मास्टर वेबसाइट ऑडिट: हर पैरामीटर का गहरा और तकनीकी विश्लेषण

꧁ Digital Diary ༒Largest Writing Community༒꧂

Content loading...

Digital Diary Create a free account





वेबसाइट ऑडिट किसी इंसान की "Full Body Checkup" जैसा होता है। डॉक्टर शरीर के हर हिस्से को चेक करता है, वैसे ही हमें वेबसाइट के हर कोड, हर इमेज और हर लिंक को चेक करना होता है। आइए, आपकी लिस्ट के हर पॉइंट को बारीकी से समझते हैं।

⚡ A. SPEED & CORE WEB VITALS (गति और मुख्य वेब वाइटल्स)
स्पीड SEO की जान है। Google ने साफ कर दिया है कि स्लो वेबसाइट को रैंक नहीं मिलेगी।

TTFB (Time to First Byte): यह वह समय है जो उपयोगकर्ता (User) ब्राउज़र में URL डालने के बाद और सर्वर से पहला बाइट (डेटा का पहला टुकड़ा) मिलने में लगता है। यह सर्वर की प्रतिक्रिया क्षमता (Server Response Capability) दिखाता है। अगर यह 200ms से कम है, तो बेहतर है। इसका मतलब सर्वर तेज़ है या फिर DNS ठीक से काम नहीं कर रहा।
DNS Lookup Time: DNS (Domain Name System) इंटरनेट का फोन बुक है। जब आप google.com टाइप करते हैं, तो DNS को उसका IP पता ढूंढना पड़ता है। यह "Lookup" जितनी जल्दी होगी, साइट उतनी जल्दी खुलेगी। धीमा DNS मतलब यूज़र को इंतज़ार करवाना।
SSL Handshake Time: जब ब्राउज़र और सर्वर सुरक्षित कनेक्शन (HTTPS) बनाते हैं, तो वे एक-दूसरे को पहचानने के लिए "हैंडशेक" करते हैं। यह प्रोसेस सर्टिफिकेट चेक करती है। अगर SSL कॉन्फ़िगरेशन गलत है या सर्वर दूर है, तो यह समय बढ़ जाता है और पेज लोड होने में देरी होती है।
Server Response Time: सर्वर कितनी जल्दी रिक्वेस्ट (Request) प्रोसेस करके डेटा भेजता है। भारी डेटाबेस क्वेरीज़ (Heavy Database Queries), बुरी कोडिंग या कम रैम (RAM) वाला सर्वर इसे धीमा कर देते हैं।
HTML Document Size: आपके पेज का मुख्य HTML कोड कितना बड़ा है? अगर यह 100KB से ज्यादा है, तो इसे डाउनलोड होने में समय लगेगा। इसे कम करने के लिए कोड में से अनावश्यक टिप्पणियां (Comments) और स्पेस हटा देने चाहिए (Minification)।
Total Page Weight: पेज पर लोड होने वाली हर चीज़-इमेज, CSS, JS, फॉन्ट्स-का कुल वजन। भारी पेज (जैसे 3MB से ज्यादा) मोबाइल पर बहुत धीमे चलते हैं और यूज़र का डेटा खर्च करते हैं। आदर्श वजन 1MB से कम रखना चाहिए।
Total Requests: ब्राउज़र एक पेज लोड करने के लिए सर्वर को कितनी बार "डेटा भेजो" कहता है? हर इमेज, हर CSS फाइल एक अलग रिक्वेस्ट होती है। बहुत ज्यादा रिक्वेस्ट्स (100+) पेज को स्लो बनाती हैं। इन्हें कम करने के लिए फाइलों को मर्ज (Merge) किया जाता है।
Largest Contentful Paint (LCP): यह वह पल है जब पेज का सबसे बड़ा कंटेंट (आमतौर पर हीरो इमेज या बड़ी हेडिंग) यूज़र को दिखाई देना शुरू होता है। Google चाहता है कि यह 2.5 सेकंड के अंदर हो जाए। यह "Loading Performance" का मुख्य मेट्रिक है।
Interaction to Next Paint (INP): यह एक नया और महत्वपूर्ण मेट्रिक है। जब यूज़र पेज पर क्लिक करे, टाइप करे या स्क्रॉल करे, तो साइट कितनी जल्दी रिएक्ट करती है? अगर साइट हैंग हो जाती है या देर से रिस्पॉन्ड करती है, तो INP खराब होगा। अच्छा INP 200ms से कम होना चाहिए।
Cumulative Layout Shift (CLS): क्या आपने कभी पढ़ते समय किसी बटन को दबाने गए और अचानक कंटेंट शिफ्ट होकर बटन ऊपर चला गया? यही CLS है। इसे "Visual Stability" कहते हैं। स्कोर 0.1 से कम होना चाहिए। इसे ठीक करने के लिए इमेज और विज्ञापनों के लिए जगह (width/height) रिज़र्व रखनी पड़ती है।
First Contentful Paint (FCP): पेज पर पहला कंटेंट (टेक्स्ट या इमेज) दिखने में कितना वक्त लगा? यह यूज़र को पहला रिअश्योरेंस (Assurance) देता है कि साइट काम कर रही है।
Time to Interactive (TTI): पेज तो लोड हो गया, पर यूज़र असल में कब तक क्लिक या टाइप कर पाएगा? जब JavaScript (JS) पूरी तरह एग्जीक्यूट (Execute) हो जाए, तब TTI होता है।
Long Tasks: ब्राउज़र का मेन थ्रेड (Main Thread) वह जगह है जहाँ पेज पेंट (Paint) होता है। अगर वहाँ बहुत लंबे टास्क (50ms से ज्यादा) चल रहे हैं, तो पेज फ्रीज़ हो सकता है। इन्हें तोड़कर (Code Splitting) कम करना पड़ता है।
Render Blocking Resources: क्या CSS या JS फाइल्स ऐसी हैं जो पेज के दिखने (Render) को रोक रही हैं? ब्राउज़र कहता है, "पहले यह फाइल डाउनलोड हो, तभी मैं पेज दिखाऊंगा।" क्रिटिकल CSS को अलग करो और बाकी फाइल्स को बाद में लोड करो।
Critical CSS Present: स्क्रीन पर जो हिस्सा सबसे पहले दिखता है (Above the Fold), उसके लिए अलग से छोटा CSS बनाओ ताकि पेज तुरंत दिखे।
JS Execution Time: जावास्क्रिप्ट कितनी देर तक चलती है? भारी JS फ्रेमवर्क (React/Angular) को ऑप्टिमाइज़ करना ज़रूरी है ताकि CPU पर लोड न पड़े।
Unused JS / CSS: आपके कोड में वह हिस्सा जो इस्तेमाल ही नहीं हो रहा, उसे हटा दो। क्योंकि वह बीच में बैंडविड्थ खा रहा है।
Font Loading Strategy: फॉन्ट्स लोड होने से पहले टेक्स्ट अदृश्य हो जाता है (FOUT) या खाली जगह दिखती है (FOIT)। font-display: swap का इस्तेमाल करो ताकि टेक्स्ट पहले दिखे, फॉन्ट बाद में आए।
Lazy Loading Images/Iframes: इमेजेज तभी लोड होनी चाहिए जब यूज़र उनके पास स्क्रॉल करे। नीचे की इमेजेज लोड होने की ज़रूरत शुरू में नहीं होती।
Preload Key Resources: इंपोर्टेंट फॉन्ट्स या हीरो सेक्शन की इमेज को <link rel="preload"> से पहले भेजो ताकि कोई देरी न हो।
Prefetch / Preconnect: preconnect से ब्राउज़र सर्वर से पहले ही कनेक्शन बनाने की कोशिश करता है। prefetch से वो रिसोर्सेज जो फ्यूचर में चाहिए (जैसे नेक्स्ट पेज) वो पहले ही डाउनलोड हो जाते हैं।
Brotli / Gzip: ये कंप्रेशन एल्गोरिदम हैं। सर्वर से डेटा भेजने से पहले उसे कंप्रेस कर दो। ब्रोटली (Brotli), गज़िप (Gzip) से भी बेहतर कंप्रेशन देता है।
HTTP/2 or HTTP/3: पुराना HTTP/1.1 एक बार में एक ही फाइल मांग सकता था। HTTP/2 और 3 पैरलल रिक्वेस्ट्स हैंडल कर सकते हैं, जो स्पीड को बूस्ट करता है।
CDN Present: कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) आपकी वेबसाइट की कॉपी को दुनिया भर के सर्वर्स में स्टोर करता है। यूज़र जो सर्वर से सबसे करीब होता है, उसे डेटा मिलता है, जिससे स्पीड बढ़ती है।
Image Compression: इमेज को टूल से कंप्रेस करो (क्वालिटी थोड़ी कम करके) बिना क्वालिटी लॉस के। WebP या AVIF फॉर्मेट इस्तेमाल करो।
Next-gen image format (webp/avif): पुराने JPEG/PNG की तुलना में WebP और AVIF फॉर्मेट बहुत हल्के (Lightweight) होते हैं पर क्वालिटी वही रहती है।
?️ B. META / HEAD TAGS (मेटा टैग्स)
ये वो टैग्स हैं जो यूज़र को पेज पर डायरेक्ट दिखते नहीं हैं, लेकिन Google के लिए पेज की "पहचान" होते हैं। ये <head> सेक्शन में होते हैं।

