एक शिक्षक के लिए मनोविज्ञान का ज्ञान होना बहुत ही जरूरी, उपयोगी और महत्वपूर्ण है। कक्षा-शिक्षण और बालकों के दैनिक संपर्क में मनोविज्ञान का प्रयोग किये बिना वह अपने कार्य को कुशलता से संपन्न नही कर सकता है। अपने शिक्षण-कार्य को सफल बनाने तथा छात्रों के सीखने को लाभप्रद बनाने के लिये उसे मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करना चाहिये। इसी तथ्य को ध्यान मे रखते हुये, एलिस क्रो ने यह विचार व्यक्त किया कि," शिक्षकों को अपने शिक्षण मे उन मनौवैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रयोग करने के लिये तैयार रहना चाहिए जो सफल शिक्षण और प्रभावशील अधिगम के लिए अनिवार्य हैं। शिक्षक के लिए मनोविज्ञान की उनयोगिता अथवा आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से हैं-
1. स्वयं को समझना
एक शिक्षक के लिए यह जानने जरूरी है कि उसमे अपने दायित्व के अनुकूल योग्यताएं है या नही। स्वभाव, बुद्धि, स्तर, जीवन दर्शन, स्वयं के निर्धारित मूल्य, शिक्षकों एवं अभिभावकों से संबंध, शिक्षक एवं छात्रों से संबंध, व्यवहार, चारित्रिक गुण, शिक्षक योग्यता की समाज में क्या प्रक्रिया हैं? शिक्षक का क्या दायित्व हैं? शिक्षक की क्या आवश्यकता हैं? आदि सभी बातों की जानकारी शिक्षक को शिक्षा-मनोविज्ञान की सहायता से मिल जाती हैं।
2. विद्यार्थी को जानना
एक शिक्षक को छात्र की समस्त शक्तियों एवं योग्यताओं की जानकारी होना जरूरी है। इसी के आधार पर वह अपने कार्य का संचालन करता है।
3. शिक्षण पद्धित
शिक्षा-मनोविज्ञान मे सीखने के लिए ऐसे अनेक सिद्धांत है जिनकी मदद से शिक्षक अपनी शिक्षण की विधियों का चयन कर सकते है एवं शिक्षण को अधिक से अधिक प्रभावशाली बना सकतें हैं।
4. विद्यार्थियों के मार्गदर्शन मे सहायक
उचित मार्गदर्शन के अभाव मे विद्यार्थी अपने पथ से भटक जाते हैं और उनके अध्ययन का उद्देश्य विफल हो जाता हैं। शिक्षा-मनोविज्ञान बालकों को समुचित दिशा प्रदान करता है जिससे वे अपनी क्षमताओं का समुचित ढंग से उपयोग करने में समर्थ हो जाते हैं।
5. शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सहायक
शिक्षा-मनोविज्ञान शिक्षा के विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त करने मे विशेष सहायक होता है। इस संबंध में स्किनर ने ठीक ही लिखा हैं," शिक्षा-मनोविज्ञान आजकल शिक्षक के जीवन को ज्ञान से समृद्ध कर उसकी शिक्षण विधि को उन्नत कर उसे शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायता प्रदान करता हैं।"
6. शिक्षण विधियों के चयन मे सहायक
शिक्षा-मनोविज्ञान शिक्षकों को बालकों की आयु एवं स्तर तथा समय और परिस्थिति के अनुकूल शिक्षण विधि का चयन करने मे सहायता देता है क्योंकि प्रत्येक स्थिति और समय पर एक ही शिक्षण विधि को नही अपनाया जा सकता।
7. सीखने के लिए उचित परिस्थितियों एवं वातावरण का आयोजन करना
