कर्तव्य
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सुंदर नगर कस्बे का प्रकृति ने बहुत ही खूबसूरती से श्रृंगार किया है। चहुँ और हरियाली पेड़ पौधे कस्बे से बहती व्यास नदी ; झील का सुनहरा नजर। दिन में ढोल धौलाधार पर्वत की पहाड़ियों में चमकते बर्फ ऐसे प्रतीत होती है, जैसे रात के समय पहाड़ियों पर रंगीन दीप सजा रहते हो।
पश्चिम दिशा की ओर ऊपर पहाड़ी पर मुरारी माता के मंदिर के नीचे एक ठीक ढलान पर कुदरत की गोद मैं बसा एक गांव हलयातर। गांव गांव के सभी निवास जिम्मेदारी से जुड़े थे और ज्यादातर धरती के सीने पर हाल चला अपनी गुर्जर- बसर करता। विक्रम के पारिवार मे दादा दादी, मम्मी- पापा और बडी बहन काव्या थे। विक्रम अपने पिता रामू के साथ खेतो मे बुआई और कटाई के कामो मे मदद करता। स्कूल से छुट्टी के बाद गांव घर में अपने दोस्तों के साथ मौज मस्ती करें, शाम को जब घर की दहलीज लगी लगी तो मां की आवाज उसके कानों में पड़ी जो चूल्हे पर मक्खी की रोटी सेक रही थी.
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Mahi Korav
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