<title> Present: पेज का सबसे महत्वपूर्ण टैग। यह ब्राउज़र के टैब पर और Google सर्च रिजल्ट्स में ब्लू कलर में लिखा होता है। बिना इसके पेज 'बेगुनाह' है।
Title Length: Google टाइटल के 60-70 अक्षर (characters) ही दिखाता है। इससे ज्यादा लंबा हो तो वो "..." (dots) में कन्वर्ट हो जाता है। बेस्ट लेंथ 50-60 अक्षर रखें।
Keyword Placement in Title: आपका मुख्य कीवर्ड (Focus Keyword) टाइटल के शुरू में होना चाहिए। Google के लिए वो वर्ड सबसे इंपोर्टेंट होता है जो पहले आता है।
Brand in Title: टाइटल के एंड में अपने ब्रांड का नाम होना चाहिए (जैसे: "SEO Tips | MeriWebsite")। इससे CTR (Click Through Rate) बढ़ता है क्योंकि यूज़र ब्रांड पर भरोसा करता है।
Duplicate Title: हर वेबपेज का टाइटल अलग होना चाहिए। अगर 10 पेज का टाइटल सेम है, तो Google कन्फ्यूज़ हो जाता है कि कौन सा पेज रैंक करे। इससे "Cannibalization" प्रॉब्लम होती है।
Dynamic Title Template: CMS (जैसे WordPress) में ऐसी सेटिंग होनी चाहिए कि टाइटल ऑटोमैटिकली बन जाए (उदाहरण: %%PostTitle%% | %%SiteName%%)। इससे मैनुअल गलतियां नहीं होतीं।
<meta description> Present: यह टाइटल के नीचे वाली 2-3 लाइन की कहानी है। Google डायरेक्ट रैंक के लिए इसे यूज़ नहीं करता, लेकिन यूज़र को क्लिक करवाने के लिए ये सबसे ज़रूरी है।
Meta Description Length: इसकी बेस्ट लेंथ 150-160 अक्षर होती है। इससे कम हो तो बात पूरी नहीं होती, ज्यादा हो तो कट जाती है।
CTA in Description: डिस्क्रिप्शन में 'Call to Action' होना चाहिए, जैसे "अभी जानें", "पूरा पढ़ें", "Buy Now"। यह यूज़र को क्लिक करने पर मजबूर करता है।
Duplicate Description: हर पेज की डिस्क्रिप्शन अलग होनी चाहिए। डुप्लिकेट डिस्क्रिप्शन Google के लिए "Low Quality" सिग्नल है।
Robots Meta: यह टैग ब्राउज़र को बताता है कि पेज को क्रॉल करना है या नहीं। <meta name="robots" content="noindex, nofollow"> का मतलब है कि Google इस पेज को अपने डेटाबेस में मत डालो।
Googlebot Meta: खास तौर पर Google के क्रॉलर के लिए इंस्ट्रक्शन्स। जब आप चाहते हैं कि दूसरे बॉट्स (like Bing) क्रॉल करें लेकिन Google न करे, तब यूज़ होता है।
Viewport Meta: <meta name="viewport"...> यह टैग मोबाइल रिस्पॉन्सिवनेस के लिए जान-बूझकर ज़रूरी है। इसके बिना पेज मोबाइल पर बहुत छोटा दिखता है।
Charset Meta: इससे ब्राउज़र को पता चलता है कि पेज की एन्कोडिंग क्या है (आमतौर पर UTF-8)। अगर यह नहीं होगा तो स्पेशल कैरेक्टर्स (like @, ₹) गलत दिखेंगे।
Theme-color Meta: मोबाइल ब्राउज़र पर एड्रेस बार का कलर सेट करने के लिए। यह ब्रांडिंग के लिए अच्छा होता है।
? C. OG / SOCIAL / SHARE TAGS (सोशल मीडिया उपस्थिति)
जब कोई आपकी वेबसाइट का लिंक Facebook, Twitter, या LinkedIn पर शेयर करता है, तो वो लिंक कैसा दिखेगा, ये ये टैग्स डिसाइड करते हैं। इसे Open Graph (OG) प्रोटोकॉल कहते हैं।