शिक्षण कार्य के समय वातावरण एवं परिस्थितियों का भी शिक्षण की प्रक्रिया में एक विशेष महत्व होता है। शिक्षा-मनोविज्ञान के माध्यम से यह ज्ञात होता हैं, कि किस समय व्यक्तिगत शिक्षा तथा किस समय सामूहिक शिक्षण की आवश्यकता है, सहायक सामग्री का उचित प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है। उपयुक्त परिस्थितियों शिक्षार्थी को सीखने के लिए अधिक प्रेरित करती हैं।
8. बाल-स्वभाव एवं व्यवहार का समुचित ज्ञान
शिक्षा-मनोविज्ञान शिक्षक को बालक के स्वभाव एवं व्यवहार से पूर्णतः अवगत कराता है। शिक्षक बालक की मूल प्रवृत्तियों और संवेग आदि की जानकारी भी प्राप्त कर लेता है। यह ज्ञान उसके शैक्षणिक और अन्य कार्यक्रमों के आयोजन में सहायक रहता हैं
9. मूल्यांकन
बालकों के मूल्यांकन के लिए बुद्धि, रूचि, व्यक्तित्व, ज्ञान आदि के शिक्षा मनोविज्ञान में अनेक मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों, नियमों एवं विधियों का प्रयोग किया जाता है। इस मूल्यांकन कार्य में सबसे अधिक योगदान एक शिक्षक का होता है। इसलिए जरूरी है कि उसे शिक्षा-मनोविज्ञान की पूरी जानकारी हों।
10. मार्ग-निदर्शेन मे सहायता
शिक्षा मनोविज्ञान का ज्ञान अध्यापक को निर्देशन तथा परामर्श संबंधी सभी जरूरी तथ्यों का अध्ययन करने का अवसर प्रदान करता है। अतः शिक्षा-मनोविज्ञान विद्यार्थियों के उचित मार्गदर्शन में अध्यापक की सहायता करता हैं।
11. बालक द्वारा विषय-वस्तु चयन मे सहायक
यह अध्यापक को ऐसी अन्तर्दृष्टि प्रदान करता है जिससे वह बालक की मानसिक योग्यता, क्षमता, रूचि और रूझान के अनुसार विषय-वस्तु चयन करने एवं उन विषयों के शिक्षण की उपयुक्त व्यवस्था करने में सहायक सिद्ध होता हैं।
12. सामाजिक भावना के विकास मे सहायक
शिक्षा-मनोविज्ञान अध्यापक को सामाजिक संबंधों के महत्व का ज्ञान कराता है। इसी ज्ञान के आधार पर अध्यापक सामाजिक गतिविधियों का आयोजन करता है जो बालकों मे सामाजिक भावनाओं के विकास मे सहायक होता हैं।
13. शिक्षक के दृष्टिकोण को वैज्ञानिक बनाने में सहायक
शिक्षा-मनोविज्ञान शिक्षक/अध्यापक के दृष्टिकोण को वैज्ञानिक बनाता है जिसके फलस्वरूप वह शिक्षण-कार्य में आने वाली समस्याओं को सुलझाने एवं सही ढूँढने में सफल होता हैं।
14. शिक्षण पद्धितयों एवं तकनीकी से अवगत होना
यह शिक्षक (अध्यापक) को ऐसी पद्धतियों और तकनीकी से अवगत कराता है जिनके द्वारा वह अपने और दूसरे के व्यवहार का विश्लेषण कर बालक के व्यक्तित्व के समायोजन में सहायता देता हैं।
15. शिक्षण व्यवस्था को मनोवैज्ञानिक आधार प्रदान करना
शिक्षा-मनोविज्ञान का ज्ञान शिक्षक को विद्यालय प्रबन्ध, नियोजन और शिक्षण व्यवस्था करने हेतु मनोवैज्ञानिक आधार प्रस्तुत करता हैं।
उपरोक्त विवेचन से यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षक को अपना शिक्षण प्रभावशाली बनाने के लिए शिक्षा-मनोविज्ञान का अध्ययन करता अत्यंत ही आवश्यक हैं।
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