प्राथना

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हे प्रभु, मेरे कुल देवी-कुल देवता, पितृ, ग्राम देवता, प्रकृति के सभी शक्तिया आप का बहुत बहुत धन्यवाद् जो भी आप ने दिया, सबसे अच्छा ही दिया है और आप मेरे लिए हमेशा ही बहुत अच्छा ही करते है प्रभु मेरे वाणी में अमृत घोलना मेरे से कोई बुरा कर्म मत करवाना और मेै करने भी जाऊ तो कैसे भी रोक लेना हे प्रभु आप कृपया करे, मेरे ऊपर अपने अनुग्रह शक्ति से, तिरोधान शक्ति से, क्रिया शक्ति से, ज्ञान शक्ति से, इच्छा शक्ति से 

देवता / कार्य सामग्री (लोटा: पीतल) दिशा (मुख) मुख्य मंत्र विशेष लाभ
सूर्य देव जल + लाल चंदन या गुड़ पूर्व (East) ॐ घृणि सूर्याय नमः सरकारी नौकरी और आत्मविश्वास
आदित्य हृदय स्तोत्र (पाठ करना है) पूर्व (East) (पूरा स्तोत्र - 3 बार) 5 अप्रैल परीक्षा में विजय
पितृ (Ancestors) जल + काले तिल दक्षिण (South) ॐ पितृभ्यः नमः रुकावटें और कर्ज दूर करना
शिवलिंग जल + साबुत चावल (अक्षत) उत्तर (North) ॐ नमः शिवाय / महामृत्युंजय मानसिक शांति और बिजनेस वृद्धि
केले का पेड़ जल + हल्दी (केवल गुरुवार) उत्तर-पूर्व (NE) ॐ बृं बृहस्पतये नमः टीचिंग करियर और ज्ञान
पीपल का पेड़ जल + कच्चा दूध/गंगाजल पश्चिम (West) ॐ शं शनैश्चराय नमः कमर दर्द और बाधा निवारण
पढ़ाई (Study) हरा रुमाल (पास रखें) उत्तर या पूर्व ॐ बुं बुधाय नमः एकाग्रता और टेक्निकल लॉजिक

 

आदित्य हृदय स्तोत्र (पूर्ण पाठ + हिंदी अर्थ)

? 1. प्रारंभ (उपदेश)

संस्कृत: ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्।
उपगम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवान् ऋषिः॥

हिंदी अर्थ: युद्ध से थके हुए और चिंतित खड़े श्रीराम के पास, जब रावण सामने था, तब देवताओं के साथ अगस्त्य ऋषि आए और बोले।

? 2. स्तोत्र का महत्व

संस्कृत: राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्।
येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसि॥

अर्थ: हे राम! यह सनातन और गोपनीय स्तोत्र सुनो, जिससे तुम युद्ध में सभी शत्रुओं को जीत जाओगे।

? 3. आदित्य हृदय की महिमा

संस्कृत: आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्।
जयावहं जपेन्नित्यं अक्षयं परमं शिवम्॥

अर्थ: यह आदित्य हृदय स्तोत्र पवित्र है, शत्रुओं का नाश करने वाला, विजय देने वाला और अक्षय सुख देने वाला है।

? 4. सूर्य देव की स्तुति

संस्कृत: सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्।
चिन्ताशोकप्रशमनम् आयुर्वर्धनमुत्तमम्॥

अर्थ: यह सभी मंगलों में श्रेष्ठ, पापों का नाश करने वाला, चिंता और शोक को दूर करने वाला और आयु बढ़ाने वाला है।

? 5. सूर्य का स्वरूप

संस्कृत: रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्॥

अर्थ: किरणों से युक्त, उदय होने वाले, देव-असुरों द्वारा पूजित सूर्य भगवान की पूजा करो।

? 6. सर्वदेव स्वरूप

संस्कृत: सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः।
एष देवासुरगणान् लोकान् पाति गभस्तिभिः॥

अर्थ: यह सूर्य सभी देवताओं का आत्मरूप है और अपनी किरणों से संसार की रक्षा करता है।

? 7. सूर्य = सभी देवता

संस्कृत: एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥

अर्थ: सूर्य ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्र और वरुण हैं।

? 8. प्रकृति और जीवन के स्रोत

संस्कृत: पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः।
वायुर्वह्निः प्रजाप्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥

अर्थ: सूर्य ही पितर, वसु, मरुद्गण, मनु, वायु, अग्नि, प्राण और ऋतुओं के निर्माता हैं।

? 9. सूर्य के नाम

संस्कृत: आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्।
सुवर्णसदृशो भानुः हिरण्यरेता दिवाकरः॥

अर्थ: सूर्य के कई नाम हैं-आदित्य, सविता, सूर्य, पूषा, भानु, दिवाकर आदि।

? 10. सूर्य की शक्ति

संस्कृत: हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्।
तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्ड अंशुमान्॥

अर्थ: सूर्य हजारों किरणों वाले, अंधकार का नाश करने वाले और जीवनदाता हैं।

? 11. अंधकार विनाशक

संस्कृत: हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनः भास्करो रविः।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खः शिशिरनाशनः॥

अर्थ: सूर्य सृष्टि के मूल, ठंड का नाश करने वाले और प्रकाश देने वाले हैं।

? 12. दिशा और समय के स्वामी

संस्कृत: व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः॥

अर्थ: सूर्य आकाश के स्वामी, अंधकार को दूर करने वाले और वेदों के ज्ञाता हैं।

? 13. जीवन चक्र नियंत्रक

संस्कृत: आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलः सर्वतापनः।
कविर्विश्वो महातेजा रक्तः सर्वभवोद्भवः॥

अर्थ: सूर्य जीवन, मृत्यु, ऊर्जा और सृष्टि के कारण हैं।

? 14. प्रार्थना

संस्कृत: नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥

अर्थ: पूर्व और पश्चिम दिशा के स्वामी तथा प्रकाश के देवता सूर्य को नमस्कार।

? 15. अंतिम उपदेश (फल)

संस्कृत: एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत् तदा।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्॥

अर्थ: यह सुनकर श्रीराम का शोक समाप्त हो गया और उन्होंने एकाग्र होकर इसका स्मरण किया।

? 16. विजय

संस्कृत: आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥

अर्थ:
सूर्य का ध्यान करके श्रीराम ने ऊर्जा प्राप्त की और युद्ध के लिए तैयार हुए।

 

 

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CtWmCB [mar4+663670@gay email] Date:- 2025-03-03 11:43:06






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