og:title: सोशल मीडिया पर लिंक के साथ जो टाइटल दिखेगा, वो <title> से अलग भी हो सकता है। इसमें ब्रांड का नाम यूज़ कर सकते हैं।
og:description: सोशल कार्ड पर जो समरी दिखेगा। यह इंट्रेस्टिंग होना चाहिए ताकि लोग क्लिक करें।
og:image: शेयर्ड लिंक के साथ जो फोटो दिखेगी। इसका साइज़ (1200x630 px) होना चाहिए, नहीं तो इमेज ब्लर या कट दिखेगी।
og:image size: इमेज का डाइमेंशन सही होना चाहिए। Facebook अक्सर 1200x630 पसंद करता है।
og:url: उस पेज का कैनॉनिकल (मुख्य) URL जो शेयर हो रहा है। इससे कन्फ्यूजन खत्म होता है।
og:type: बताता है कि कंटेंट क्या है-जैसे article, website, या video।
og:site_name: आपकी वेबसाइट का नाम (जैसे "Amazon")।
twitter:card: ट्विटर (अब X) पर लिंक कैसा दिखेगा-बड़ा इमेज के साथ (Summary Card with Large Image) या छोटा।
twitter:title/image/description: ये OG टैग्स जैसे ही हैं, लेकिन सिर्फ ट्विटर के लिए खास।
facebook app id: अगर आप Facebook के लिए कोई खास एनालिटिक्स या इंसाइट्स चाहते हैं, तो आपको App ID डालनी पड़ती है।
? D. HTML STRUCTURE (एचटीएमएल संरचना)
यह वेबसाइट का कंकाल (Skeleton) है। अगर कंकाल मजबूत नहीं है, तो बॉडी (कंटेंट) नहीं टिकेगी।

One H1 only: पेज पर सिर्फ एक ही H1 (हेडिंग 1) होना चाहिए। यह किताब का नाम है। कई H1 होने से Google कन्फ्यूज़ हो जाता है कि मुख्य टॉपिक क्या है।
H1 relevance: H1 में वही कीवर्ड होना चाहिए जो यूज़र सर्च कर रहा है। यह पेज का मुख्य विषय बताता है।
Logical H1-H6 order: हेडिंग्स का क्रम तार्किक (Logical) होना चाहिए। H1 के बाद H2, फिर H3। सीधे H1 के बाद H4 लाना गलत है। यह एक रूपरेखा (Outline) बनाता है।
Section usage: <section> टैग का इस्तेमाल करके कंटेंट को थीम के अनुसार अलग-अलग हिस्सों में बांटना चाहिए।
Article usage: <article> टैग स्वतंत्र कंटेंट (जैसे ब्लॉग पोस्ट) के लिए होता है। यह बताता है कि यह कंटेंट अलग से खड़ा हो सकता है।
Nav usage: <nav> टैग मेनू या नेविगेशन लिंक्स के लिए होता है। यह स्क्रीन रीडर्स (Screen Readers) को मदद करता है।
Main tag usage: <main> टैग बताता है कि पेज का मुख्य कंटेंट कहाँ है (हेडर और फूटर को छोड़कर)।
Header/footer semantic: <header> और <footer> का सही इस्तेमाल करना सिमैंटिक (अर्थपूर्ण) कोडिंग है।
ARIA roles: जहाँ HTML टैग्स पर्याप्त नहीं होते, वहां "Accessible Rich Internet Applications" (ARIA) रोल्स डालकर नेविगेशन को आसान बनाते हैं, खासकर विकलांग यूज़र्स के लिए।
Skip to content link: यह एक लिंक होता है जो मोबाइल या कीबोर्ड यूज़र्स को सीधे मुख्य कंटेंट पर ले जाता है, मेनू में भटकने से बचाता है।
?️ E. IMAGE & MEDIA SEO (इमेज और मीडिया एसईओ)
Google देख नहीं सकता, वो सिर्फ पढ़ सकता है। इमेज को पढ़ने लायक बनाना ज़रूरी है।

