध विरासत के रूप में किया गया है। आज यह एक स्वीकृत और सिद्ध तथ्य है कि हमारे ऋषियों-मुनियों तथा बुद्धिजीवियों द्वारा स्थापित दर्शन व ज्ञान समयातीत है तथा जीवन के सभी आयामों में महत्वपूर्ण है। इसी भूमि पर ज्ञान के वे प्रयोग हुए, जो समस्त संसार को भौतिकता तथा आध्यात्मिकता में संतुलन बनाकर विश्व बंधुत्व की स्थापना के लिए प्रेरित करते हैं। ज्ञान के ये तमाम आयाम, जो सनातन ऋषि संसार की आध्यात्मिक, भौतिक तकनीकों की प्रयोगशालाओं में विकसित हुए, आज अनेक वैश्विक शोधपरक संस्थाएं, जैसे- नासा, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (एमआईटी)) इत्यादि में इस विषय में न सिर्फ अध्ययन किए जा रहे हैं, बल्कि इन प्रयोगों के प्रभावों पर भी काम भी किए जा रहे हैं। यह विडंबना ही है कि ऐसे चमत्कारिक ज्ञान और समझ से लबरेज देश की तमाम जनता और नौनिहाल पीढ़ी उपभोक्तावाद में रम चुकी है और जीवन के मूल रस और उद्देश्य से दूर होती जा रही । आज हमारा अपना ही ज्ञान हम बाहरी देशों से आयातित कर रहे हैं, क्योंकि इस विषय में न तो हमारे पास कोई सूचना है, न हमारी दिनचर्या में वे अभ्यास शामिल रह गए हैं, जो हमें आध्यात्मिकता और भौतिकता के संतुलन की समझ दे सकें। आज इस समृद्ध ज्ञान व अभ्यास को ढकोसला मान बाज़ार की ताक़तें अपनी पूरी शिद्दत से हमारी नवागत पीढ़ी को प्रभावित कर उसे अपने वश में कर रही हैं। अतः कुछ करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। ॐत्व इस दिशा में एक पहल है। पंडितजी एक संगठन है, जो अब संस्थागत मंच से पोर्टल और ब्लाॅग के माध्यम से सक्रिय हो रहा है। यह दोनों वास्तविक मंच इस दिशा में कार्यरत हैं कि किस तरह विभिन्न ग्रंथों में भरा ज्ञान का भंडार आम लोगों के मध्य आए और उन्हें जीवन के आधारभूत सत्यों से अवगत कराकर एक उच्चस्तरीय मानव जीवन की रचना में योगदान कर सके। प्रयास यह है कि श्रृंखलाबद्व तरीके से सनातन वैदिक ज्ञान व सूचनाएं नियमित हमारे पाठकों के बीच आ सकें, जिससे इस कठिन समय में उनको जीवन की वह सही दिशा मिल सके। जिससे हमारा चित्त, वृत्ति और मनोवृत्ति स्वस्थ, समृद्व और संपन्न रह सके और हम (क्वालिटी लाइफ ) उच्चस्तरीय मानव जीवन को प्राप्त सकें। इस मंच से यह ज्ञान और सूचनाएं केवल अपनी पारंपरिकता की बात न कर उनके वैज्ञानिक तथा आधुनिक स्वरूप और वर्तमान में उसकी उपयोगिता और उसके स्वरूप पर बात करें । हमारा प्रयास है कि बाज़ार की चकाचौंध में डूबी हमारी आगामी पीढ़ी जीवन के वास्तविक स्वरूप व मूल्यों को जाने तथा एक मनुष्य के नाते खुद से खुद की वास्तविक पहचान कर सकें और वह अपनी तार्किकता, वैज्ञानिकता तथा उपयोगिता की कसौटी पर कसने के बाद स्वीकार कर सकें। दूसरे शब्दों मेें, यह मंच प्रकृति, प्रेम, चेतना की आशा तथा विश्वास से संसार को सराबोर करने हेतु कार्यरत रहेगा।

धन्यवाद

 

 

डिस्क्लेमर-

"इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है. विभिन्स माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्म ग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं. हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना के तहत ही लें. इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी. "

अपनी पोस्ट सबमिट करें

ॐत्व की युवा टीम अपनी ख़ुशी से भारतीय संस्कृति को फ़ैलाने के लिए बिना किसी भुगतान के काम करती है। हमारी टीम पूरी कोशिश कर रही है हम सभी काम कर रहे है क्यूंकि हम सभी चाहते है आने वाली भविष्य के पीढ़ियों के लिए एक सुनहरा धरोहर हम छोड़ कर जाये| लेकिन अगर आज हमारी नज़रो में ही हमारे देश की विरासतों की कोई कीमत नहीं उसका उपयोग नहीं तो हम सभी को त्यार हो जाना चाहिए की आने वाली भविष्य की पीढ़ियों हमारे देश की अनमोल विरासतों को अनउपयोगी और व्यर्थ किसी काम की नहीं है यही समझेगी और कहेगी| हम कोसिस कर रहे है ज्यादा से ज्यादा अपनी सस्कृति को दुसरो तक पहुंचा सके आप भी हमारा सहोग कर सकते है पोस्ट लिख करअपनी सस्कृति के बारे में, सहोग केवल पेसो से नहीं करते, बल्कि अपनी सस्कृति से जुडी चीजों को शेयर करके भी कर सकते है अपने जीवन को उसकी अच्छाइयों से जोड़ सके।

 




Leave a comment

We are accepting Guest Posting on our website for all categories.


Comments





Wefru Services

I want to Hire a Professional..

<