श्वसन तंत्र हमारे शरीर का वह महत्वपूर्ण सिस्टम है जो हमें जीवित रहने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करता है और कार्बन डाइऑक्साइड निकालता है। हम हर दिन लगभग 20,000 बार सांस लेते हैं, और यह प्रक्रिया बिल्कुल नियमित और स्वचालित रूप से चलती रहती है। यह तंत्र फेफड़ों, श्वास नलिकाओं, डायफ्राम और कई जटिल अंगों का समूह है जो एक साथ मिलकर शरीर में गैसों का आदान–प्रदान करते हैं।
2.श्वसनतंत्रक्याहै?
श्वसन तंत्र वह प्रणाली है जो हवा को शरीर में प्रवेश कराती है, ऑक्सीजन को रक्त में पहुंचाती है, और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालती है। यह पूरी प्रक्रिया Respiration कहलाती है। इसके बिना जीवन संभव नहीं है क्योंकि कोशिकाओं को ऊर्जा बनाने के लिए ऑक्सीजन चाहिए।
3.श्वसनतंत्रकामुख्यउद्देश्य
इस तंत्र का सबसे बड़ा कार्य शरीर को ऑक्सीजन की आपूर्ति करना है। इसके अलावा यह शरीर से हानिकारक गैसें निकालने, शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और हमें बोलने या आवाज निकालने में भी मदद करता है।
4.नाक–श्वसनकापहलाद्वार
नाक वह हिस्सा है जहां से श्वास लेना शुरू होता है। नाक के अंदर छोटे-छोटे बाल और श्लेष्मा हवा को साफ, नम और गर्म करते हैं, जिससे फेफड़ों तक केवल सुरक्षित हवा ही पहुंचती है।
5.नासिकागुहाकीभूमिका
नाक के पीछे नासिका गुहा होती है जो हवा को और अधिक शुद्ध करती है। यहाँ हवा के तापमान को नियंत्रित किया जाता है और धूल के कणों को रोका जाता है।
6. ग्रसनी
यह नाक और मुंह के पीछे का हिस्सा है जो हवा और भोजन दोनों को आगे ले जाता है। श्वसन तंत्र में यह हवा को लैरिंक्स तक पहुंचाता है।
7. कंठनली
कंठनली या आवाज की नली, ना केवल हवा को फेफड़ों तक पहुंचाती है बल्कि हमें आवाज निकालने में भी मदद करती है। यह स्वर-तंतुओं का केंद्र है।
8. श्वासनली
ट्रेकिया यानी श्वासनली एक मजबूत नली है जो हवा को फेफड़ों तक ले जाती है। इसकी दीवारें C-आकार की उपास्थियों से बनी होती हैं जिससे यह हमेशा खुली रहती है।
9. ब्रोंकस – श्वासनली का विभाजन
श्वासनली नीचे जाकर दो हिस्सों में बंट जाती है जिन्हें ब्रोंकस कहते हैं। एक दायीं तरफ के फेफड़े में जाता है और दूसरा बायीं तरफ के फेफड़े में।
10. ब्रोंकिओल्स
ब्रोंकस आगे छोटे-छोटे महीन नलिकाओं में बदलते हैं जिन्हें ब्रोंकिओल्स कहते हैं। ये फेफड़ों के अंदर हवा को हर हिस्से तक पहुंचाती हैं।
11. एल्विओलाइ – गैस विनिमय का केंद्र
एल्विओलाइ छोटे-छोटे थैलीनुमा ढांचे होते हैं जहां ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है। यही वह स्थान है जहां जीवन की प्रक्रिया वास्तव में होती है।
12. फेफड़े
फेफड़े श्वसन तंत्र का सबसे बड़ा अंग हैं। इनमें लाखों एल्विओलाइ होते हैं। दायां फेफड़ा बड़ा होता है और तीन लोब में बंटा होता है जबकि बायां फेफड़ा दो लोब में।
13. डायफ्राम - श्वास का मुख्य मांसपेशी
डायफ्राम एक गुंबद के आकार की मांसपेशी है जो सांस लेने और छोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह फैलकर हवा को अंदर खींचता है और सिकुड़कर हवा बाहर निकालता है।
14. श्वसन की प्रक्रिया – श्वास और प्रश्वास
श्वसन की दो मुख्य प्रक्रियाएँ हैं -
श्वास: हवा का अंदर जाना
प्रश्वास: हवा का बाहर निकलना
दोनों मिलकर जीवन को चलाती हैं।
15.श्वसनऔररक्तसंचारकासंबंध
श्वसन तंत्र और रक्त संचार प्रणाली मिलकर काम करते हैं। फेफड़ों में मौजूद एल्विओलाइ में रक्त वाहिकाएँ होती हैं जो ऑक्सीजन को अवशोषित कर पूरे शरीर तक पहुंचाती हैं।
16.श्वसनतंत्रकेसामान्यरोग
अस्थमा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस, टीबी, एलर्जी आदि प्रमुख रोग हैं। ये हवा में मौजूद धूल, धुआं, वायरस या बैक्टीरिया के कारण हो सकते हैं।
17.प्रदूषणकाश्वसनतंत्रपरप्रभाव
वायु प्रदूषण श्वसन तंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। धुआं, वाहन का धुआं, फैक्ट्री का प्रदूषण फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
18.स्वस्थश्वसनतंत्रकेलिएउपाय
ताजी हवा में सांस लेना, योग और प्राणायाम करना, धूम्रपान से दूर रहना, घर को साफ रखना और पौष्टिक भोजन लेना श्वसन तंत्र को मजबूत बनाते हैं।
19.योगऔरप्राणायामकीभूमिका
अनुलोम-विलोम, कपालभाति, भस्त्रिका जैसे प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं और हवा के प्रवाह को बेहतर बनाते हैं।
20.निष्कर्ष
श्वसन तंत्र हमारे जीवन का आधार है। इसकी कार्यप्रणाली जितनी सरल लगती है, उतनी ही जटिल और अद्भुत है। इसे स्वस्थ रखना हमारे लिए सबसे जरूरी है क्योंकि स्वस्थ श्वसन तंत्र ही स्वस्थ जीवन की नींव है।
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