Image alt present: Alt (Alternative) टेक्स्ट वह विवरण है जो ब्राउज़र को बताता है कि इमेज में क्या है, अगर इमेज लोड न हो। यह SEO के लिए क्रूशियल है।
Descriptive alt: "Image123.jpg" लिखने के बजाय "लाल रंग की रॉयल एनफील्ड बाइक" जैसा विवरण लिखें।
File name descriptive: फाइल का नाम भी मायने रखता है। DSC001.jpg की जगह best-shoes-for-men.jpg रखें।
Width / height attribute: इमेज की चौड़ाई और ऊंचाई कोड में डालने से ब्राउज़र उसके लिए जगह रिज़र्व कर लेता है, जिससे Layout Shift (CLS) नहीं होता।
Lazy load: (ऊपर समझाया जा चुका है)। इमेज तभी लोड हो जब ज़रूरत हो।
Image size vs container: अगर आप 2000px की इमेज को 500px के बॉक्स में दिखा रहे हैं, तो यह बेकार की बैंडविड्थ बर्बाद कर रहा है। इमेज को कंटेनर के साइज़ के बराबर ही रखें।
EXIF stripped: इमेज से मेटाडेटा (कैमरा मॉडल, लोकेशन, शूट टाइम) हटा दें। यह फाइल का साइज़ बढ़ाता है और प्राइवेसी का भी मुद्दा हो सकता है।
Responsive images (srcset): srcset एट्रिब्यूट से ब्राउज़र को अलग-अलग साइज़ की इमेजेज ऑफर की जाती हैं। मोबाइल को छोटी इमेज मिलेगी, डेस्कटॉप को बड़ी।
Video schema: वीडियो पर स्कीमा मार्कअप लगाने से Google सर्च में वीडियो का थंबनेल और टाइमिंग दिख सकता है।
Video transcript: वीडियो का पूरा टेक्स्ट (Transcript) पेज पर होना चाहिए। इससे Google को पूरा कंटेंट समझ में आता है।
Audio transcript: ऑडियो फाइल्स (पॉडकास्ट) के लिए भी टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्ट ज़रूरी है।
? F. LINKS (आंतरिक और बाहरी लिंक्स)
लिंक्स वेब की सड़कें हैं। अगर सड़कें टूटी हैं तो कोई नहीं पहुंच पाएगा।

Total internal links: अपनी साइट के पेज आपस में कितने जुड़े हैं? ज्यादा लिंक्स मतलब बेहतर क्रॉलिंग और यूज़र एक्सपीरियंस।
Contextual internal links: जो लिंक कंटेंट के बीच में, संदर्भ के साथ आते हैं, वो सबसे शक्तिशाली होते हैं।
Footer links: फूटर में लगाए गए लिंक्स कम महत्वपूर्ण माने जाते हैं, लेकिन नेविगेशन के लिए ज़रूरी हैं।
Sidebar links: साइडबार के लिंक्स हर पेज पर रिपीट होते हैं, इसलिए उनका वैल्यू कम होता जाता है।
Orphan pages: वो पेज जिन पर कोई आंतरिक लिंक नहीं है। Google और यूज़र ऐसे पेज पर कैसे पहुंचेंगे? इन्हें जोड़ना ज़रूरी है।
Broken internal links: जो लिंक "404 Not Found" एरर देते हैं। यह यूज़र एक्सपीरियंस खराब करते हैं और "Link Juice" बर्बाद करते हैं।
Broken external links: अगर आपने किसी दूसरी साइट का लिंक दिया है और वो साइट बंद हो गई, तो यह आपकी साइट की गुणवत्ता घटाता है।
Redirect chains: अगर लिंक A -> B -> C -> D पर जाता है, तो यह "Redirect Chain" है। इसे सीधे A -> D करना चाहिए। हर रीडायरेक्ट स्पीड कम करता है।
Nofollow / sponsored: जब आप किसी पेड लिंक या अनट्रस्टेड साइट को लिंक करते हैं, तो rel="nofollow" या rel="sponsored" लगाकर बताते हैं कि Google मुझे इसके लिए क्रेडिट मत दो।
External authority links: अगर आप उच्च अधिकार (High Authority) वाली साइट्स (जैसे Wikipedia, Govt sites) को लिंक करते हैं, तो Google आपकी साइट पर भरोसा करता है।
Anchor diversity: लिंक पर लिखा टेक्स्ट (Anchor Text) हमेशा एक जैसा नहीं होना चाहिए। कभी "यहाँ क्लिक करें", कभी "बेस्ट शूज़", कभी ब्रांड नाम।
Keyword stuffing anchors: हर जगह अपना मुख्य कीवर्ड लिंक में डालना "स्पैम" है। इससे बचना चाहिए।
?️ G. CRAWLING & INDEXING (क्रॉलिंग और इंडेक्सिंग)
Google आपकी साइट कैसे खोजता है और अपने डेटाबेस में कैसे रखता है?

