आओ जानू मानव नेत्र किसे कहते हैं
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मानव नेत्र एक अत्यंत जटिल और महत्वपूर्ण ज्ञानेन्द्रिय है, जो प्रकाश को महसूस करती है और दृष्टि प्रदान करती है, जिससे हम अपने आसपास की दुनिया को देख सकते हैं और उसमें रंग व गहराई महसूस कर सकते हैं। यह कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस और रेटिना जैसे कई भागों से बनी होती है, जो मिलकर प्रकाश को ग्रहण करती हैं और उसे विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजती हैं, जिससे हम वस्तुओं को पहचान पाते हैं।
नेत्र में प्रकाश कॉर्निया से प्रवेश करता है, और फिर आइरिस (परितारिका) पुतली के आकार को नियंत्रित करके नियंत्रित मात्रा में प्रकाश को अंदर जाने देती है।
प्रकाश नेत्र लेंस से होकर गुजरता है, जो उसे रेटिना पर केंद्रित करता है।
रेटिना में मौजूद प्रकाश-संवेदी कोशिकाएं प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदल देती हैं, जो ऑप्टिक तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुंचते हैं।
मस्तिष्क इन संकेतों को समझता है और हमें वस्तुओं, रंगों और उनकी स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
आँख की सबसे बाहरी, पारदर्शी परत जो प्रकाश को प्रवेश करने देती है।
आँख का रंगीन भाग जो पुतली के आकार को नियंत्रित करके प्रकाश की मात्रा को समायोजित करता है।
आइरिस के बीच का छिद्र, जो प्रकाश को नेत्र लेंस में प्रवेश करने देता है।
एक उभयोत्तल लेंस जो प्रकाश किरणों को रेटिना पर केंद्रित करता है।
आँख के अंदर की प्रकाश-संवेदी परत, जो प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती है।
रेटिना से विद्युत संकेतों को मस्तिष्क तक ले
जाने वाली तंत्रिका।
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Garima kumari
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