GSTR-1 और GSTR-3B दोनों GST रिटर्न हैं, लेकिन इनका उद्देश्य और काम अलग-अलग है। इन्हें आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है:
GSTR-1 क्या है?
यह एक विस्तृत रिटर्न है, जिसमें आपको अपनी सभी बिक्री/आउटवर्ड सप्लाई की जानकारी इनवॉइस-वार देनी होती है।
इसमें आप बताते हैं कि आपने किसको, क्या, कितने में बेचा और कितना कर लगाया।
यह रिटर्न कर भुगतान के लिए नहीं है। यह केवल जानकारी का रिटर्न है।
इसका सीधा असर आपके ग्राहक पर पड़ता है, क्योंकि ग्राहक आपके GSTR-1 में दिखाए गए डेटा के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करता है।
सामान्य मासिक अंतिम तिथि: अगले महीने की 11 तारीख (यदि टर्नओवर ₹5 करोड़ से अधिक है)।
QRMP (त्रैमासिक) योजना में: तिमाही के बाद वाले महीने की 13 तारीख।
इसमें गलती होने पर संशोधन संभव है — अगले GSTR-1 में संशोधन करके ठीक किया जा सकता है।
GSTR-3B क्या है?
यह एक सारांश रिटर्न है, जिसमें आपको बिक्री, ITC और देय कर की कुल राशि भरनी होती है।
यह रिटर्न कर की गणना और भुगतान के लिए है। इसके बिना कर जमा नहीं होता।
इसका असर आप पर पड़ता है, क्योंकि आप इसमें अपना ITC दावा करते हैं और शेष कर जमा करते हैं।
सामान्य मासिक अंतिम तिथि: अगले महीने की 20 तारीख (अधिकांश करदाताओं के लिए)।
QRMP योजना में: तिमाही के बाद वाले महीने की 22 या 24 तारीख (राज्य के अनुसार)।
इसमें गलती होने पर सीधा संशोधन संभव नहीं है। गलती सुधारने के लिए अगले रिटर्न में सुधार या DRC-03 जैसी प्रक्रिया अपनानी पड़ती है।
दोनों का आपसी संबंध
क्रम है: पहले GSTR-1, फिर GSTR-3B।
GSTR-1 में बताई गई बिक्री के आधार पर ही GSTR-3B में देय कर की गणना होती है।
यदि GSTR-1 गलत या देर से भरा जाए, तो ग्राहक को ITC लेने में दिक्कत हो सकती है, GSTR-3B का डेटा मेल नहीं खा सकता, और कर विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है।