यह एक प्रसिद्ध प्रेरणादायक लोककथा है:
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यह एक प्रसिद्ध प्रेरणादायक लोककथा है:
एक मूर्तिकार बहुत प्रसिद्ध और अपनी कला में माहिर था। जब उसे पता चला कि उसकी मृत्यु का समय निकट आ गया है और मौत का दूत (यमराज) उसे लेने आने वाला है, तो उसने बचने के लिए एक तरकीब सोची।
उसने अपनी कला का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करते हुए अपने जैसी 11 हूबहू मूर्तियां बनाईं। जब मौत का दूत उसे लेने आया, तो वह मूर्तिकार उन 11 मूर्तियों के बीच में जाकर बिल्कुल शांत खड़ा हो गया।
दूत ने देखा कि वहां एक ही जैसे 12 लोग खड़े हैं। मूर्तियां इतनी जीवंत थीं कि दूत समझ ही नहीं पाया कि असली इंसान कौन सा है।
तब दूत ने मूर्तिकार के घमंड का फायदा उठाने की सोची। उसने मूर्तियों को देखते हुए कहा-"वाह! बनाने वाले ने बहुत ही शानदार मूर्तियां बनाई हैं, लेकिन अफसोस कि इसमें एक बहुत बड़ी गलती छूट गई है।"
अपनी कला में कोई कमी सुनकर मूर्तिकार का अहंकार जाग उठा। वह खुद को रोक नहीं पाया और तुरंत बोल पड़ा-"क्या गलती? मेरी बनाई मूर्ति में कोई कमी नहीं हो सकती!"
जैसे ही वह बोला, दूत ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ लिया और कहा-"बस यही एक गलती थी-तुम्हारा घमंड।" और वह उसे अपने साथ ले गया।
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Vanshika
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