“एक ऑफिस की छोटी सी परेशानी से शुरू हुआ Zomato, आज है करोड़ों का बिजनेस! जानिए पूरी कहानी”

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? Zomato Success Story:

एक छोटी-सी परेशानी से शुरू होकर करोड़ों की कंपनी बनने तक की कहानी

आज भारत के लगभग हर स्मार्टफोन में एक लाल रंग का ऐप जरूर दिखाई देता है-Zomato। रोज लाखों लोगों तक खाना पहुंचाने वाली यह कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी और चर्चित कंपनियों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतनी बड़ी कंपनी की शुरुआत किसी बड़े ऑफिस या करोड़ों रुपये के निवेश से नहीं हुई थी?

इसकी शुरुआत एक ऑफिस के छोटे से कैफेटेरिया में खड़े होकर मेन्यू देखने की परेशानी से हुई थी।

दो दोस्तों ने ऑफिस की एक छोटी-सी समस्या को देखा, उसका आसान हल निकाला और धीरे-धीरे उसी आइडिया को एक बहुत बड़े बिजनेस में बदल दिया।

तो आइए जानते हैं Zomato की शुरुआत से लेकर आज तक की पूरी कहानी, बिल्कुल आसान शब्दों में।

? Zomato की पूरी कहानी: साल-दर-साल सफर

 A. 2008 – एक छोटी समस्या और Foodiebay की शुरुआत Zomato की कहानी साल 2008 में शुरू होती है।

उस समय दीपिंदर गोयल और पंकज चड्ढा दिल्ली में एक बड़ी कंपनी Bain & Company में काम करते थे। दोनों ने IIT दिल्ली से पढ़ाई की थी और अच्छी नौकरी कर रहे थे।

उनकी नौकरी अच्छी थी, लेकिन ऑफिस में लंच के समय उन्हें एक छोटी-सी परेशानी दिखाई देती थी।

ऑफिस के कैफेटेरिया में जब लंच का समय होता था, तो बहुत सारे कर्मचारी खाना लेने के लिए लाइन में खड़े हो जाते थे। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि लोग सिर्फ यह देखने के लिए भी लाइन में खड़े रहते थे कि आज खाने में क्या-क्या मिल रहा है।

यानी अगर किसी को सिर्फ मेन्यू देखना हो, तब भी उसे लाइन में लगना पड़ता था।

दीपिंदर गोयल ने सोचा कि इस छोटी-सी समस्या को किसी आसान तरीके से हल किया जा सकता है।

उन्होंने कैफेटेरिया के सभी मेन्यू कार्ड स्कैन किए और उन्हें ऑफिस के अंदर मौजूद कंप्यूटर नेटवर्क पर डाल दिया।

अब कर्मचारियों को मेन्यू देखने के लिए लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं थी। वे अपने कंप्यूटर से ही देख सकते थे कि आज खाने में क्या है।

इस छोटे से काम का लोगों पर बहुत अच्छा असर हुआ।

ऑफिस के कर्मचारी इस सुविधा का इस्तेमाल करने लगे और दीपिंदर को समझ आया कि अगर एक ऑफिस में यह समस्या है, तो शायद दूसरे ऑफिस और दूसरे लोगों को भी ऐसी परेशानी होती होगी।

इसके बाद दीपिंदर और पंकज ने दिल्ली के दूसरे रेस्टोरेंट्स के मेन्यू भी इकट्ठा करने शुरू किए।

उन्होंने रेस्टोरेंट्स की जानकारी, मेन्यू और दूसरी जरूरी चीजें एक जगह पर रखना शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने एक वेबसाइट बनाई जिसका नाम था Foodiebay।

यहीं से एक छोटे से आइडिया ने बिजनेस का रूप लेना शुरू किया।

B. 2010 – Foodiebay बना Zomato

धीरे-धीरे Foodiebay दिल्ली-NCR में लोकप्रिय होने लगा।

लोग इस वेबसाइट का इस्तेमाल रेस्टोरेंट खोजने और उनका मेन्यू देखने के लिए करने लगे।