robots.txt present: robots.txt एक फाइल है जो बॉट्स को बताती है कि कौन से पेज देखने हैं और कौन से नहीं। यह "Do Not Enter" का बोर्ड है।
robots.txt valid: अगर फाइल में सिंटैक्स एरर है, तो बॉट्स इसे नजरअंदाज कर सकते हैं या गलत पेज ब्लॉक कर सकते हैं।
sitemap.xml present: साइटमैप आपकी साइट का "नक्शा" है जो Google को दिया जाता है ताकि वो सभी पेजों को आसानी से ढूंढ सके।
sitemap index: अगर साइट बहुत बड़ी है, तो आप कई साइटमैप बना सकते हैं और उन्हें एक 'इंडेक्स' फाइल में लिंक कर सकते हैं।
image sitemap: खास तौर पर इमेज के लिए अलग साइटमैप, ताकि Google Images में रैंक मिले।
video sitemap: वीडियो के लिए अलग साइटमैप जिसमें थंबनेल और डिस्क्रिप्शन हो।
lastmod in sitemap: यह बताता है कि पेज आखिरी बार कब अपडेट हुआ था। फ्रेश कंटेंट क्रॉल करने के लिए यह ज़रूरी है।
canonical present: कैनॉनिकल टैग बताता है कि "यह पेज ओरिजिनल है"। अगर एक ही कंटेंट दो URL पर है, तो यह डुप्लीकेशन की समस्या को सुलझाता है।
canonical self referencing: आदर्श रूप से, पेज अपने आप को ही कैनॉनिकल बताए।
canonical conflicts: अगर एक पेज पर दो कैनॉनिकल टैग्स हैं या गलत दिशा में पॉइंट कर रहे हैं, तो Google इन्हें इग्नोर कर देगा।
noindex pages: वो पेज जिन्हें आप नहीं चाहते कि Google दिखाए (जैसे थैंक यू पेज, लॉगिन पेज), उन पर noindex टैग होना चाहिए।
pagination tags: जब कंटेंट कई पेजों में बंटा हो (जैसे ई-कॉमर्स प्रोडक्ट्स), तो rel="next" और rel="prev" टैग्स सीरीज़ को समझाते हैं।
hreflang tags: अगर आपकी साइट अलग-अलग भाषाओं में है (जैसे Hindi/English), तो hreflang बताता है कि कौन सा वर्ज़न किस देश के यूज़र को दिखाना है।
hreflang conflicts: अगर कोड गलत है या URL मौजूद नहीं है, तो यह एरर पैदा करता है।
? H. SCHEMA / STRUCTURED DATA (स्ट्रक्चर्ड डेटा)
यह Google को "एक्स्ट्रा जानकारी" देने का तरीका है। इससे सर्च रिजल्ट्स में "रिच स्निपेट्स" (Rich Snippets) जैसे स्टार रेटिंग, प्राइस आदि दिखते हैं।

Organization schema: यह आपकी कंपनी का लोगो, नाम और सोशल प्रोफाइल लिंक्स Google को देता है।
Person schema: किसी व्यक्ति (जैसे लेखक) के लिए, जिसमें उनका नाम, फोटो और सोशल लिंक्स होते हैं।
WebSite schema: साइट के नाम और सर्च बॉक्स (Sitelinks Searchbox) को एनेबल करने के लिए।
SearchAction: यह बताता है कि साइट पर इंटर्नल सर्च कैसे काम करता है।
WebPage schema: किसी खास वेबपेज के बारे में मेटाडेटा।
Article / BlogPosting: ब्लॉग पोस्ट या न्यूज़ आर्टिकल के लिए। इससे हेडलाइन, ऑथर, पब्लिश डेट साफ दिखते हैं।
FAQPage: जब आप सवाल-जवाब का सेक्शन डालते हैं, तो यह स्कीमा Google को बताता है। इससे सर्च में सीधे जवाब दिखते हैं।
BreadcrumbList: पेज के हायरार्की (Home > Blog > Post) को दिखाने के लिए।
Product: प्रोडक्ट की प्राइस, उपलब्धता (In stock), और रिव्यू दिखाने के लिए।
Review / Rating: स्टार रेटिंग (★ 4.5) दिखाने के लिए।
SoftwareApplication (tools ke liye): अगर आप कोई सॉफ्टवेयर या टूल बेच रहे हैं, तो इसकी प्राइसिंग और OS के लिए।
HowTo: "कैसे करें" वाले आर्टिकल्स के लिए, जिसमें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड दिखे।
VideoObject: वीडियो की ड्यूरेशन और थंबनेल के लिए।
Event: किसी इवेंट (जैसे वेबिनार) की तारीख और स्थान दिखाने के लिए।
JobPosting: जॉब पोस्टिंग के लिए, जिससे सर्च में सैलरी और लोकेशन दिखे।
LocalBusiness: स्थानीय व्यवसाय (जैसे दुकान) के लिए, जिसमें पता, खुलने का समय (Opening Hours) हो।
? I. AI / AEO / GEO PARAMETERS (एआई और जियो-टार्गेटिंग)
यह भविष्य का SEO है। AI (जैसे ChatGPT या Google SGE) कैसे आपके कंटेंट को समझेगा?

