गर्मी, चोट, रक्त नलिका के फटने या रक्त की न्यूनता के कारण से रक्त बहने को नकसीर फूटना कहते हैं ऐसी अवस्था में रोगी को तुरंत खुली ताजी हवा मे गर्दन को पीछे झुका कर सीधा कुर्सी या चौकी पर बैठा देना चाहिए उसके वस्त्रो को ढीला करके, उसे मुंह द्वारा सांस लेने को कहा जाए तत्पश्चात नाक से ऊपर तथा गर्दन पर बर्फ की थिली से सिकाई करनी चाहिए उसके पैरों को गर्म पानी में रखना चाहिए वह चूसने के लिए बर्फदेनी चाहिए रोगी को बिना हिलाए - डुलाए उसकी नाक को अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर लगभग 5 मिनट तक दबाना चाहिए नकसीर के बंद न होने पर कुछ और देर नाक दवाए या ना के अंदर हुई भर दे.
रोगी को धैर्य एवं सानत्वना देते रहना चाहिए और नाक साफ नहीं करने देना चाहिए सब प्रयासों के भी फल होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए!
(दम घुटना)
धुएं, कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य विषैली गैसो से युक्त हवा में सांस लेने, डूबने, फांसी लगाने आदि कारणो से दम घुटने लगता है
विषैली हवा में सांस लेने से दम घुटने पर व्यक्ति को तुरंत खुली ताजी हवा में लिटा देना चाहिए उसकी पंखे से हवा करें और और उसके आसपास भीड इकट्टी ना होने दे.
डूबने से दम घुटने पर व्यक्ति को पानी से बाहर निकाल कर उल्टा लिटा चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए और पेट का पानी निकाल देना चाहिए फिर गले वस्तु उतार कर उसे कंबल मैं लपेट देना चाहिए तब कृतिम विधि से उसे सांस देना चाहिए उसे पीने के लिए चाय, कॉफी या दूध देना चाहिए.
फांसी लगने से दम घुटने पर व्यक्ति को थोड़ा ऊपर उठकर उसके गर्दन से रस्सी का फंदा निकला ना चाहिए फिर उसे लिटाकर कीतम विधि से सांस देना चाहिए.
उपरोक्त प्राथमिक चिकित्सा के पश्चात डॉक्टर से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिए!
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