जब दोनों को लगा कि इस काम में काफी संभावनाएं हैं, तो उन्होंने अपनी अच्छी नौकरियां छोड़कर इसी बिजनेस पर पूरा ध्यान देने का फैसला किया।

यह फैसला आसान नहीं था।

एक तरफ अच्छी नौकरी थी और दूसरी तरफ एक ऐसा बिजनेस था जिसके बारे में यह पता नहीं था कि आगे चलकर वह सफल होगा या नहीं।

लेकिन दोनों ने अपने आइडिया पर भरोसा किया।

इसके बाद साल 2010 में Foodiebay का नाम बदलकर Zomato कर दिया गया।

नाम बदलने का एक कारण यह भी था कि Foodiebay नाम में "eBay" जैसा शब्द आता था। भविष्य में नाम को लेकर किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए कंपनी ने नया नाम चुना।

Zomato नाम "Tomato" शब्द से प्रेरित था।

अब कंपनी का नाम Zomato हो चुका था और धीरे-धीरे इसका काम भी बढ़ता जा रहा था।

इसी दौरान बड़ी कंपनी Info Edge, जो Naukri.com की पैरेंट कंपनी है, ने Zomato के आइडिया पर भरोसा किया।

Info Edge ने शुरुआती समय में Zomato में करीब 1 मिलियन डॉलर का निवेश किया।

उस समय यह रकम लगभग ₹4.5 करोड़ के आसपास थी।

इस पैसे से Zomato को अपने बिजनेस को और बड़ा करने में मदद मिली।

C. 2011 से 2014 – भारत के कई शहरों में विस्तार

Zomato ने शुरुआत दिल्ली से की थी, लेकिन कंपनी यहीं रुकने वाली नहीं थी।

धीरे-धीरे Zomato ने भारत के दूसरे बड़े शहरों में भी अपनी सेवाएं शुरू करनी शुरू कर दीं।

मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी लोग Zomato का इस्तेमाल करने लगे।

अब Zomato सिर्फ दिल्ली की वेबसाइट नहीं रह गई थी।

कंपनी ने भारत से बाहर जाने की भी योजना बनाई।

साल 2012 के आसपास Zomato ने दूसरे देशों में भी अपनी रेस्टोरेंट जानकारी देने वाली सेवा शुरू की।

कंपनी दुबई, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और UK जैसे देशों तक पहुंची।

इस तरह Zomato ने धीरे-धीरे खुद को सिर्फ भारत की कंपनी न रखकर एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी बनाने की कोशिश शुरू कर दी।

इस समय Zomato का मुख्य काम लोगों को रेस्टोरेंट खोजने, उनका मेन्यू देखने और उनके बारे में जानकारी पाने में मदद करना था।

लेकिन आगे चलकर कंपनी के बिजनेस में एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला था।

D. 2015 – Food Delivery में एंट्री

साल 2015 Zomato के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।

उस समय भारत में लोगों के खाने का तरीका बदल रहा था।

लोग सिर्फ रेस्टोरेंट खोजने के लिए ऐप इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे। वे चाहते थे कि उन्हें खाना घर बैठे मिल जाए।

इसी समय Swiggy जैसी कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही थीं, जिनका मुख्य काम घर तक खाना पहुंचाना था।

Zomato ने भी समझ लिया कि आने वाले समय में सिर्फ रेस्टोरेंट की जानकारी देना काफी नहीं होगा।

अगर कंपनी को आगे बढ़ना है, तो उसे खाना घर तक पहुंचाने के काम में भी आना होगा।

इसी सोच के साथ 2015 में Zomato ने भारत में Food Delivery की शुरुआत की।

यह Zomato के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव था।

अब कंपनी सिर्फ यह नहीं बता रही थी कि आसपास कौन-सा रेस्टोरेंट है, बल्कि लोगों को उस रेस्टोरेंट से खाना मंगाने की सुविधा भी देने लगी।

धीरे-धीरे Food Delivery Zomato के सबसे महत्वपूर्ण बिजनेस में से एक बन गया।

E. 2020 – कोरोना और लॉकडाउन का मुश्किल समय

साल 2020 पूरी दुनिया के लिए बहुत मुश्किल था।

कोरोना वायरस के कारण भारत में लॉकडाउन लगा दिया गया।

लोग घरों से बाहर नहीं निकल सकते थे। रेस्टोरेंट बंद हो गए और बाहर खाना खाना लगभग बंद हो गया।

