सावधान! कहीं आपके कपड़े आपकी उम्र और ऊर्जा तो नहीं सोख रहे? जानिए 'Ghost Fabrics' का डरावना सच!
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फ्रीक्वेंसी का मूल सिद्धांत (The Core Science)ब्रह्मांड में हर जीवित और निर्जीव वस्तु परमाणुओं (Atoms) से बनी है, जो निरंतर कंपन (Vibrate) करते हैं। इस कंपन की गति को mHz (milliHertz) में मापा जाता है। मानव शरीर की फ्रीक्वेंसी: एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर की फ्रीक्वेंसी लगभग 70-100 mHz होती है। जब यह 60 mHz से नीचे गिरती है, तो बीमारियाँ शुरू होने लगती हैं।
यह विषय "Healing Frequency of Fabrics" के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य आधार यह है कि ब्रह्मांड में हर चीज़, यहाँ तक कि हमारे कपड़े भी, ऊर्जा के छोटे कणों से बने हैं जो एक निश्चित गति (Frequency) पर कंपन (Vibrate) करते हैं।
यहाँ इस टॉपिक का पूरा विस्तार दिया गया है:
उच्च फ्रीक्वेंसी वाले कपड़े (The Healers)
डॉ. हेइडी येलेन के अध्ययन के अनुसार, केवल दो कपड़े "सुपर हीलर्स" की श्रेणी में आते हैं:
लिनन (Linen) - 5000 mHz
शुद्ध ऊन (Pure Wool) - 5000 mHz
सावधानी: लिनन और ऊन को कभी भी एक साथ (Layers में) नहीं पहनना चाहिए। यह विज्ञान के 'शॉर्ट सर्किट' जैसा है। दोनों की ऊर्जा दिशा अलग होने के कारण वे मिलकर 0 mHz हो जाते हैं।
3. मध्यम फ्रीक्वेंसी वाले कपड़े (The Balancers)
ऑर्गेनिक कॉटन (Cotton) - 100 mHz
4.लो-फ्रीक्वेंसी या "Ghost Fabrics" (The Energy Drains)
इन्हें "Ghost Fabrics" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें जीवन की कोई ऊर्जा नहीं होती। ये 'मृत' पदार्थों (जैसे पेट्रोलियम) से बने होते हैं।
यह आपके स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
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