भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान और मुख्य बातें

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का योगदान और मुख्य बातें

इतिहास की किताब "भारत और समकालीन विश्व - 2" का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय 'भ इस पूरे अध्याय में भारत की आजादी की लड़ाई और देशवासियों को एक सूत्र में बांधने में महात्मा गांधी का सबसे बड़ा और अतुलनीय योगदान दिखाया गया है।

यदि आप कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या भारतीय इतिहास के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को समझना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी है।

1. सत्याग्रह का विचार और शुरुआती आंदोलन

1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटने के बाद महात्मा गांधी ने देश के विभिन्न हिस्सों में अहिंसक आंदोलनों की शुरुआत की। उन्होंने 'सत्याग्रह' का हथियार अपनाया, जिसका अर्थ था-सत्य की शक्ति पर आग्रह और अहिंसा के जरिए अन्याय का विरोध।

चंपारण आंदोलन (1917): बिहार के चंपारण में दमनकारी नील खेती व्यवस्था के खिलाफ किसानों का साथ दिया।

खेड़ा सत्याग्रह (1917): गुजरात के खेड़ा जिले में फसल खराब होने पर किसानों के लिए लगान माफ कराने की मांग की।

अहमदाबाद सूती कपड़ा मिल आंदोलन (1918): मिल मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के लिए संघर्ष किया।

2. रौलट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)

अंग्रेजी सरकार द्वारा लाए गए रौलट एक्ट के तहत बिना मुकदमा चलाए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक जेल में बंद रखा जा सकता था। गांधीजी ने इसके खिलाफ देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवा दीं। इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश में आक्रोश भर दिया और राष्ट्रीय आंदोलन को एक नया मोड़ दिया।

3. असहयोग और ख़िलाफ़त आंदोलन (1921-1922)

गांधीजी का मानना था कि भारत में अंग्रेजी शासन भारतीयों के सहयोग से ही चल रहा है। यदि भारतीय सहयोग देना बंद कर दें, तो ब्रिटिश शासन ध्वस्त हो जाएगा।

मुख्य कदम: सरकारी नौकरियों, स्कूलों, अदालतों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार किया गया।

ख़िलाफ़त का साथ: हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने के लिए गांधीजी ने ख़िलाफ़त आंदोलन का समर्थन किया।

चौरी-चौरा कांड: फरवरी 1922 में गोरखपुर के चौरी-चौरा में हिंसा होने के कारण गांधीजी ने इस आंदोलन को वापस ले लिया।

4. सविनय अवज्ञा आंदोलन और नमक यात्रा (1930)

11 मार्च 1930 को गांधीजी ने अपने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील की प्रसिद्ध 'दांडी यात्रा' शुरू की।

नमक कानून तोड़ना: 6 अप्रैल को दांडी पहुंचकर गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजों के एकाधिकार को चुनौती दी।

जनभागीदारी: इस आंदोलन में किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और विशेष रूप से महिलाओं ने भारी संख्या में भाग लिया।

5. सामूहिक अपनेपन का भाव और राष्ट्रवाद का विकास

गांधीजी के आंदोलनों के साथ-साथ देश में राष्ट्रवाद की भावना जगाने के लिए सांस्कृतिक प्रतीकों का भी सहारा लिया गया:

भारत माता की छवि: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और अवनींद्रनाथ टैगोर द्वारा बनाई गई भारत माता की तस्वीरों ने लोगों में भक्ति भावना जगाई।

राष्ट्रीय ध्वज: गांधीजी ने 1921 तक एक 'स्वराज ध्वज' तैयार किया, जिसके बीच में चरखा आत्मनिर्भरता का प्रतीक था।

लोककथाएं और इतिहास: भारतीय लोकगीतों और गौरवशाली इतिहास की पुनर्व्याख्या ने देशवासियों में आत्मसम्मान का भाव भरा।

निष्कर्ष (Summary)

10वीं की इतिहास की किताब यह स्पष्ट करती है कि महात्मा गांधी ने न केवल अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसक संघर्ष की नींव रखी, बल्कि अलग-अलग वर्गों, धर्मों और जातियों में बंटे भारत को एक राष्ट्र के रूप में एकजुट किया। यही कारण है कि कक्षा 10वीं के इतिहास पाठ्यक्रम में उनका योगदान सबसे प्रमुखता से पढ़ाया जाता है।'करो या मरो' का नारा: महात्मा गांधी ने मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान (अब क्रांति मैदान) से यह ऐतिहासिक नारा दिया था।

महिला नेतृत्व: गांधी जी और प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद 23 वर्षीय अरुणा आसफ़ अली ने मुंबई में तिरंगा फहराकर आंदोलन की कमान संभाली।

गुप्त रेडियो स्टेशन: ऊषा मेहता और उनके साथियों ने अंग्रेजों की सेंसरशिप से बचने के लिए एक अंडरग्राउंड 'कांग्रेस रेडियो' चलाया, जिससे आंदोलन की खबरें पूरे देश में पहुंचती थीं।

समानांतर सरकारें (Parallel Governments): देश के कई हिस्सों जैसे महाराष्ट्र के सतारा, यूपी के बलिया और बंगाल के तमलुक में लोगों ने ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंककर अपनी खुद की सरकारें बना ली थीं।

बिना किसी मुख्य नेता के चला आंदोलन: 'ऑपरेशन ज़ीरो अवर' के तहत अंग्रेजों ने सभी बड़े नेताओं को आंदोलन शुरू होते ही जेल में डाल दिया था, फिर भी आम जनता ने इसे खुद आगे बढ़ाया।

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Vanshika

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Student in Deoband/ vanshika 




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