इसका सीधा असर Zomato के बिजनेस पर पड़ा।

कंपनी की Food Delivery बहुत ज्यादा कम हो गई। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय Zomato का Food Delivery बिजनेस लगभग 80% तक गिर गया था।

यह किसी भी कंपनी के लिए बहुत बड़ा झटका था।

लेकिन Zomato ने इस मुश्किल समय में सिर्फ इंतजार नहीं किया।

कंपनी ने अपने बिजनेस में नए तरीके आजमाने शुरू किए।

Zomato ने Zomato Market शुरू किया, जिसके जरिए लोगों तक जरूरी सामान और किराने का सामान पहुंचाने की कोशिश की गई।

इसके अलावा कंपनी ने Contactless Delivery जैसे तरीके अपनाए।

इसका मतलब था कि ग्राहक और Delivery Partner के बीच सीधा संपर्क कम से कम हो।

Delivery Partners के लिए सफाई और सुरक्षा के नियम भी बनाए गए।

इससे लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिली।

इसी दौरान Zomato ने एक और बड़ा कदम उठाया।

उसने भारत में Uber Eats के बिजनेस को खरीद लिया।

इससे Zomato को Food Delivery के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद मिली।

F. 2021 – Zomato का IPO और शेयर बाजार में एंट्री

साल 2021 Zomato के इतिहास का एक बहुत बड़ा साल था।

Zomato ने जुलाई 2021 में शेयर बाजार में कदम रखा।

कंपनी ने अपना IPO लॉन्च किया।

IPO का आसान मतलब है कि कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम लोगों और निवेशकों को खरीदने के लिए उपलब्ध कराती है।

Zomato की शेयर बाजार में एंट्री को लोगों ने बहुत पसंद किया।

कंपनी के शेयरों को लेकर निवेशकों में काफी उत्साह था।

Zomato की लिस्टिंग के बाद कंपनी की बाजार कीमत तेजी से बढ़ी और कुछ समय के लिए कंपनी की Market Value ₹1 लाख करोड़ से ऊपर चली गई।

यह भारतीय Startup दुनिया के लिए भी एक बड़ा पल था।

एक ऐसी कंपनी जो कुछ साल पहले सिर्फ रेस्टोरेंट की जानकारी देने वाली वेबसाइट थी, अब शेयर बाजार में एक बड़ी कंपनी बन चुकी थी।

G. 2022 से 2026 तक – Blinkit और Quick Commerce की कहानी

Zomato की कहानी में अगला बड़ा कदम आया Blinkit के साथ।

Blinkit पहले Grofers के नाम से जाना जाता था।

यह एक ऐसी कंपनी थी जो लोगों तक किराने का सामान और रोजमर्रा की चीजें बहुत कम समय में पहुंचाने की कोशिश करती थी।

साल 2022 में Zomato ने Blinkit को खरीदने का फैसला किया।

इस सौदे की कीमत करीब ₹4,447 करोड़ बताई गई।

शुरुआत में इस फैसले को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए।

लोगों को लग रहा था कि Zomato आखिर Food Delivery के अलावा किराने और दूसरी चीजों की तेज डिलीवरी में इतना पैसा क्यों लगा रही है।

लेकिन समय के साथ Quick Commerce यानी बहुत कम समय में सामान पहुंचाने वाला बिजनेस तेजी से बढ़ने लगा।

Blinkit भी तेजी से आगे बढ़ा।

आज Zomato के बिजनेस में Blinkit की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है और कंपनी के विकास में इसका बड़ा योगदान है।

? Zomato आज पैसे कैसे कमाता है?