Direct answer paragraph: अपने आर्टिकल की शुरुआत में ही सीधा और स्पष्ट जवाब दें। AI इसे "फीचर्ड स्निपेट" या उत्तर के रूप में पिक करता है।
Question based headings: हेडिंग्स को सवाल के रूप में लिखें (जैसे "SEO क्या है?")। यूज़र वॉइस सर्च और AI चैटबॉट्स ऐसे ही प्रश्न पूछते हैं।
Entity mentions: बस कीवर्ड नहीं, बल्कि "एंटिटी" (नाम, जगह, चीज़ें) का ज़िक्र करें। जैसे "Apple" के साथ "Steve Jobs" और "iPhone" का ज़िक्र करना।
Entity consistency: एंटिटी का नाम पूरे वेब पर एक जैसा होना चाहिए।
Author entity connected: लेखक का नाम उनकी सोशल प्रोफाइल (LinkedIn, Twitter) से जुड़ा होना चाहिए ताकि Google यकीन करे कि यह असल इंसान है।
Organization entity connected: कंपनी की वेबसाइट, सोशल मीडिया, और नॉलेज पैनल आपस में जुड़े हों।
Citations / references: अपनी बात को साबित करने के लिए भरोसेमंद स्रोतों के लिंक दें।
Fact based statements: अफवाहें नहीं, तथ्य (Facts) और डेटा लिखें। AI सच्चाई को प्राथमिकता देता है।
Clear definitions: शब्दों की स्पष्ट परिभाषाएं दें।
Step by step blocks: जटिल प्रोसेस को छोटे-छोटे स्टेप्स में तोड़ें। यह "HowTo" स्कीमा के लिए भी अच्छा है।
Pros cons blocks: फायदे और नुकसान साफ-साफ लिखें। यह कंटेंट को बैलेंस्ड बनाता है।
FAQ blocks: यूज़र के मन में आने वाले संभावित सवालों के जवाब दें।
Summary block: लंबे आर्टिकल के अंत में या शुरू में सारांश (Summary) दें।
TL;DR block: "Too Long; Didn't Read" - जो यूज़र पूरा नहीं पढ़ना चाहता, उसके लिए 2-3 लाइन का निष्कर्ष।
Conversational tone: ऐसे लिखें जैसे आप किसी को आम बोलचाल की भाषा में समझा रहे हों। यह AI के लिए भी अच्छा है।
Freshness signals: कंटेंट को अपडेटेड रखें। पुराना डेटा AI को पसंद नहीं आता।
Location intent present: अगर आप लोकल बिज़नेस हैं, तो अपने शहर या इलाके का ज़िक्र करें।
Service + city mapping: "प्लंबर in दिल्ली" जैसे कॉम्बिनेशन बनाएं।
Geo schema present: स्थानीय व्यवसाय के लिए लोकल स्कीमा (LocalBusiness) ज़रूर लगाएं।
?‍? J. EEAT / TRUST (विश्वास और प्रामाणिकता)
Google का नया मानक है-E-E-A-T (Experience, Expertise, Authoritativeness, Trustworthiness)।

Author name visible: लेखक का नाम साफ दिखना चाहिए। "अज्ञात" (Anonymous) लेखक पर भरोसा कम होता है।
Author bio page: लेखक के बारे में एक अलग पेज होना चाहिए जहाँ उसकी योग्यता (Qualification) लिखी हो।
Author schema: (ऊपर समझाया जा चुका है)।
Real photo: लेखक की असल फोटो (स्टॉक फोटो नहीं) होनी चाहिए। यह इंसानियत दिखाती है।
Experience proof: क्या लेखक इस विषय में वास्तव में अनुभवी है? उसके पोर्टफोलियो या केस स्टडी का ज़िक्र होना चाहिए।
About page depth: 'हमारे बारे में' (About Us) पेज सिर्फ 2 लाइन नहीं होना चाहिए। इतिहास, मिशन, टीम सब कुछ होना चाहिए।
Editorial policy: अगर आप न्यूज़ या मेडिकल जानकारी देते हैं, तो एडिटोरियल पॉलिसी (आप कैसे चेक करते हैं) होनी चाहिए।
Contact info: ईमेल, फॉर्म, या फोन नंबर होना चाहिए ताकि यूज़र संपर्क कर सके।
Address visible: (विशेष रूप से स्थानीय व्यवसायों के लिए) वास्तविक पता होना चाहिए।
Phone visible: कस्टमर सपोर्ट के लिए फोन नंबर।
Privacy policy: यूज़र को बताना कि आप उनका डेटा कैसे इस्तेमाल करते हैं। बिना इसके Google पर भरोसा मुश्किल है।
Terms of service: साइट इस्तेमाल करने के नियम।
Refund policy: अगर आप कुछ बेच रहे हैं, तो रिफंड पॉलिसी होनी चाहिए।
External profiles linked: आपकी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स (LinkedIn, Instagram) वेबसाइट से जुड़ी हों।
Brand mentions: दूसरी बड़ी साइट्स पर आपके ब्रांड का नाम आना ऑथोरिटी बढ़ाता है।
? K. CONTENT QUALITY (कंटेंट की गुणवत्ता)
"Content is King" अब भी सच है, पर अब केवल कोई भी कंटेंट नहीं चलेगा, "क्वालिटी कंटेंट" चाहिए।

