भारत का संविधान लिखित, निर्मित तथा विशाल है मूल रूप से इसके चार भाग हैं -(1) प्रस्तावना (2) अनुच्छेद (3) अनुसूचियां एवं (4 ) परिशिष्ट निर्माण के समय इसमें 22 भागों में विभाजित 395 अनुच्छेद एवं 8 अनुसूचियां एवं चार परिशिष्ट थे जबकि वर्तमान में इसमें 25 भागों में विभाजित 465 अनुच्छेद एवं 12 अनुसूचियां एवं 5 परिशिष्ट है प्रत्येक संवैधानिक संशोधन के साथ इसके स्वरूप का विकास होता रहता है अपनी प्रस्तावना के अनुकूल या संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना करता है साथी यह न्याय, स्वतंत्रता, सामान्य तथा बुद्ध तत्व के लक्ष्य को 20 स्वीकार करता है भारतीय संविधान में शासन की संसदीय प्रणाली की स्थापना की गई, परंतु साथी अध्यक्षा त्मक प्रणाली के विशिष्ट तत्वों को भी स्वीकार किया गया याद्दापि यह है एका त्मक तत्वों से युक्त है तथा अपनी संगीत शासन की व्यवस्था करता है उसकी एक माहिती विशेषता धर्म निरपेक्ष राज्य की स्थापना है एक और इसमें जहां नागरिक को के लिए वाया कब मौलिक अधिकारों का उल्लेख है वहीं दूसरी ओर यह राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की भी व्यवस्था करता है संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार लोकसभा तथा राज्य विधान मंडलों के सदस्य का निवचनायक मताधिकार के आधार पर किया जाएगा वर्तमान में भारत में मतदान की आयु 18 वर्ष है संविधान में संशोधन का अधिकार संसद को प्राप्त है?
भारतीय संविधान के मूल आदर्श
भारतीय संविधान के पीछे जो दर्शन कार्य कर रहा था, इस से इसके मूल आदर्श स्पष्ट हो जाते हैं भारतीय संविधान के मूल आदर्श निम्नलिखित है -
1 भारतीय संविधान का मूल आदर्श होगा राष्ट्र के निर्माण में निधन से निर्धन व्यक्ति की भूमिका तथा सत्ता सत्ता में उसकी भागीदारी
2 भारतीय संविधान का मूल आदर्श छुआछूत, नशीले पदार्थों का उन्मूलन तथा स्त्रियों को पुरुष के समान अधिकारों में सम्मानित होगा
3 यह डॉक्टर भीमराव के सपने, भेदभाव और असमानता से मुक्त भारत के निर्माण के आदर्श का पोषक होगा
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