बहुत से लोग सोचते हैं कि Zomato सिर्फ खाना पहुंचाकर पैसे कमाता है।

लेकिन असल में Zomato का बिजनेस कई अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ है।

1. Restaurant Commission

जब कोई ग्राहक Zomato के जरिए किसी रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर करता है, तो रेस्टोरेंट को उस ऑर्डर पर Zomato को एक हिस्सा देना पड़ता है।

इसे Commission कहा जाता है।

कमीशन की दर रेस्टोरेंट, समझौते और दूसरी शर्तों के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।

2. Delivery और Platform Fees

जब हम Zomato से खाना ऑर्डर करते हैं, तो हमें कई बार Delivery Fee और Platform Fee जैसी फीस भी देनी पड़ती है।

इन फीस से भी कंपनी को कमाई होती है।

3. Restaurant Advertising

Zomato पर हजारों रेस्टोरेंट मौजूद हैं।

हर रेस्टोरेंट चाहता है कि ग्राहक उसे ज्यादा देखें और उसके यहां ज्यादा ऑर्डर आएं।

इसलिए कई रेस्टोरेंट Zomato पर अपने रेस्टोरेंट या ऑफर को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए पैसे खर्च करते हैं।

यह भी Zomato की कमाई का एक जरिया है।

4. Hyperpure

Zomato का एक और बिजनेस है Hyperpure।

इसके जरिए रेस्टोरेंट्स को जरूरी सामान जैसे सब्जियां, फल, मीट, पनीर और दूसरी चीजें उपलब्ध कराने का काम किया जाता है।

इसका फायदा यह है कि रेस्टोरेंट्स को जरूरी सामान एक ही जगह से मिल सकता है।

इससे Zomato का बिजनेस सिर्फ ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच खाना पहुंचाने तक सीमित नहीं रहता।

5. Blinkit और Quick Commerce

आज Zomato के बिजनेस का एक बहुत बड़ा हिस्सा Quick Commerce से जुड़ा है।

Blinkit के जरिए लोग किराने का सामान, घर की जरूरी चीजें, स्नैक्स, ड्रिंक और कई दूसरी चीजें बहुत कम समय में मंगा सकते हैं।

यही कारण है कि Zomato का बिजनेस अब सिर्फ Food Delivery कंपनी जैसा नहीं रह गया है।

कंपनी अब Food Delivery, Quick Commerce और दूसरी सेवाओं के जरिए एक बड़ा बिजनेस बना चुकी है।

? Zomato vs Swiggy

Zomato और Swiggy दोनों भारत की बड़ी Food Delivery कंपनियां हैं, लेकिन दोनों की शुरुआत अलग तरीके से हुई थी।

Zomato की शुरुआत 2008 में हुई थी, जबकि Swiggy की शुरुआत 2014 में हुई।

Zomato ने शुरुआत रेस्टोरेंट की जानकारी और उनके मेन्यू दिखाने से की थी।

वहीं Swiggy ने शुरुआत से ही Food Delivery पर ज्यादा ध्यान दिया।

आज दोनों कंपनियां Food Delivery के साथ-साथ Quick Commerce के क्षेत्र में भी एक-दूसरे से मुकाबला कर रही हैं।

Zomato के पास Blinkit है, जबकि Swiggy के पास Instamart है।

Zomato के पास Hyperpure जैसी B2B Supply सेवा भी है, जिसके जरिए रेस्टोरेंट्स को सामान उपलब्ध कराया जाता है।

दोनों कंपनियां अब शेयर बाजार में भी लिस्टेड हैं।

? Zomato की कहानी से क्या सीख मिलती है?

Zomato की कहानी सिर्फ एक कंपनी के सफल होने की कहानी नहीं है।

इससे नए बिजनेस शुरू करने वाले लोगों और Entrepreneurs को भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

1. शुरुआत छोटी हो सकती है

Zomato की शुरुआत किसी बहुत बड़े प्लान से नहीं हुई थी।

शुरुआत सिर्फ एक छोटी-सी समस्या से हुई थी।

लोगों को मेन्यू देखने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता था।

दीपिंदर गोयल ने इस समस्या को देखा और उसका एक आसान डिजिटल समाधान बनाया।

इससे सीख मिलती है कि बिजनेस शुरू करने के लिए हमेशा कोई बहुत बड़ा आइडिया होना जरूरी नहीं है।