Search intent match: यूज़र क्या चाहता है? जानकारी? कुछ खरीदना? या किसी वेबसाइट पर जाना? आपका कंटेंट उस 'इरादे' (Intent) को पूरा करे।
Content depth: सतही जानकारी न दें। विषय को हर एंगल से कवर करें।
Original content: कॉपी-पेस्ट न करें। अपना अनूठा अनुभव और राय जोड़ें।
AI generated detection risk: अगर आप AI से लिखवा रहे हैं, तो उसे ह्यूमन टच दें। पूरी तरह से AI जनरेटेड टेक्स्ट Google को पसंद नहीं आता।
Thin content: बहुत छोटे या बेमतलब के पेज जो किसी सवाल का जवाब नहीं देते।
Duplicate content: अपनी ही साइट पर या दूसरी साइट से कॉपी किया हुआ कंटेंट। इससे पेनल्टी हो सकती है।
Keyword stuffing: बार-बार एक ही कीवर्ड डालना। यह पढ़ने में बुरा लगता है और स्पैम है।
Semantic coverage: सिर्फ मुख्य कीवर्ड नहीं, उससे जुड़े LSI कीवर्ड्स (संबंधित शब्द) भी इस्तेमाल करें।
Topic coverage: पूरे टॉपिक को क्लस्टर के रूप में कवर करें।
Reading ease: छोटे वाक्य, सरल शब्द। यह कॉमन मैन को समझना चाहिए।
Skimmable layout: बड़े पैराग्राफ न लिखें। बुलेट पॉइंट्स, बोल्ड टेक्स्ट और सबहेडिंग्स का इस्तेमाल करें।
Table of contents: लंबे ब्लॉग के शुरू में विषय सूची (Table of Contents) होनी चाहिए।
Content freshness: पुराने आर्टिकल को समय-समय पर अपडेट करते रहें।
Content update log: पेज पर लिखें कि "आखिरी बार यह आर्टिकल कब अपडेट हुआ था"।
? L. UX / UI (यूज़र एक्सपीरियंस और इंटरफेस)
अगर साइट तेज़ है पर इस्तेमाल करने में मुश्किल है, तो यूज़र वापस चला जाएगा।

Navigation clarity: मेनू साफ और सीधा होना चाहिए। यूज़र को अंदाज़ा लगना चाहिए कि क्या कहाँ मिलेगा।
Breadcrumb UI: पेज के ऊपर Home > Category > Product जैसा ट्रैक दिखना चाहिए।
Mobile usability: साइट मोबाइल पर बिना ज़ूम किए इस्तेमाल हो सकनी चाहिए।
Font readability: फॉन्ट का साइज़ छोटा न हो। कलर बैकग्राउंड से अलग हो।
Line height: लाइनों के बीच की दूरी अच्छी होनी चाहिए ताकि आंखों को आराम मिले।
Contrast ratio: टेक्स्ट और बैकग्राउंड का रंग ऐसा हो कि पढ़ने में दिक्कत न हो (खासकर सूरज की रोशनी में)।
Tap target size: मोबाइल पर बटन्स उंगली से आसानी से दबने चाहिए (कम से कम 48x48 pixels)।
Scroll behaviour: स्क्रॉल स्मूथ होना चाहिए।
Sticky elements abuse: हेडर या चैटबॉट्स स्क्रीन पर बहुत जगह नहीं लेने चाहिए।
Popup intrusion: जैसे ही साइट खुले पॉप-अप (Pop-ups) नहीं आने चाहिए। यह बहुत नाराज़ करता है।
CTA clarity: "Buy Now" या "Sign Up" जैसे बटन साफ और आकर्षक हों।
Conversion friction: खरीदारी या साइन अप करने की प्रोसेस जितनी छोटी होगी, उतना बेहतर।
Form usability: फॉर्म ज़्यादा लंबा न हो। गलतियां बताने के लिए इनलाइन वैलिडेशन (Inline Validation) हो।
? M. SECURITY & COMPLIANCE (सुरक्षा और अनुपालन)
सुरक्षित साइट पर ही यूज़र अपना डेटा डालता है।

HTTPS enforced: साइट पर SSL सर्टिफिकेट होना चाहिए (पते में लॉक आइकन और https)।
HSTS (HTTP Strict Transport Security): यह ब्राउज़र को बताता है कि वो हमेशा HTTPS का इस्तेमाल करे, कभी HTTP नहीं।
Mixed content: अगर पेज HTTPS पर है लेकिन कोई इमेज या स्क्रिप्ट HTTP (असुरक्षित) से लोड हो रही है, तो यह "मिक्स्ड कंटेंट" एरर है।
CSP headers (Content Security Policy): यह हैकर्स को डेटा इंजेक्ट करने से रोकता है।
X-Frame-Options: यह रोकता है कि आपकी साइट किसी दूसरी साइट के अंदर फ्रेम में न दिखे (Clickjacking attack रोकने के लिए)।
X-Content-Type-Options: यह ब्राउज़र को MIME-type स्निफिंग रोकने को कहता है।
Referrer policy: यह नियंत्रित करता है कि जब यूज़र किसी लिंक पर क्लिक करता है, तो कितनी जानकारी (URL data) अगली साइट को भेजी जाए।
Cookie consent: GDPR और नियमों के लिए यूज़र से कुकीज़ (Cookies) इस्तेमाल करने की अनुमति लेनी ज़रूरी है।
GDPR notice: यूरोपीय यूनियन के नियमों के अनुसार, डेटा संग्रह की जानकारी देनी होती है।
Data collection notice: यह स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि आप यूज़र का डेटा क्यों और कैसे इकट्ठा कर रहे हैं।
? N. ANALYTICS & TRACKING (विश्लेषण और ट्रैकिंग)
जो मापा नहीं जा सकता, उसे सुधारा नहीं जा सकता।