कभी-कभी किसी छोटी समस्या का अच्छा समाधान भी एक बड़े बिजनेस की शुरुआत बन सकता है।

2. समय के साथ खुद को बदलना जरूरी है

अगर Zomato सिर्फ रेस्टोरेंट की जानकारी देने वाली वेबसाइट बनकर रह जाता, तो शायद आज उसकी कहानी इतनी बड़ी नहीं होती।

कंपनी ने समय के साथ खुद को बदला।

पहले Restaurant Discovery से शुरुआत हुई।

फिर Food Delivery में कदम रखा गया।

इसके बाद Hyperpure और Quick Commerce जैसे दूसरे बिजनेस में भी कंपनी आगे बढ़ी।

इससे सीख मिलती है कि बाजार बदलता रहता है और एक बिजनेस को भी जरूरत के हिसाब से बदलते रहना चाहिए।

3. Customer की जरूरत समझना जरूरी है

Zomato ने सिर्फ यह नहीं देखा कि लोग क्या कर रहे हैं।

उसने यह समझने की कोशिश की कि लोग आगे क्या चाहते हैं।

पहले लोग रेस्टोरेंट की जानकारी चाहते थे।

फिर उन्हें घर पर खाना चाहिए था।

और अब लोग किराने और दूसरी चीजें भी कुछ ही मिनटों में घर पर चाहते हैं।

जो कंपनी लोगों की बदलती जरूरत को जल्दी समझ लेती है, उसके आगे बढ़ने के मौके ज्यादा होते हैं।

4. Marketing भी बहुत जरूरी है

Zomato सिर्फ अपने ऐप और डिलीवरी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मजेदार Marketing के लिए भी काफी जाना जाता है।

कंपनी के मजेदार Push Notifications, Social Media Posts और अलग तरह के विज्ञापन लोगों का ध्यान खींचते हैं।

कई बार Zomato ऐसे मजेदार मैसेज भेजता है जिन्हें देखकर लोग हंसते हैं और कंपनी को याद रखते हैं।

यानी Marketing सिर्फ सामान बेचने का तरीका नहीं है।

अच्छी Marketing लोगों के दिमाग में कंपनी की एक अलग पहचान बना सकती है।

? Zomato की कहानी का सबसे बड़ा सबक

Zomato की पूरी कहानी को अगर एक लाइन में समझें, तो यह एक छोटी समस्या से शुरू होकर लगातार बदलते और आगे बढ़ते रहने की कहानी है।

साल 2008 में दो लोगों ने अपने ऑफिस की एक छोटी-सी परेशानी देखी।

उन्होंने उसका एक आसान समाधान बनाया।

उस समाधान ने Foodiebay को जन्म दिया।

Foodiebay आगे चलकर Zomato बना।

Zomato ने रेस्टोरेंट की जानकारी देने से शुरुआत की।

फिर Food Delivery में आया।

कोरोना जैसी मुश्किल स्थिति का सामना किया।

Uber Eats के बिजनेस को खरीदा।

2021 में शेयर बाजार में पहुंचा।

फिर Blinkit को खरीदा और Quick Commerce की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ा।

आज Zomato सिर्फ एक ऐसा ऐप नहीं है जिससे हम खाना ऑर्डर करते हैं।

यह एक बहुत बड़ा बिजनेस बन चुका है, जिसके अंदर Food Delivery, Quick Commerce, Restaurant Supply और कई दूसरी सेवाएं शामिल हैं।

और शायद Zomato की कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है-

बड़ा बिजनेस हमेशा बड़े आइडिया से शुरू हो, यह जरूरी नहीं है।

कभी-कभी एक छोटी-सी समस्या को ध्यान से देखना, उसका सही समाधान निकालना और समय के साथ खुद को बदलते रहना ही एक छोटे आइडिया को बहुत बड़ी कंपनी बना सकता है।

FAQ

+ kya hame kabhi haar manni chahiye

nhi agar ham haar na mane toh sab kuch ho sakta h
vanshika pal

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My name is vanshika pal and i am from bastam. I study in class 10.My father name is mr.vinod kumar .My Hobby is reading stories book and listening song ,travelling and gardening .I like helping others. 




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