GA / GTM installed: Google Analytics 4 और Google Tag Manager इंस्टॉल होना चाहिए ताकि डेटा आ सके।
Consent mode: ट्रैकिंग केवल तभी शुरू हो जब यूज़र कुकीज़ को स्वीकार करे (Consent Mode v2)।
Events tracking: क्लिक, डाउनलोड, वीडियो प्ले जैसी एक्शन्स ट्रैक हो रही हैं या नहीं?
Scroll tracking: क्या यूज़र पेज के नीचे तक स्क्रॉल कर रहा है?
Conversion tracking: सेल्स, लीड्स, या साइन-अप्स सही से रिकॉर्ड हो रहे हैं?
Error tracking: जावास्क्रिप्ट एरर्स या ब्रोकन लिंक्स का पता लगाना।
404 tracking: कौन से पेज "Not Found" हो रहे हैं और यूज़र कहाँ से आ रहे हैं?
Core actions tracked: आपके बिज़नेस के सबसे महत्वपूर्ण काम्स (Core Actions) ट्रैक हो रहे हैं?
? O. TECH STACK & DELIVERY (तकनीकी ढांचा)
Server type: आप Nginx, Apache, या Cloudflare इस्तेमाल कर रहे हैं? हर सर्वर की अपनी स्पीड होती है।
Hosting quality: आप शेयर्ड होस्टिंग पर हैं या VPS/Dedicated सर्वर पर? अच्छी होस्टिंग स्पीड की गारंटी है।
CMS detection: WordPress, Shopify, या Custom Code? CMS से ऑप्टिमाइज़ेशन के तरीके बदलते हैं।
PHP / runtime version: पुराना PHP (जैसे 7.4) धीमा हो सकता है। नया वर्ज़न (8.1+) तेज़ और सुरक्षित होता है।
HTTP headers: सर्वर के रिस्पॉन्स हेडर्स चेक करें (Cache-Control, Expires आदि)।
Cache headers: ब्राउज़र को बताना कि फाइल्स कितनी देर तक कैश (Cache) में रखें।
Edge caching: दुनिया भर के एज (Edge) सर्वर्स पर कंटेंट स्टोर करना।
CDN POP coverage: आपका CDN कितने शहरों (Points of Presence) में मौजूद है? जितने ज्यादा उतनी बेहतर स्पीड।
API latency: अगर आप थर्ड पार्टी API (जैसे मौसम, पेमेंट गेटवे) इस्तेमाल करते हैं, तो उनका रिस्पॉन्स टाइम कितना है?
Third-party scripts count: बहुत सारे एड-वेयर, चैट बॉट्स साइट को भारी (Heavy) बनाते हैं। इनकी संख्या कम रखें।
? P. BRAND & OFF-PAGE SIGNALS (ब्रांड और बाहरी संकेत)
SEO सिर्फ आपकी साइट तक सीमित नहीं है, यह इंटरनेट पर आपकी प्रतिष्ठा (Reputation) भी है।

Brand SERP presence: जब कोई आपके ब्रांड का नाम सर्च करे, तो क्या दिखता है? क्या आपकी वेबसाइट टॉप पर है? क्या सोशल प्रोफाइल्स दिख रहे हैं?
Knowledge panel: दाईं ओर आने वाला ज्ञान पैनल (Knowledge Panel) जिसमें ब्रांड की जानकारी होती है। यह बड़े ब्रांड्स की पहचान है।
Google business profile: स्थानीय व्यवसायों के लिए Google Maps पर प्रोफाइल होना अनिवार्य है।
Social verification: सोशल मीडिया अकाउंट्स वेरिफाइड (Blue Tick) होने चाहिए।
Consistent NAP: नाम (Name), पता (Address), और फोन (Phone) नंबर इंटरनेट पर हर जगह एक जैसा होना चाहिए।
Reviews count: ज्यादा रिव्यूज़ मतलब ज्यादा भरोसा।
Review velocity: रिव्यूज़ समय-समय पर आ रहे हैं या बहुत पुराने हैं?
External mentions: दूसरी साइट्स पर आपके ब्रांड का ज़िक्र (बिना लिंक के भी) महत्वपूर्ण है।
PR links: प्रेस रिलीज़ और न्यूज़ साइट्स से मिलने वाले बैकलिंक्स बहुत शक्तिशाली होते हैं।
⚠️ Q. PENALTIES & RISK (दंड और जोखिम)
आखिर में, यह चेक करना ज़रूरी है कि कहीं आप गलत काम (Black Hat SEO) तो नहीं कर रहे जिससे Google आपको प्रतिबंधित (Ban) कर दे।

Spam links: क्या कोई सस्ते, कम-गुणवत्ता वाली साइट्स से आपको बहुत ज्यादा बैकलिंक्स मिल रहे हैं? यह खतरनाक है।
Auto generated pages: सॉफ्टवेयर से बनाए गए, बेमानी पेज जो सिर्फ कीवर्ड्स से भरे हों।
Doorway pages: वो पेज जो यूज़र को एक जगह से लेकर दूसरी जगह (अक्सर विज्ञापन के पास) भेजने के लिए बनाए गए हों।
Cloaking: Google बॉट को अलग कंटेंट दिखाना और यूज़र को अलग। यह धोखा है और इसके लिए तुरंत पैनल्टी मिलती है।
Hidden text: पेज पर वह टेक्स्ट जो बैकग्राउंड के रंग जैसा होने के कारण यूज़र को न दिखे (सिर्फ SEO के लिए)।
Parasite pages: किसी बड़ी अथॉरिटी साइट (जैसे Medium, LinkedIn) पर रैंक पाने की कोशिश करना।
Over optimized anchors: हर जगह एक ही एक्जैक्ट मैच कीवर्ड वाला लिंक होना।
AI spam pattern: बहुत ज्यादा AI कंटेंट बिना एडिट के पब्लिश करना।
Scaled content risk: बहुत बड़े पैमाने पर (Scalable) कम-गुणवत्ता वाला कंटेंट बनाना।




Leave a comment

We are accepting Guest Posting on our website for all categories.


Comments





Wefru Services

I want to Hire a Professional..